राफेल-स्कॉर्पीन से लेकर 6th Generation Fighter Jet तक… भारत-फ्रांस की दोस्ती ने बदली रफ्तार

भारत और फ्रांस के रिश्ते पिछले कई दशकों से मजबूत रहे हैं। लेकिन अब दोनों देशों की यह दोस्ती एक नए दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। Rafale Fighter Jet और Scorpene Submarine से शुरू हुआ Defence Cooperation अब नई Technology, Joint Production, Space, AI और 6th Generation Fighter Aircraft जैसे बड़े Projects तक पहुंच रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की 14 जून 2026 को नीस में हुई मुलाकात ने इस बदलते रिश्ते को एक बार फिर चर्चा में ला दिया। दोनों देशों के बीच अब सिर्फ हथियार खरीदने की जगह मिलकर Technology Develop करने और Defence Equipment बनाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

दशकों पुराना है भारत-फ्रांस का Defence रिश्ता

भारत और फ्रांस के बीच Defence Cooperation कोई नया रिश्ता नहीं है। भारतीय सेनाएं कई दशकों से French Technology और Military Equipment का इस्तेमाल करती रही हैं।

भारतीय वायुसेना ने Mystère, Jaguar, Mirage-2000 और अब Rafale जैसे Fighter Aircraft का इस्तेमाल किया है। वहीं भारतीय नौसेना और थल सेना ने भी French-origin Aircraft और Helicopters का इस्तेमाल किया है।

यही लंबा अनुभव दोनों देशों के बीच भरोसे की बड़ी वजह माना जाता है।

भारत और फ्रांस के बीच 1998 में Strategic Partnership शुरू हुई थी। उस समय Defence और Security के साथ-साथ Nuclear Energy और Space Cooperation को भी इसका हिस्सा बनाया गया था।

समय के साथ इस रिश्ते का दायरा और बढ़ता गया। आज इसमें AI, Innovation, Renewable Energy, Maritime Security, Space और Indo-Pacific जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।

Rafale ने बढ़ाया Defence Cooperation

भारत और फ्रांस की Defence Partnership की बात हो और Rafale का जिक्र न हो, ऐसा हो नहीं सकता।

भारत ने फ्रांस से 36 Rafale Fighter Jets खरीदे थे। इन विमानों की पूरी Delivery 2022 तक हो गई थी।

Rafale ने भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ दोनों देशों के Defence Relations को भी नई मजबूती दी।

इसके बाद भारत ने Navy के लिए भी Rafale का Naval Version यानी Rafale-M लेने का फैसला किया।

भारत और फ्रांस के बीच 2025 में भारतीय नौसेना के लिए 26 Rafale-Marine Aircraft की खरीद का समझौता हुआ। ये Aircraft खास तौर पर Aircraft Carrier से उड़ान भरने और समुद्र में ऑपरेशन के लिए बनाए गए हैं।

यानी अब Rafale सिर्फ Indian Air Force का हिस्सा नहीं है, बल्कि Indian Navy की Combat Capability को भी मजबूत करने जा रहा है।

Scorpene Submarine से मिला Make in India को बढ़ावा

भारत-फ्रांस Defence Cooperation का एक और बड़ा उदाहरण Scorpene-class Submarine Project है।

इन Submarines का निर्माण भारत में Mazagon Dock Shipbuilders के जरिए किया गया है, जिसमें France की Naval Group की Technology और Technical Support शामिल है।

इस Project की छठी और आखिरी Scorpene Submarine को 2025 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारत को सिर्फ एक तैयार Submarine नहीं मिली, बल्कि देश में Submarine निर्माण की क्षमता और Defence Manufacturing Ecosystem को भी मजबूती मिली।

यही वह मॉडल है जिसे भारत आगे दूसरे Defence Projects में भी अपनाना चाहता है।

अब सिर्फ खरीदना नहीं, मिलकर बनाना है लक्ष्य

भारत की Defence Policy में पिछले कुछ वर्षों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

पहले भारत का मॉडल काफी हद तक ऐसा था कि विदेश से तैयार हथियार और Military Equipment खरीदे जाएं।

अब कोशिश है कि विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर:

Design करें → Technology Develop करें → भारत में Production करें → Maintenance करें → और आगे नई Technology पर Research करें।

भारत-फ्रांस रिश्ते में भी यही बदलाव दिखाई दे रहा है।

दोनों देश अब Co-Development और Co-Production पर जोर दे रहे हैं। आसान भाषा में कहें तो भारत सिर्फ France का Customer नहीं रहना चाहता, बल्कि Technology और Defence Equipment बनाने में Partner बनना चाहता है।

Safran के साथ बढ़ता Aerospace Cooperation

इस दिशा में French Aerospace Company Safran के साथ भारत का Cooperation भी काफी अहम है।

भारत में Safran की Aircraft Engine से जुड़ी MRO Facility विकसित की जा रही है। MRO यानी Maintenance, Repair and Overhaul—मतलब Aircraft Engines की देखभाल, Repair और बड़ी Servicing।

इसके अलावा Safran और Bharat Electronics Limited यानी BEL के बीच Defence Equipment और Precision-Guided Weapons के क्षेत्र में Cooperation बढ़ रहा है।

इस तरह की Partnerships का फायदा यह है कि भारत में सिर्फ Equipment इस्तेमाल नहीं होगा, बल्कि उसके Maintenance और Manufacturing से जुड़ी क्षमता भी देश के अंदर विकसित होगी।

तीनों सेनाओं के बीच बढ़ रहा Cooperation

भारत और फ्रांस की Defence Partnership सिर्फ Weapons और Equipment तक सीमित नहीं है।

दोनों देशों की Army, Navy और Air Force के बीच लगातार बातचीत और Joint Military Exercises होते हैं।

इनमें प्रमुख हैं:

  • Exercise Shakti – Army
  • Exercise Garuda – Air Force
  • Exercise Varuna – Navy

इन Exercises के जरिए दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के साथ काम करने, Communication और Military Operations की Practice करती हैं।

Space Security भी अब इस Partnership का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। भारत और फ्रांस Space में बढ़ते Military और Security Challenges को देखते हुए इस क्षेत्र में भी Cooperation बढ़ा रहे हैं।

10 साल का Defence Cooperation Agreement

फरवरी 2026 में भारत और फ्रांस के बीच Defence Cooperation को आगे बढ़ाने के लिए 10-Year Defence Cooperation Agreement को Renew किया गया।

इसके तहत दोनों देशों के Military Institutions के बीच Cooperation बढ़ाने और एक-दूसरे के Defence Establishments में Officers की Reciprocal Deployment पर भी सहमति बनी।

इसका मतलब यह है कि दोनों देशों की Defence Forces के बीच संबंध अब सिर्फ Joint Exercises तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि Institutional Level पर भी Cooperation बढ़ेगा।

सबसे बड़ी खबर—6th Generation Fighter Jet में भारत की Entry?

भारत-फ्रांस Defence Partnership का सबसे बड़ा Future Project 6th Generation Fighter Aircraft हो सकता है।

France, Germany और Spain मिलकर Future Combat Air System यानी FCAS पर काम कर रहे हैं। इसका लक्ष्य आने वाली पीढ़ी के Advanced Fighter Aircraft और उससे जुड़े Combat Systems को विकसित करना है।

भारत की संभावित भागीदारी को लेकर भी चर्चा चल रही है।

अगर भारत इस Project का हिस्सा बनता है तो यह बहुत बड़ा बदलाव होगा।

क्योंकि तब भारत सिर्फ France से Rafale खरीदने वाला देश नहीं होगा, बल्कि Future Generation Fighter Technology के Development में Partner बन सकता है।

हालांकि, अभी इसे Final Deal नहीं माना जा सकता। भारत की संभावित भागीदारी को लेकर बातचीत और विचार-विमर्श जारी है।

114 Rafale का Mega Deal भी अहम

भारत और फ्रांस के रिश्ते में एक और बड़ा मुद्दा भारतीय वायुसेना के लिए 114 Additional Rafale Fighter Jets की संभावित खरीद है।

इस Deal की अनुमानित कीमत करीब ₹3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है।

प्रस्ताव के मुताबिक:

  • 18 Rafale Jets France से सीधे लिए जा सकते हैं।
  • करीब 96 Aircraft भारत में बनाए जाने की योजना है।

यह Deal अगर Final होती है तो इसका फायदा सिर्फ Indian Air Force को नहीं मिलेगा।

भारत का मकसद इसके जरिए देश में Aerospace Manufacturing और Defence Production को बढ़ावा देना भी है।

यानी आने वाले समय में Rafale की बड़ी संख्या भारत में ही बन सकती है और इससे कई भारतीय Companies और Suppliers को भी काम मिलने की संभावना होगी।

क्या भारत अमेरिका से दूरी बना रहा है?

भारत और फ्रांस की बढ़ती नजदीकी को सिर्फ America की Policy या Trump Administration के संदर्भ में देखना सही नहीं होगा।

भारत की Foreign Policy लंबे समय से Strategic Autonomy पर जोर देती रही है।

इसका मतलब है कि भारत किसी एक देश या एक Military Group पर पूरी तरह Depend नहीं रहना चाहता।

France इस मामले में भारत का एक महत्वपूर्ण Partner है, क्योंकि दोनों देश Defence और Technology में Cooperation करते हुए भी अपनी Independent Decision-Making को बनाए रखना चाहते हैं।

इसलिए भारत-फ्रांस की Partnership को America के खिलाफ किसी Alliance के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह ज्यादा सही तरीके से India की Strategic Independence को मजबूत करने वाली Partnership है।

Defence के अलावा Trade और Technology पर भी जोर

भारत और फ्रांस की Partnership सिर्फ Defence तक सीमित नहीं है।

दोनों देशों के बीच Trade, Investment, AI, Space, Nuclear Energy, Innovation और Clean Energy जैसे क्षेत्रों में भी Cooperation बढ़ रहा है।

2026 में दोनों देशों ने AI और Innovation के क्षेत्र में भी कई नए कदम उठाए हैं।

इससे साफ है कि भारत और फ्रांस का रिश्ता अब सिर्फ “France से क्या खरीदना है” तक सीमित नहीं है।

अब सवाल यह है कि:

भारत और फ्रांस मिलकर क्या बना सकते हैं?”

आने वाले समय में क्या बदलेगा?

अगर Rafale का 114 Aircraft Deal और Future Combat Air System में भारत की संभावित भागीदारी आगे बढ़ती है, तो भारत-फ्रांस Defence Partnership एक नए Level पर पहुंच सकती है।

Rafale ने दोनों देशों को मजबूत Defence Partnership दी।

Scorpene ने भारत में Defence Manufacturing को बढ़ावा दिया।

Safran और अन्य Projects Technology और Aerospace Cooperation को आगे बढ़ा रहे हैं।

और अगर 6th Generation Fighter Aircraft में भारत की भागीदारी होती है, तो यह रिश्ता Defence Equipment खरीदने से आगे बढ़कर Future Technology को मिलकर Develop करने वाला रिश्ता बन सकता है।

आखिर में आसान भाषा में समझें

भारत और फ्रांस की दोस्ती अब सिर्फ एक देश बेचता है और दूसरा खरीदता है” वाली नहीं रह गई है।

अब दोनों देश मिलकर Technology Develop करने, भारत में Manufacturing बढ़ाने, Defence Equipment बनाने और Future Military Technology पर काम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

यही वजह है कि आने वाले वर्षों में भारत-फ्रांस की Partnership भारत की Defence Strength, Make in India और Strategic Autonomy के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है।