प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यूनाइटेड किंगडम यात्रा ऐतिहासिक रही, जहां भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगी। यह समझौता कई वर्षों से बातचीत के दौर में था और अब इसके साइन हो जाने से मोदी सरकार को एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल हुई है।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच भरोसे की मिसाल
आज जब दुनियाभर में ट्रेड वॉर और टैरिफ की लड़ाई चल रही है — जिसकी शुरुआत अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर में हुई थी — ऐसे समय में भारत-ब्रिटेन FTA दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक भरोसे और स्थिरता का प्रतीक बनकर उभरा है। यह समझौता इस बात का भी संकेत है कि भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखा है।
2022 में जब पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंध लगा रहे थे, उस समय मोदी सरकार ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया था, जिससे भारत में ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिली, जबकि यूरोप में डबल डिजिट में ऊर्जा महंगाई देखी गई थी।
भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों की मज़बूती
पिछले एक दशक में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार में भारी उछाल आया है।
- 2015 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार £16.4 बिलियन था,
- जो 2024 में बढ़कर £42.6 बिलियन पहुंच गया — यानी 160% की ग्रोथ।
विशेष रूप से सर्विस सेक्टर में भारत की पकड़ मजबूत हुई है।
2015 में:
- भारत की UK से गुड्स इम्पोर्ट £3.9 बिलियन और सर्विसेस £3.2 बिलियन थी,
- जबकि एक्सपोर्ट में गुड्स £6.0 बिलियन और सर्विसेस £3.3 बिलियन थी।
- इससे भारत को £2.2 बिलियन का सरप्लस मिला।
कोविड के कारण 2020 में थोड़ी गिरावट जरूर आई, पर 2021 से रिकवरी तेज रही —
- 2021: £25.2 बिलियन
- 2022: £35.4 बिलियन
- 2023: £39.4 बिलियन
- 2024: £42.6 बिलियन
2024 में भारत का सर्विसेस एक्सपोर्ट £14.7 बिलियन तक पहुंच गया, और गुड्स एक्सपोर्ट £10.1 बिलियन हो गया। भारत का कुल व्यापार सरप्लस अब £8.4 बिलियन है।
किन सेक्टर्स को मिलेगा फायदा?
FTA के तहत ब्रिटेन में भारतीय उत्पादों को लगभग पूरी तरह से ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी। इससे भारत के लेबर-इंटेंसिव और MSME सेक्टर को सबसे ज्यादा लाभ होगा।
- एनिमल और मरीन प्रोडक्ट्स:
- पहले जहां 20% तक ड्यूटी लगती थी, अब 99.3% टैरिफ लाइन पर 0% ड्यूटी होगी।
- मेटल्स:
- एल्यूमीनियम (10%), आयरन और स्टील (2%), कॉपर (4%) — सभी पर अब शून्य शुल्क लगेगा।
- केमिकल्स और प्लास्टिक्स:
- ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल्स (8% तक) पर भी ड्यूटी खत्म।
- यह भारत के बढ़ते इंडस्ट्रियल और फार्मा एक्सपोर्ट्स को सपोर्ट करेगा।
- मशीनरी:
- इलेक्ट्रिकल (14%) और मैकेनिकल (8%) मशीनों पर पूरी तरह से छूट।
- लेदर, फुटवियर और कपड़ा उद्योग:
- अब इन पर भी कोई इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी, जिससे उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु जैसे राज्यों के MSMEs को बढ़ावा मिलेगा।
- प्रोसेस्ड फूड और एग्री प्रोडक्ट्स:
- 99.7% टैरिफ लाइन अब फ्री — पहले 70% तक ड्यूटी लगती थी।
- फलों (20%), मसालों (8%), चाय, कॉफी (10%) पर भी अब ड्यूटी नहीं लगेगी (हालांकि चावल इसमें शामिल नहीं है)।
- गहने, फर्नीचर, स्पोर्ट्स गुड्स:
- 4% तक की ड्यूटी हटाकर अब पूरी तरह टैक्स-फ्री।
रोजगार और स्थानीय निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
यह समझौता भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम को मजबूती देगा। इससे उन क्षेत्रों में तेजी आएगी जहां रोजगार की भारी संभावनाएं हैं, जैसे कि:
- कपड़ा उद्योग
- लेदर
- जेम्स एंड ज्वेलरी
- ऑर्गेनिक केमिकल्स
- आर्टिसनल और हस्तशिल्प उत्पाद
एक रणनीतिक जीत
भारत-ब्रिटेन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एक सोच-समझकर बनाया गया समझौता है, जिससे भारत के निर्यातकों को तात्कालिक और दीर्घकालिक लाभ मिलेंगे। यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि कूटनीति, राष्ट्रीय स्वार्थ, और रणनीतिक साझेदारी का बेहतरीन उदाहरण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा और समझौता भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत करेगा और दुनिया को यह दिखाएगा कि भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक ग्लोबल ट्रेड लीडर बन चुका है।