जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। भारतीय सुरक्षाबलों ने सोमवार को श्रीनगर के हरवन इलाके के पास स्थित लिडवास के जंगलों में हुई एक मुठभेड़ में तीन पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया। इस “ऑपरेशन महादेव” के जरिए सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों को एक बड़ा झटका दिया है।
कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन महादेव?
ऑपरेशन महादेव एक खास इंटेलिजेंस इनपुट और टेक्निकल सर्विलांस के बाद लॉन्च किया गया। सुरक्षाबलों को वैसा ही तकनीकी सिग्नल मिला जैसा 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले में इस्तेमाल हुआ था।
सोमवार सुबह करीब 11 बजे, 24 राष्ट्रीय राइफल्स (Rashtriya Rifles) और 4 पैरा यूनिट की टीम ने मुलनार (हरवन) इलाके में आतंकियों की मूवमेंट पकड़ ली। जैसे ही उनकी लोकेशन कन्फर्म हुई, टीम ने फौरन उन्हें घेर लिया।
जवाबी फायरिंग शुरू होते ही मुठभेड़ तेज हो गई। धीरे-धीरे ऑपरेशन में सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीमें भी शामिल हो गईं और पूरे इलाके को सील कर दिया गया।
कौन थे मारे गए आतंकी?
तीनों आतंकी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े थे और पाकिस्तान के रहने वाले थे।
- सुलेमान शाह (उर्फ हाशिम मूसा/हाशिम मूसा/आसिफ) – माना जा रहा है कि यही आतंकी पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड था, जिसमें अप्रैल में 26 निर्दोष लोग मारे गए थे।
- जिब्रान – एक खतरनाक लश्कर आतंकी, जो अक्टूबर 2023 के सोनमर्ग टनल हमले में शामिल था। उस हमले में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें एक डॉक्टर भी था।
- हमज़ा अफगानी (उर्फ यासिर/अबू हमज़ा) – घाटी में लंबे समय से सक्रिय था और पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आया था।
आईजीपी कश्मीर जोन, विधि कुमार बिर्दी ने बताया कि – “यह एक लंबा ऑपरेशन था। तीन आतंकियों के शव बरामद हुए हैं। पूरी पहचान और फॉरेंसिक जांच के बाद ही आधिकारिक पुष्टि होगी।”
ड्रोन और टेक्निकल सर्विलांस से मिली मदद
यह इलाका दाचीगाम नेशनल पार्क के पास है, जो घने जंगल और मुश्किल भौगोलिक हालात के लिए जाना जाता है। सेना ने इलाके की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया, ताकि आतंकियों की मूवमेंट पर रियल-टाइम नजर रखी जा सके।
हथियारों का जखीरा बरामद
सुरक्षा एजेंसियों को मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद मिला –
- 1 M4 कार्बाइन
- 2 AK-47 राइफल्स
- 17 राइफल ग्रेनेड्स
- अन्य “war-like stores”
इन हथियारों से साफ है कि आतंकी किसी बड़े हमले की तैयारी कर रहे थे।
आर्मी और पुलिस का बयान
सेना की श्रीनगर बेस्ड चिनार कोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बयान जारी कर कहा –
“तीन आतंकियों को मार गिराया गया है। ऑपरेशन जारी है।”
एसएसपी श्रीनगर जीवी संदीप चक्रवर्ती ने बताया –
“तीनों आतंकी पाकिस्तान के रहने वाले थे और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे। पहलगाम हमले से इनका लिंक जांच के बाद ही कन्फर्म होगा।”
पहलगाम हमले का बैकग्राउंड
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बेसरान वैली में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। उस हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था और PoK में आतंकी ठिकानों पर स्ट्राइक की थी।
अब सुलेमान शाह के मारे जाने से माना जा रहा है कि सुरक्षाबलों ने उस हमले के असली साजिशकर्ता को खत्म कर दिया है।
ऑपरेशन महादेव क्यों अहम है?
- यह विदेशी आतंकियों और उनके नेटवर्क पर सीधा प्रहार है।
- सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक यह ऑपरेशन केवल तीन आतंकियों तक सीमित नहीं, बल्कि कश्मीर घाटी में घुसे आतंकी ‘स्लीपर सेल्स’ को खत्म करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
- लगातार इंटेलिजेंस-आधारित ऑपरेशंस से साफ है कि घाटी में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों की पकड़ कमजोर हो रही है।
ऑपरेशन महादेव ने साफ कर दिया है कि भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से घाटी में आतंकियों की कोई भी साजिश ज्यादा देर तक नहीं टिक सकती। पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड के मारे जाने के बाद यह माना जा रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा की बड़ी योजनाओं को सुरक्षाबलों ने समय रहते नाकाम कर दिया है।