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	<title>ClimateChange &#8211; NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</title>
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	<description>NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</description>
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		<title>मौसम में अचानक बदलाव, 7 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी!</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/sudden-change-in-weather-warning-of-heavy-rain-in-7-states/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 05:38:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[ClimateChange]]></category>
		<category><![CDATA[FarmersAlert]]></category>
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					<description><![CDATA[फरवरी महीने के अंतिम दिनों में मौसम में अचानक और असामान्य बदलाव देखने को मिल रहा है। इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि देश के कई हिस्सों में तापमान में तेज़ी से वृद्धि हो रही है और कुछ क्षेत्रों में यह 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है। इसके साथ ही [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="68" data-end="549">फरवरी महीने के अंतिम दिनों में मौसम में अचानक और असामान्य बदलाव देखने को मिल रहा है। <strong data-start="153" data-end="194">इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD)</strong> ने चेतावनी जारी की है कि देश के कई हिस्सों में तापमान में तेज़ी से वृद्धि हो रही है और कुछ क्षेत्रों में यह <strong data-start="303" data-end="325">36 डिग्री सेल्सियस</strong> तक पहुँच सकता है। इसके साथ ही कई राज्यों में बादल, बारिश और तेज हवाएँ आम जीवन को प्रभावित कर सकती हैं। मौसम विभाग ने विशेष रूप से किसानों, यात्रियों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया है।</p>
<p data-start="551" data-end="960">उत्तर-पश्चिमी भारत के कई राज्यों में तापमान सामान्य से <strong data-start="606" data-end="632">3 से 5 डिग्री सेल्सियस</strong> अधिक रहने की संभावना है। इस गर्मी के चलते लोग होली से पहले ही अप्रैल जैसी गर्मी महसूस करेंगे। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव आने वाले गर्मी के मौसम का संकेत हो सकता है और इससे गर्मी की तीव्रता और अवधि पर असर पड़ सकता है। इस दौरान हवा की दिशा और गति में बदलाव होने से तापमान और उमस में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।</p>
<p data-start="962" data-end="1399">वहीं, उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी भारत के कुछ राज्यों में बारिश जारी रहने की संभावना है। IMD ने <strong data-start="1054" data-end="1082">7 राज्यों में भारी बारिश</strong> की चेतावनी जारी की है, जिससे किसानों, यात्रियों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बारिश मौसम में अस्थिरता का संकेत है और कुछ क्षेत्रों में तूफानी हवाओं और ओलावृष्टि के मामले भी सामने आ सकते हैं। इस वजह से ज़मीन की नमी, फसल की सुरक्षा और यातायात की स्थिति पर असर पड़ सकता है।</p>
<p data-start="1401" data-end="1810">इस समय दो कमजोर <strong data-start="1417" data-end="1436">पश्चिमी विक्षोभ</strong> सक्रिय हैं। इनका असर हिमालयी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी के रूप में देखा जाएगा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार ये प्रणालियाँ आने वाले दिनों में और बदलाव ला सकती हैं, जिससे न केवल तापमान में उतार-चढ़ाव होगा बल्कि बारिश और तूफान जैसी घटनाएँ भी हो सकती हैं। इस कारण सरकारी एजेंसियों ने भी स्थानीय प्रशासन से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और सतर्क रहने का निर्देश दिया है।</p>
<p data-start="1812" data-end="2124">देशभर में चल रही तेज हवाएँ (20-25 किमी/घंटा) कुछ क्षेत्रों में राहत देने के साथ-साथ मुश्किलें भी पैदा कर सकती हैं। यह स्थिति <strong data-start="1937" data-end="1985">खेती-बाड़ी, यात्रा और त्योहारों की तैयारियों</strong> पर असर डाल सकती है। विशेष रूप से होली के मौसम में सड़क पर सावधानी बरतना और बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है।</p>
<p data-start="2126" data-end="2576">IMD ने चेतावनी दी है कि मौसम में यह तेज बदलाव जलवायु पैटर्न में बड़े बदलाव का संकेत हैं। अगले कुछ दिन मौसम की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अपने दैनिक कार्यक्रम, कृषि कार्य और यात्रा योजनाओं में बदलाव करने और सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक सावधानियाँ बरतनी चाहिए। साथ ही, प्रशासन को आपातकालीन सेवाओं और राहत कार्यों को तैयार रखना चाहिए ताकि किसी भी आपदा या असामान्य मौसम की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Delhi-NCR में बढ़ता Pollution: हर साल विकराल हो रही है Air Crisis, जानिए क्या कहते हैं Experts और क्या हैं इसके solutions</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/rising-air-pollution-in-delhi-ncr-the-worsening-air-crisis-every-year-what-experts-say-and-what-can-be-done/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Oct 2025 07:48:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[AirQuality]]></category>
		<category><![CDATA[AQI]]></category>
		<category><![CDATA[CleanAir]]></category>
		<category><![CDATA[ClimateChange]]></category>
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					<description><![CDATA[सर्दी का मौसम शुरू होते ही दिल्ली-NCR की हवा फिर से जहर बनने लगी है। हर साल की तरह इस बार भी वायु प्रदूषण (Air Pollution) चर्चा में है। सड़कों पर धुंध छा जाती है, सांस लेना मुश्किल हो जाता है, और अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। लेकिन सवाल यह है कि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सर्दी का मौसम शुरू होते ही दिल्ली-NCR की हवा फिर से जहर बनने लगी है। हर साल की तरह इस बार भी वायु प्रदूषण (Air Pollution) चर्चा में है। सड़कों पर धुंध छा जाती है, सांस लेना मुश्किल हो जाता है, और अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये समस्या हर साल इतनी बड़ी क्यों हो जाती है और इसका हल क्या है?</p>
<h3><strong>हर साल बढ़ रही है समस्या</strong></h3>
<p>दिल्ली और एनसीआर (NCR) में वायु प्रदूषण अब एक <strong>स्थायी समस्या</strong> बन चुका है। सर्दी के आते ही प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। सरकारें और एजेंसियां हर साल कुछ हफ्तों के लिए <strong>शॉर्ट टर्म प्लान</strong> बनाती हैं, जैसे कि निर्माण कार्यों पर रोक या स्कूल बंद करना, लेकिन प्रदूषण का असली समाधान <strong>लॉन्ग टर्म प्लानिंग</strong> से ही संभव है।</p>
<p>केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पूर्व अपर निदेशक <strong>डॉ. एस.के. त्यागी</strong> ने इस विषय पर कहा कि अगर सरकारें और आम लोग मिलकर स्थायी कदम नहीं उठाएंगे, तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।</p>
<h3><strong>प्रदूषण मापने के मानक पुराने हो चुके हैं</strong></h3>
<p>डॉ. त्यागी के अनुसार, भारत में वायु प्रदूषण को मापने के जो मानक हैं, वे काफी पुराने हैं।</p>
<ul>
<li>वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के मानक साल <strong>2009</strong> में बनाए गए थे।</li>
<li>वायु प्रदूषण के मानक <strong>2015</strong> में तय किए गए थे।</li>
</ul>
<p>जबकि अब हवा में प्रदूषण के नए-नए तत्व मिल रहे हैं, इसलिए इन मानकों में <strong>तुरंत बदलाव</strong> करने की जरूरत है।</p>
<h3><strong>वीओसी (</strong><strong>VOC) </strong><strong>क्या है और क्यों है यह खतरनाक</strong><strong>?</strong></h3>
<p>डॉ. त्यागी ने बताया कि अब वायु प्रदूषण के माप में <strong>वीओसी (</strong><strong>Volatile Organic Compounds)</strong> को भी शामिल करना चाहिए।</p>
<p>ये ऐसे रासायनिक तत्व हैं जो कमरे के तापमान पर <strong>हवा में वाष्पित</strong> हो जाते हैं। ये हवा में मौजूद होकर <strong>ग्राउंड लेवल ओज़ोन</strong> और <strong>सेकेंडरी ऑर्गेनिक एयरोसोल (</strong><strong>SOA)</strong> बनाते हैं।</p>
<ul>
<li>पीएम 5 (PM 2.5) में इनका योगदान लगभग <strong>30 </strong><strong>प्रतिशत तक</strong> होता है।</li>
<li>कोविड-19 के समय जब बाकी प्रदूषण कम हो गया था, तब भी वीओसी का स्तर कम नहीं हुआ था।</li>
<li><strong>अमेरिका में </strong><strong>90 </strong><strong>से ज्यादा मॉनिटरिंग सेंटर</strong> हैं जो वीओसी को ट्रैक करते हैं, लेकिन <strong>भारत में अब तक शुरुआत भी नहीं हुई</strong> है।</li>
</ul>
<h3><strong>वीओसी के नुकसान</strong></h3>
<ul>
<li>सिरदर्द, आंखों में जलन और सांस की तकलीफ हो सकती है।</li>
<li>लंबे समय तक एक्सपोजर से <strong>किडनी और लिवर</strong> को नुकसान हो सकता है।</li>
<li><strong>अस्थमा के मरीज</strong>, बच्चे और बुजुर्ग इसके प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।</li>
<li>घरों के अंदर वीओसी की मात्रा अक्सर <strong>बाहर से ज्यादा</strong> होती है।</li>
</ul>
<h3><strong>प्रदूषण के मुख्य कारण</strong></h3>
<p>डॉ. त्यागी ने बताया कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण के कई स्रोत हैं:</p>
<ol>
<li><strong>वाहनों से निकलने वाला धुआं (</strong><strong>30-40%)</strong></li>
<li><strong>औद्योगिक उत्सर्जन (</strong><strong>20%)</strong></li>
<li><strong>कूड़ा और प्लास्टिक जलाना (</strong><strong>15-20%)</strong></li>
<li><strong>पराली का धुआं (</strong><strong>3-5%)</strong></li>
<li><strong>निर्माण कार्यों की धूल</strong></li>
<li><strong>ईंधन का जलना और रसोई से निकलने वाला धुआं</strong></li>
</ol>
<p>इन सभी को नियंत्रित किए बिना वायु गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं है।</p>
<h3><strong>समाधान: क्या किया जा सकता है</strong><strong>?</strong></h3>
<h4><strong>सरकारी और सामूहिक स्तर पर:</strong></h4>
<ol>
<li><strong>सार्वजनिक परिवहन</strong> (Public Transport) को बढ़ावा देना चाहिए।</li>
<li><strong>इलेक्ट्रिक वाहनों (</strong><strong>EVs)</strong> के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जाए।</li>
<li><strong>औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्त निगरानी</strong> रखी जाए।</li>
<li><strong>निर्माण कार्यों को सर्दियों में सीमित</strong> किया जाए।</li>
<li><strong>कूड़ा जलाने पर सख्त कार्रवाई</strong> की जाए।</li>
</ol>
<h4><strong>व्यक्तिगत स्तर पर:</strong></h4>
<ol>
<li>अपनी कार की जगह <strong>साइकिल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट</strong> का प्रयोग करें।</li>
<li><strong>सोलर एनर्जी</strong> और <strong>क्लीन फ्यूल</strong> का इस्तेमाल बढ़ाएं।</li>
<li>घरों को ऐसे डिजाइन करें कि <strong>प्राकृतिक रोशनी और हवा</strong> आ सके।</li>
<li><strong>फूड वेस्ट और कचरे को जलाने से बचें।</strong></li>
<li>आसपास हरियाली बढ़ाएं, पेड़ लगाएं।</li>
</ol>
<h3><strong>एक्सपर्ट की राय में जरूरी बदलाव</strong></h3>
<ul>
<li>वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में <strong>वीओसी को शामिल</strong> किया जाए।</li>
<li>पुराने मानकों को अपडेट किया जाए ताकि हवा की असली स्थिति पता चल सके।</li>
<li>लोगों को प्रदूषण कम करने के लिए <strong>जागरूक</strong> किया जाए।</li>
</ul>
<p>दिल्ली-NCR में प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण की नहीं, बल्कि <strong>जनस्वास्थ्य (</strong><strong>Public Health)</strong> की सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। हर साल सर्दियों में बढ़ते स्मॉग और जहरीली हवा से राहत पाने के लिए सरकार, उद्योग और आम जनता — सभी को <strong>मिलकर काम करने की जरूरत है।</strong></p>
<p>सिर्फ कुछ दिनों के शॉर्ट टर्म एक्शन से नहीं, बल्कि <strong>लॉन्ग टर्म पॉलिसी</strong><strong>, </strong><strong>नए वैज्ञानिक मानक और नागरिकों की जिम्मेदारी</strong> से ही हवा फिर से साफ हो सकती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Punjab में पराली जलाने की Incidents में 75% गिरावट, फिर भी Delhi Pollution के लिए Punjab के किसान क्यों निशाने पर?</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/stubble-burning-incidents-in-punjab-drop-by-75-yet-punjab-farmers-are-still-targeted-for-delhis-pollution/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 11:16:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[#Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[Agriculture]]></category>
		<category><![CDATA[AirPollution]]></category>
		<category><![CDATA[AQI]]></category>
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		<category><![CDATA[PunjabFarmers]]></category>
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					<description><![CDATA[हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली (Delhi) गंभीर वायु प्रदूषण (Air Pollution) की चपेट में है। पर जैसे ही प्रदूषण बढ़ता है, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप (Political Blame Game) भी शुरू हो जाते हैं। इस बार मामला थोड़ा अलग है। पंजाब (Punjab) से मिले नए आंकड़े बताते हैं कि पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाएँ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली (Delhi) गंभीर वायु प्रदूषण (Air Pollution) की चपेट में है। पर जैसे ही प्रदूषण बढ़ता है, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप (Political Blame Game) भी शुरू हो जाते हैं। इस बार मामला थोड़ा अलग है। पंजाब (Punjab) से मिले नए आंकड़े बताते हैं कि पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाएँ इस साल बेहद कम हुई हैं। फिर भी दिल्ली में इस प्रदूषण के लिए पंजाब के किसानों और वहां की सरकार को निशाना बनाया जा रहा है।</p>
<p><strong>पराली जलाने की घटनाओं में भारी कमी:</strong><br />
पंजाब सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 21 अक्टूबर के बीच पराली जलाने की घटनाएँ इस प्रकार रही:</p>
<ul>
<li>2022: 3114 घटनाएँ</li>
<li>2023: 1764 घटनाएँ</li>
<li>2024: 1510 घटनाएँ</li>
<li>2025: महज़ 415 घटनाएँ</li>
</ul>
<p>इस साल की संख्या पिछले सालों के मुकाबले <strong>75% </strong><strong>से ज्यादा कम</strong> है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि पंजाब सरकार और किसानों ने मिलकर इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल कर लिया है।</p>
<p><strong>फिर भी क्यों विवाद</strong><strong>?</strong><br />
दिल्ली के नेताओं, खासकर भाजपा (BJP) के मनजिंदर सिंह सिरसा जैसे नेताओं ने सीधे पंजाब के किसानों को दिल्ली के प्रदूषण का जिम्मेदार बताया। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं। यानी एक तरह से यह आरोप गलत लग रहा है।</p>
<p><strong>दिल्ली का प्रदूषण कहाँ से</strong><strong>?</strong><br />
यहाँ पर सवाल उठता है कि अगर पंजाब में पराली जलाना कम हुआ है, तो दिल्ली की हवा इतनी खराब क्यों है? विशेषज्ञ कहते हैं कि दिल्ली में प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं:</p>
<ul>
<li>वाहन (Vehicles)</li>
<li>औद्योगिक उत्सर्जन (Industrial Pollution)</li>
<li>निर्माण स्थलों से धूल (Dust from Construction)</li>
</ul>
<p><strong>आधिकारिक डेटा भी विरोधाभास दिखा रहा है:</strong></p>
<ul>
<li>पंजाब का AQI (Air Quality Index) इस समय दिल्ली की तुलना में लगभग 5 गुना बेहतर है।</li>
<li>अगर दिल्ली का स्मॉग सिर्फ पंजाब से आ रहा है, तो पंजाब की अपनी हवा इतनी साफ कैसे है?</li>
</ul>
<p><strong>राजनीतिक जटिलता:</strong><br />
यह मुद्दा सिर्फ दिल्ली और पंजाब सरकार का नहीं रह गया, बल्कि भाजपा (BJP) के भीतर भी विवाद खड़ा कर रहा है। पंजाब भाजपा नेताओं को यह तय करना होगा कि क्या वे दिल्ली में अपनी ही पार्टी के नेताओं द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का समर्थन करेंगे या पंजाब के किसानों के साथ खड़े होंगे।</p>
<p><strong>निष्कर्ष:</strong><br />
पंजाब के किसानों और सरकार ने इस साल पराली जलाने को काफी कम कर दिया है। ऐसे में जरूरी है कि दिल्ली और केंद्र सरकार (Central Government) अपने शहर के अंदरूनी प्रदूषण स्रोतों पर ध्यान दें। किसानों के प्रयासों को स्वीकार किया जाना चाहिए, न कि सिर्फ उन्हें ही दोषी ठहराया जाए।</p>
<p><strong>सारांश:</strong></p>
<ul>
<li>पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ 75% से ज्यादा कम हुई हैं।</li>
<li>दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य कारण केवल पंजाब नहीं है।</li>
<li>दिल्ली के वाहन, फैक्ट्रियां और निर्माण स्थल भी भारी भूमिका निभा रहे हैं।</li>
<li>राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय समाधान खोजने की जरूरत है।</li>
</ul>
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