Delhi High Court ने Police को लगाई फटकार – Interfaith Couple को दी Protection, कहा “अगर शादी करनी है तो हम बचाएंगे”

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक इंटरफेथ (अंतरधार्मिक) कपल के मामले में पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा है कि अगर कोई बालिग कपल शादी करना चाहता है, तो कोर्ट उनके साथ खड़ा रहेगा और उन्हें हर तरह की सुरक्षा दी जाएगी। कोर्ट ने कपल को सरकारी Safe House में रखने और पुलिस प्रोटेक्शन देने का आदेश भी दिया।

क्या है मामला

यह कहानी एक 26 साल के मुस्लिम युवक और 25 साल की हिंदू युवती की है, जो साल 2018 से एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में हैं। दोनों ने हाल ही में शादी करने का फैसला किया, लेकिन परिवार की तरफ से कड़ा विरोध और धमकियां मिलने लगीं। इसके बाद युवक ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और पुलिस से सुरक्षा व सेफ हाउस देने की मांग की।

पुलिस पर गंभीर आरोप

युवक के वकील उत्कर्ष सिंह के मुताबिक, कपल को सुरक्षा देने की बजाय पुलिस ने उन्हें जबर्दस्ती अलग कर दिया

  • युवती को मेडिकल एग्ज़ामिनेशन के लिए ले जाया गया और 24 जुलाई को उसकी इच्छा के खिलाफ महिला शेल्टर होम में भेज दिया गया।
  • युवती का फोन और निजी सामान भी पुलिस ने ले लिया।
  • युवती ने कोर्ट को बताया कि जब उन्होंने सुरक्षा मांगी तो पुलिस ने कहा – “Safe Cell जैसा कुछ नहीं होता” और फिर उसे जबर्दस्ती मेडिकल टेस्ट के लिए ले जाया गया।

पुलिस का बचाव

6 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कहा कि –

  • किसी तरह की जबर्दस्ती, गैरकानूनी अलगाव या प्रक्रिया में गड़बड़ी नहीं हुई।
  • जो भी किया गया, वह युवती की सुरक्षा और भलाई के लिए किया गया था।

लेकिन कोर्ट ने पुलिस की यह दलील मानने से इनकार कर दिया और इसे अविश्वसनीय बताया।

कोर्ट में युवती का बयान

शुक्रवार को जस्टिस संजीव नरूला के सामने युवती ने वीडियो कॉल पर कहा –

  • “मुझे पुलिस ने जबर्दस्ती मेरे पार्टनर से अलग कर दिया और शेल्टर होम भेज दिया।”
  • “मेरा मेडिकल टेस्ट बिना मेरी मर्जी के कराया गया और मेरा सारा सामान, यहां तक कि फोन भी ले लिया गया।”

जज की सख़्त टिप्पणी

जस्टिस नरूला ने पुलिस को फटकारते हुए कहा –

  • “पुलिस को अपने अफसरों को संवेदनशील (Sensitise) करना चाहिए। वे सहमति से साथ रह रहे बालिग जोड़ों को जबरन अलग नहीं कर सकते।”
  • “क्या पुलिस ने युवती से खुद बात करके उसकी राय समझी? मैं इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूंगा।”

पिता की दखल पर रोक

युवती के पिता, जो इस रिश्ते के खिलाफ हैं, ने कोर्ट में दलील दी कि भारतीय समाज में शादी से पहले माता-पिता से सलाह लेना जरूरी है। इस पर कोर्ट ने साफ कहा –

  • “कौन सा कानून कहता है कि बालिग को अलग धर्म में शादी के लिए पिता से अनुमति लेनी होगी?”
  • “संविधान उसे अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने का अधिकार देता है और मैं उस अधिकार की रक्षा करूंगा।”

कोर्ट का फैसला और भरोसा

  • कोर्ट ने कपल को सरकारी सेफ हाउस में रखने और सुरक्षा देने का आदेश दिया।
  • कोर्ट ने रिकॉर्ड में लिखा कि युवती का शादी का इरादा “सुनियोजित और स्थिर” है क्योंकि वह पिछले 7 साल से रिश्ते में है।
  • जज ने युवती से कहा – “अगर तुम अपने फैसले पर अडिग हो, तो हम तुम्हारा समर्थन करेंगे। मैं तुम्हारे साथ हूं और पुलिस भी तुम्हारा साथ देगी।”