संसद के मानसून सत्र में 29 जुलाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ पर बड़ी बहस होने जा रही है, जो राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों लिहाज़ से बेहद अहम मानी जा रही है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार ने लोकसभा में 16 घंटे और राज्यसभा में 9 घंटे की चर्चा के लिए समय तय किया है, जिसे बाद में राज्यसभा में भी 16 घंटे तक बढ़ा दिया गया।
इस चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बोलने की उम्मीद है, जबकि विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है।
बहस क्यों ज़रूरी हो गई?
इस बहस की मांग तब से ज़ोर पकड़ रही है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच “सीजफायर करवाई थी”, यानी युद्ध रोकवाया था। ट्रंप ये बात अब तक 25 बार दोहरा चुके हैं, जिससे भारत की विदेश नीति और संप्रभुता पर सवाल उठ रहे हैं।
विपक्ष का कहना है कि अगर ट्रंप की बात सही है, तो क्या भारत ने किसी विदेशी नेता की मदद से युद्ध टालने की अनुमति दी?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे भारत के लिए “शर्मनाक” बताया और कहा कि प्रधानमंत्री को खुद संसद में जवाब देना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा – “दाल में कुछ काला है” और इस पर खुलकर बहस होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री का जवाब क्या होगा?
सरकार ने संकेत दिए हैं कि प्रधानमंत्री मोदी खुद संसद में जवाब देंगे और यह साफ करेंगे कि कोई भी मध्यस्थता नहीं हुई थी।
विदेश मंत्रालय पहले ही साफ कर चुका है कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो भी सीजफायर हुआ, वह आपसी समझौते के तहत हुआ था, न कि ट्रंप की वजह से।
ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमला
इस बहस में 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का मुद्दा भी शामिल किया गया है, जिसमें 26 हिंदू श्रद्धालुओं की जान गई थी। विपक्ष पूछ रहा है कि अब तक हमले के जिम्मेदार आतंकियों को पकड़ा क्यों नहीं गया?
सरकार की तरफ से कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर इसी के जवाब में चलाया गया, लेकिन अब तक इसके पूरे ब्योरे सामने नहीं आए हैं।
बिहार में SIR यानी Special Intensive Revision
चर्चा के दौरान बिहार में चल रही वोटर लिस्ट की स्पेशल रिवीजन (SIR) का मुद्दा भी उठेगा। विपक्ष का आरोप है कि इसमें गड़बड़ियां हो रही हैं, जबकि सरकार कह रही है कि यह नियमित प्रक्रिया है।
अब आगे क्या?
- बहस 28 जुलाई को लोकसभा में शुरू होगी और 29 जुलाई को राज्यसभा में जारी रहेगी।
- यह बहस संसद के इतिहास की सबसे लंबी चर्चाओं में से एक हो सकती है, जिसमें सुरक्षा, विदेश नीति और राजनीति—तीनों पहलुओं पर बात होगी।
- इसमें इस बात पर भी चर्चा होगी कि क्या सरकार जनता और संसद को ऑपरेशन सिंदूर के सभी तथ्यों से अवगत करा रही है या नहीं।
लोगों के लिए क्यों ज़रूरी है जानना?
- क्योंकि ये बहस सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा, हमारे पड़ोसी देशों से रिश्ते, और भारत की विदेश नीति की साख से जुड़ी है।
- अगर किसी विदेशी नेता ने हमारे देश की ओर से बिना जानकारी के कुछ तय किया, तो यह संप्रभुता पर सीधा हमला माना जाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर और ट्रंप के दावे ने संसद का तापमान बढ़ा दिया है। अब देखना ये है कि इस बहस में सरकार कितनी पारदर्शिता दिखाती है और विपक्ष इसे किस हद तक मुद्दा बनाता है। संसद में होने वाली ये 25 घंटे की बहस न सिर्फ सांसदों के लिए, बल्कि हर आम नागरिक के लिए भी अहम होगी।