जम्मू-कश्मीर में इस वक्त भारी बारिश ने हाहाकार मचा रखा है। जगह-जगह भूस्खलन (landslide) और बादल फटने (cloudburst) की घटनाओं ने आम लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है। अगस्त 2025 का महीना राज्य के लिए बेहद दर्दनाक साबित हो रहा है। पिछले एक हफ्ते में अलग-अलग घटनाओं में 36 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और कई परिवार बेघर हो गए हैं।
रियासी में भूस्खलन से एक ही परिवार खत्म
रियासी जिले के बदड़ माहौर इलाके में शनिवार को भारी बारिश के कारण पहाड़ दरक गया और उसका मलबा एक कच्चे मकान पर आ गिरा। इस हादसे में एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में पति, पत्नी और उनके 5 मासूम बच्चे शामिल हैं।
मृतकों की पहचान इस तरह हुई है:
- नजीर अहमद (38 वर्ष)
- पत्नी वजीरा बेगम (35 वर्ष)
- बेटा बिलाल (13 वर्ष)
- बेटा मोहम्मद मुस्तफा (11 वर्ष)
- बेटा मोहम्मद आदिल (8 वर्ष)
- बेटा मोहम्मद मुबारक (6 वर्ष)
- बेटा मोहम्मद वसीम (5 वर्ष)
यह घटना पूरे इलाके के लिए गहरी त्रासदी है क्योंकि एक ही परिवार के सातों लोग मलबे में दबकर मौत के शिकार हो गए।
रामबन में बादल फटा, कई घर बहे
रामबन जिले के राजगढ़ क्षेत्र में ऊपरी इलाकों में बादल फटने से अचानक बाढ़ (flash flood) आ गई। इस हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता हैं। कई घर पानी में बह गए और कुछ को गंभीर नुकसान पहुँचा है।
प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया है। लापता लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार जुटी हैं। वहीं प्रभावित लोगों को अस्थायी राहत शिविरों में खाना, पानी और ठहरने की व्यवस्था दी जा रही है।
किश्तवाड़ में 60 मौतें
इससे पहले 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के चिशोटी गांव में भीषण क्लाउडबर्स्ट हुआ था। यह गांव माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर समुद्र तल से करीब 9,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। क्लाउडबर्स्ट की वजह से आए तेज बहाव ने श्रद्धालुओं के कैंप, घर और पुल बहा दिए। इस हादसे में करीब 60 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल और लापता हो गए।
अगस्त महीने में अब तक का हाल
- रियासी और डोडा जिलों में 9 मौतें दर्ज की गईं।
- जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी और डोडा जिलों में भारी नुकसान हुआ।
- अकेले अगस्त महीने में 36 से ज्यादा लोगों की जान गई।
- कई गांवों में भूस्खलन और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है।
प्रशासन की अपील
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नदियों और नालों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। लोगों से अपील की गई है कि वे सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं और सतर्क रहें। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें प्रभावित इलाकों में भेजी जाएंगी।
क्या है क्लाउडबर्स्ट?
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, जब किसी 20–30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में एक घंटे में 10 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश होती है, तो उसे क्लाउडबर्स्ट कहा जाता है। यह घटना खासतौर पर पहाड़ी इलाकों में होती है और इसके कारण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी तबाही मचती है।
जलवायु परिवर्तन का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि climate change की वजह से क्लाउडबर्स्ट और लैंडस्लाइड की घटनाएं पहले से ज्यादा बार और ज्यादा खतरनाक तरीके से हो रही हैं। इसका असर सीधे तौर पर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर में इस वक्त हालात बेहद गंभीर हैं। रियासी, रामबन और किश्तवाड़ जैसी घटनाएं इस बात की गवाही देती हैं कि पहाड़ी राज्यों में बारिश का मौसम अब और भी खतरनाक होता जा रहा है।