“justice नहीं मिला तो खुद को जला लिया” — Odisha की student की मौत ने हिलाया देश

ओडिशा के बालासोर ज़िले की एक 20 साल की छात्रा, जिसने कॉलेज कैंपस में खुद को आग लगा ली थी, अब जिंदगी की जंग हार गई। यह दर्दनाक घटना तब हुई जब उसने एक शिक्षक द्वारा कथित तौर पर लगातार की जा रही harassment की शिकायत की, लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। छात्रा की हालत गंभीर थी और उसे AIIMS भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार देर रात (14 जुलाई 2025) को उसकी मौत हो गई।

AIIMS भुवनेश्वर द्वारा जारी मेडिकल बुलेटिन में कहा गया, “सभी ज़रूरी इलाज और सपोर्टिव थैरेपी देने के बावजूद, उसे नहीं बचाया जा सका। उसे 14 जुलाई रात 11:46 बजे क्लिनिकली मृत घोषित किया गया।”

राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री ने जताया दुख

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जो AIIMS भुवनेश्वर में एक कार्यक्रम में शामिल होने आई थीं, ने भी छात्रा से ICU में मिलकर उसकी हालत की जानकारी ली थी। उनके साथ मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी थे।

छात्रा की मौत पर मुख्यमंत्री मोहन माझी ने गहरा दुख व्यक्त किया और कहा, “मैं इस खबर से बेहद दुखी हूं। सरकार और डॉक्टरों की पूरी कोशिशों के बावजूद हम उसकी जान नहीं बचा सके। मैं उसके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं।”

उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। “मैंने खुद अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस केस में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो,” CM ने कहा।

क्या हुआ था?

शनिवार (12 जुलाई) को छात्रा ने कॉलेज प्रिंसिपल के ऑफिस के बाहर खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली थी। वह B.Ed कोर्स कर रही थी और कई बार एक शिक्षक की शिकायत कर चुकी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब grievance redressal नहीं हुआ, तो वह protest के दौरान यह खौफनाक कदम उठा बैठी।

मौत के बाद सियासी हंगामा

जैसे ही छात्रा की मौत की खबर आई, AIIMS भुवनेश्वर में political uproar शुरू हो गया। डिप्टी CM प्रवाती परिडा और BJP के कई विधायक हॉस्पिटल पहुंचे। उधर, BJD और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान BJD और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शव को जल्दबाज़ी में बालासोर भेजने का विरोध किया और रास्ता जाम करने की कोशिश की।

हालात को देखते हुए पुलिस को रास्ते और भुवनेश्वर में सुरक्षा बढ़ानी पड़ी।

क्या कार्रवाई हुई?

मुख्य आरोपी शिक्षक समीर साहू (FM ऑटोनोमस कॉलेज में शिक्षा विभाग प्रमुख) को पहले ही 12 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। अब कॉलेज के प्रिंसिपल दिलीप घोष को भी 14 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें पहले सस्पेंड किया गया था।

अब उठे बड़े सवाल

इस दर्दनाक घटना ने कॉलेजों में Internal Complaint Committee (ICC) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘Sexual Harassment of Women at Workplace Act, 2013’ के तहत हर संस्थान में ऐसी कमेटी होनी चाहिए, लेकिन कई जगह ये नहीं बनी या ठीक से काम नहीं कर रही। सरकार ने सभी कॉलेजों को आदेश दिया है कि 24 घंटे के अंदर ICC का गठन करें।

छात्रा के परिवार का कहना है कि उसने हर स्तर पर शिकायत की, लेकिन उसे कभी ठोस आश्वासन नहीं मिला। आख़िरकार निराशा में आकर उसने ये कदम उठाया।

जांच और प्रतिक्रिया

पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि छात्रा को हर स्तर पर न्याय नहीं मिला। BJD और कांग्रेस ने judicial inquiry की मांग की है। National Human Rights Commission और National Commission for Women ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। वहीं, ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच की महिला एवं बाल अपराध शाखा अलग से जांच कर रही है।

यह घटना सिर्फ एक लड़की की मौत नहीं है, यह समाज और सिस्टम पर एक बड़ा सवाल है — क्या हमारी संस्थाएं वाकई महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की गारंटी दे पा रही हैं?