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	<title>DonaldTrump &#8211; NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</title>
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	<description>NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</description>
	<lastBuildDate>Fri, 14 Nov 2025 07:21:48 +0000</lastBuildDate>
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		<title>America का सबसे लंबा &#8216;Shutdown&#8217; समाप्त: 1.4 Million Employees को 43 दिन बाद मिलेगा वेतन! लेकिन Situation अभी भी पूरी तरह Normal नहीं</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/americas-longest-shutdown-ends-1-4-million-employees-to-receive-pay-after-43-days-but-the-situation-still-isnt-fully-normal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Nov 2025 07:21:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[AmericaShutdown]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[DonaldTrump]]></category>
		<category><![CDATA[FederalEmployees]]></category>
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					<description><![CDATA[अमरीका में चला 43 दिन लंबा सरकारी Shutdown आखिरकार खत्म हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फंडिंग बिल पर साइन कर दिए हैं, जिसके बाद फेडरल सरकार ने दोबारा काम शुरू कर दिया है। यह अमरीकी इतिहास का सबसे लंबा Shutdown था। इस Shutdown की वजह से न सिर्फ सरकारी दफ्तर बंद रहे बल्कि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमरीका में चला 43 दिन लंबा सरकारी Shutdown आखिरकार खत्म हो गया है। राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रम्प</strong> ने फंडिंग बिल पर साइन कर दिए हैं, जिसके बाद फेडरल सरकार ने दोबारा काम शुरू कर दिया है। यह अमरीकी इतिहास का <strong>सबसे लंबा Shutdown</strong> था।</p>
<p>इस Shutdown की वजह से न सिर्फ सरकारी दफ्तर बंद रहे बल्कि लाखों कर्मचारियों की ज़िंदगी भी प्रभावित हुई। अब सरकार चल तो पड़ी है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी भी समय लगेगा।</p>
<h2><strong>1. 14 </strong><strong>लाख सरकारी कर्मचारियों की सैलरी का रास्ता खुला</strong></h2>
<p>Shutdown के दौरान करीब <strong>1.4 </strong><strong>मिलियन (14 </strong><strong>लाख) फेडरल कर्मचारी</strong> बिना सैलरी के रहे।</p>
<ul>
<li>आधे कर्मचारी <strong>बिना तनख़्वाह के काम करते रहे</strong></li>
<li>बाकी आधों को “furlough” पर घर बैठना पड़ा</li>
</ul>
<p>अब सरकार खुलते ही इन सबको <strong>बकाया सैलरी (back pay)</strong> मिलेगी। ज़्यादातर कर्मचारियों को आने वाले कुछ दिनों में पैसा मिलने लगेगा। कुछ को उनकी agency के हिसाब से थोड़ी देरी भी हो सकती है।</p>
<h2><strong>2. </strong><strong>बिल में क्या-क्या है</strong><strong>?</strong></h2>
<ul>
<li>सरकार को <strong>31 </strong><strong>जनवरी</strong> तक फंडिंग मिलेगी।</li>
<li>इस दौरान <strong>कोई लेऑफ नहीं</strong> होगी, यानी कर्मचारियों की छंटनी पर रोक।</li>
<li>Shutdown खत्म करने वाला यह बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में <strong>222–209</strong> मतों से पास हुआ था।</li>
<li>लेकिन इसमें <strong>Obamacare (ACA Subsidy)</strong> के प्रीमियम टैक्स क्रेडिट को 2025 के बाद बढ़ाने का कोई वादा नहीं किया गया। इस पर Democrats अभी भी लड़ाई जारी रखेंगे।</li>
</ul>
<h2><strong>3. Shutdown </strong><strong>खत्म</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन सब कुछ नॉर्मल नहीं होगा</strong></h2>
<p>सरकार तो खुल गई है, पर हर विभाग तुरंत पुराने ढर्रे पर वापस नहीं आ पाएगा।</p>
<h3><strong>Federal Offices</strong></h3>
<p>OMB (Office of Management and Budget) ने सभी एजेंसियों को आदेश दिया है कि कर्मचारी तुरंत काम पर लौटें और दफ्तर सुचारू तरीके से खोलें।</p>
<h2><strong>4. Food Assistance (SNAP) Program</strong></h2>
<p>अमरीका के करीब <strong>42 </strong><strong>मिलियन लोग SNAP (food stamp) program</strong> पर निर्भर हैं।<br />
Shutdown के दौरान कई राज्यों में लोगों को</p>
<ul>
<li>पूरा राशन</li>
<li>आधा राशन</li>
<li>या बिल्कुल भुगतान<br />
नहीं मिल पाया था।</li>
</ul>
<p>अब सरकार खुलने के बाद SNAP दोबारा शुरू होगा, लेकिन <strong>हर राज्य में payments </strong><strong>नॉर्मल होने में समय लगेगा</strong>। SNAP की फंडिंग इस बिल में <strong>सितंबर 2026</strong> तक के लिए पास हुई है।</p>
<h2><strong>5. Smithsonian Museums </strong><strong>और </strong><strong>National Zoo </strong><strong>खोलने की तैयारी</strong></h2>
<p>Shutdown के दौरान यह दुनिया के सबसे बड़े म्यूज़ियम नेटवर्क बंद थे। अब:</p>
<ul>
<li>American History Museum</li>
<li>Air and Space Museum</li>
<li>Udvar-Hazy Center<br />
<strong>शुक्रवार से खुलेंगे</strong><br />
बाकी सभी म्यूज़ियम और Zoo सोमवार तक <strong>rolling basis</strong> पर खुल जाएंगे।</li>
</ul>
<h2><strong>6. Air Travel </strong><strong>पर भारी असर </strong><strong>— Flights </strong><strong>अभी भी पूरी तरह नॉर्मल नहीं</strong></h2>
<p>Air traffic controllers बिना सैलरी काम कर रहे थे, जिससे एयरपोर्ट्स पर बड़ी दिक्कतें आईं।</p>
<ul>
<li>Flights 4–10% तक कम की गईं थीं</li>
<li>अभी 6% की कटौती लागू है<br />
FAA का कहना है कि वे हालात सुधारने में लगे हैं, लेकिन <strong>सबकुछ नॉर्मल होने में समय लगेगा</strong>।<br />
Thanksgiving जैसे busy travel time पर इसका असर दिख सकता है।<br />
Controller को 48 घंटों में उनकी backpay का 70% मिल जाएगा।</li>
</ul>
<h2><strong>7. National Parks </strong><strong>को भारी नुकसान</strong></h2>
<p>Shutdown के दौरान कई national parks खुले जरूर रहे, लेकिन:</p>
<ul>
<li>स्टाफ की भारी कमी थी</li>
<li>सफाई और मेंटेनेंस नहीं हो पा रहा था</li>
<li>Visitor fees नहीं मिल पाई<br />
इससे पार्कों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा और अब इन्हें पूरी तरह ठीक करने में <strong>कई महीने लग सकते हैं</strong>।</li>
</ul>
<h2><strong>8. IRS </strong><strong>पर भी बड़ा असर</strong><strong>, </strong><strong>अगले साल का </strong><strong>Tax Season </strong><strong>मुश्किल हो सकता है</strong></h2>
<p>IRS ने अपने <strong>74,000</strong> में से आधे कर्मचारियों को furlough किया था।<br />
इस दौरान:</p>
<ul>
<li>Tax refunds जारी नहीं हुए</li>
<li>Helplines बंद रहीं</li>
<li>Appointments कैंसल हो गईं</li>
</ul>
<p>इसका असर 2026 के tax season पर पड़ सकता है, क्योंकि बंद होने से पहले IRS पर पहले से ही लाखों cases pending थे।</p>
<h2><strong>9. </strong><strong>आर्थिक रिपोर्टें शायद कभी जारी न हों</strong></h2>
<p>Shutdown की वजह से:</p>
<ul>
<li>October और November की jobs report</li>
<li>inflation data</li>
</ul>
<p>जारी नहीं हो पाए।<br />
वाइट हाउस का कहना है कि <strong>ये रिपोर्टें शायद कभी जारी न हो सकें</strong> क्योंकि Shutdown ने data system को &#8220;permanently damage&#8221; कर दिया है।</p>
<h2><strong>10. Trump </strong><strong>का </strong><strong>Democrats </strong><strong>पर हमला</strong></h2>
<p>बिल पर साइन करते समय ट्रम्प ने आरोप लगाया:</p>
<ul>
<li>Democrats ने illegal immigrants के लिए पैसे निकालने के लिए सरकार बंद कराई</li>
<li>इसे उन्होंने “extortion” यानी जबरदस्ती पैसा वसूलने की कोशिश कहा</li>
<li>Shutdown से लाखों अमेरिकियों को नुकसान हुआ:
<ul>
<li>20,000 flights delayed/cancel</li>
<li>10 लाख कर्मचारी बिना सैलरी</li>
<li>Food stamps से जुड़े लाखों लोग प्रभावित</li>
</ul>
</li>
</ul>
<h2><strong>11. 232 </strong><strong>साल पुरानी </strong><strong>Penny Currency </strong><strong>हुई बंद</strong></h2>
<p>Shutdown से अलग एक और बड़ा फैसला —<br />
अमरीका ने अपनी <strong>सबसे छोटी करंसी—Penny (1 cent)</strong> को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया है।</p>
<p>क्यों बंद किया?</p>
<ul>
<li>एक penny बनाने में <strong>69 cent</strong> खर्च</li>
<li>कीमत सिर्फ <strong>1 cent</strong></li>
<li>यानी हर penny पर सरकार को नुकसान<br />
2023 में ही pennies बनाने से <strong>179 </strong><strong>मिलियन डॉलर</strong> (1,500 करोड़ रु) का नुकसान हुआ।<br />
लगभग <strong>250 </strong><strong>अरब pennies</strong> अभी circulation में हैं, जिन्हें धीरे-धीरे बाहर किया जाएगा।</li>
</ul>
<p>पैनी का सिस्टम भारत के “पैसे” जैसा ही था —<br />
100 pennies = 1 dollar (जैसे 100 पैसे = 1 रुपये)।</p>
<h2><strong>12. Skilled Foreign Workers </strong><strong>को लेकर नई नीति</strong></h2>
<p>Treasury Secretary Scott Bessent ने कहा कि:</p>
<ul>
<li>Defence, shipbuilding और semiconductors जैसे सेक्टरों में skilled workers की जरूरत है</li>
<li>प्लान यह है कि <strong>विदेशी skilled workers </strong><strong>को 3–7 </strong><strong>साल बुलाया जाए</strong></li>
<li>वे अमेरिकी workers को ट्रेन करें</li>
<li>फिर वापस अपने देश लौट जाएं<br />
इससे American workers धीरे-धीरे पूरे सिस्टम को संभाल पाएंगे।</li>
</ul>
<p>Shutdown खत्म जरूर हो गया है, लेकिन उसकी चोटें अभी भी कई जगह दिखेंगी—<br />
सरकारी दफ्तर, एयर ट्रैवल, parks, IRS, और food programs सबको नॉर्मल होने में समय लगेगा।<br />
फंडिंग अभी सिर्फ <strong>31 </strong><strong>जनवरी</strong> तक है, इसलिए खतरा है कि अगर पार्टियों में दोबारा सहमति नहीं बनी, तो सरकार फिर से बंद हो सकती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Trump के दबाव के बीच PM Modi ने ASEAN Summit का दौरा रद्द किया, India–US Trade Deal पर फोकस</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/under-trumps-pressure-pm-modi-cancels-asean-summit-visit-focus-now-on-india-us-trade-deal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Oct 2025 10:50:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[ASEANSummit]]></category>
		<category><![CDATA[Diplomacy]]></category>
		<category><![CDATA[DonaldTrump]]></category>
		<category><![CDATA[ForeignPolicy]]></category>
		<category><![CDATA[IndiaUSRelations]]></category>
		<category><![CDATA[InternationalNews]]></category>
		<category><![CDATA[ModiGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[PMModi]]></category>
		<category><![CDATA[TradeDeal]]></category>
		<category><![CDATA[USIndiaTrade]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ और भारत–अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक मलेशिया में होने वाले ASEAN समिट में हिस्सा न लेने का फैसला किया। अब पीएम मोदी समिट को वर्चुअली संबोधित करेंगे। क्यों रद्द हुआ पीएम का दौरा? प्रधानमंत्री मोदी 20 अक्टूबर को क्वालालंपुर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ और भारत–अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक <strong>मलेशिया में होने वाले </strong><strong>ASEAN </strong><strong>समिट में हिस्सा न लेने का फैसला किया।</strong> अब पीएम मोदी समिट को <strong>वर्चुअली संबोधित करेंगे।</strong></p>
<p><strong>क्यों रद्द हुआ पीएम का दौरा</strong><strong>?</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी 20 अक्टूबर को क्वालालंपुर में ASEAN समिट में शामिल होने वाले थे। उसी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दिवाली की शुभकामनाओं के लिए कॉल किया। इसके बाद विदेश मंत्रालय में कई दौर की बैठक हुई और तय हुआ कि प्रधानमंत्री <strong>समिट में नहीं जाएंगे।</strong></p>
<p>सरकारी सूत्रों के अनुसार, <strong>दिवाली का औपचारिक कारण बताया गया</strong>, लेकिन असल वजह <strong>भारत</strong><strong>–</strong><strong>अमेरिका ट्रेड डील और ट्रम्प के दबाव से बचना</strong> थी। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि डील <strong>फाइनल होने तक मीडिया में ट्रम्प के साथ मुलाकात नहीं होनी चाहिए।</strong></p>
<p><strong>ट्रेड डील की स्थिति</strong></p>
<ul>
<li>भारत और अमेरिका के बीच <strong>बिलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट</strong> अंतिम चरण में है।</li>
<li>समझौते की <strong>लीगल ड्रॉफ्टिंग</strong><strong>, </strong><strong>टैरिफ और नॉन-टैरिफ शर्तों</strong> पर काम चल रहा है।</li>
<li>भारत चाहता है कि डील पूरी तरह फाइनल होने के बाद ही <strong>पीएम मोदी और ट्रम्प की फिजिकल मीटिंग</strong> हो।</li>
</ul>
<p><strong>ट्रम्प का दबाव और टैरिफ</strong></p>
<ul>
<li>अप्रैल 2025 में अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया।</li>
<li>अगस्त में रूस से तेल आयात के कारण अतिरिक्त 25% टैरिफ बढ़ा, कुल 50% टैरिफ।</li>
<li>ट्रम्प चाहते हैं कि भारत रूस से तेल आयात घटाए और अमेरिका/साथी देशों से बढ़ाए।</li>
<li>भारत ने कहा कि वह किसी भी देश के दबाव में नहीं आएगा।</li>
</ul>
<p><strong>पहले भी टाल चुके हैं पीएम मोदी</strong></p>
<p>PM मोदी अब तक कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर <strong>ट्रम्प से आमने-सामने नहीं मिले:</strong></p>
<ol>
<li><strong>UNGA 2025:</strong> न्यूयॉर्क में UN सेशन में ट्रम्प और अन्य नेताओं ने भाषण दिया, लेकिन पीएम मोदी नहीं गए।</li>
<li><strong>गाजा पीस प्लान समिट:</strong> मिस्त्र में विदेश मंत्रालय के राज्य मंत्री ने भारत का प्रतिनिधित्व किया।</li>
</ol>
<p>इसका कारण था कि <strong>भारत</strong><strong>–</strong><strong>पाकिस्तान तनाव</strong> के बीच पीएम मोदी <strong>पाकिस्तान के </strong><strong>PM </strong><strong>शाहबाज शरीफ के साथ साझा मंच से बचना</strong> चाहते थे।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों की राय</strong></p>
<ul>
<li>पूर्व राजदूत <strong>कंवल सिब्बल</strong> और <strong>केसी सिंह</strong> का कहना है कि यह <strong>सोची-समझी रणनीति</strong> थी।</li>
<li>ब्रम्हा चेलानी के अनुसार, ट्रम्प की टैरिफ नीति और ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ के कारण दूरी बनाना सही फैसला था।</li>
<li>प्रो. <strong>राजन राज और शिंदर पुरवाल</strong> ने कहा कि भारत ने <strong>किसानों और घरेलू हितों की प्राथमिकता</strong> रखी।</li>
</ul>
<p><strong>ट्रम्प के दबाव के पांच बड़े मौके</strong></p>
<ol>
<li>अमेरिका ने अवैध भारतीयों को हथकड़ी लगाकर डिपोर्ट किया।</li>
<li>भारत–पाकिस्तान सीजफायर का एकतरफा दावा।</li>
<li>पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर से व्हाइट हाउस में बैठक।</li>
<li>ऐतिहासिक 50% टैरिफ।</li>
<li>वीज़ा और इमिग्रेशन नियमों में सख्ती।</li>
</ol>
<p><strong>निष्कर्ष</strong></p>
<ul>
<li>पीएम मोदी ने <strong>ट्रेड डील फाइनल होने तक ट्रम्प से फिजिकल मीटिंग न करना</strong> ही बेहतर समझा।</li>
<li>यह कदम <strong>भारत की रणनीति और घरेलू हितों की सुरक्षा</strong> को दर्शाता है।</li>
<li>भारत–अमेरिका ट्रेड डील अब अंतिम चरण में है और दोनों देशों के बीच <strong>ज्यादातर मुद्दों पर सहमति</strong> बन चुकी है।</li>
</ul>
<p>इस फैसले से साफ हो गया है कि भारत <strong>किसी भी दबाव में नहीं आएगा</strong>, और <strong>डील पूरी तरह फाइनल होने के बाद ही इंटरनेशनल मंच पर फिजिकल मीटिंग</strong> करेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>America में Government Shutdown 22वें दिन भी जारी: लाखों Employees बिना सैलरी के, Trump और Democrats में कड़ा टकराव</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/us-government-shutdown-enters-22nd-day-millions-of-employees-without-pay-as-trump-and-democrats-lock-horns/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Oct 2025 09:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका में 1 अक्टूबर से शुरू हुआ सरकारी शटडाउन आज 22वें दिन में पहुँच गया है। यह अमेरिका के इतिहास का दूसरा सबसे लंबा शटडाउन है। इससे पहले 2018 में 35 दिन और 1995 में 21 दिन तक शटडाउन रहा था। इस शटडाउन की वजह है कांग्रेस में फंडिंग बिल पास न होना। सीनेट में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका में 1 अक्टूबर से शुरू हुआ सरकारी शटडाउन आज 22वें दिन में पहुँच गया है। यह अमेरिका के इतिहास का <strong>दूसरा सबसे लंबा शटडाउन</strong> है। इससे पहले 2018 में 35 दिन और 1995 में 21 दिन तक शटडाउन रहा था।</p>
<p>इस शटडाउन की वजह है कांग्रेस में फंडिंग बिल पास न होना। <strong>सीनेट में </strong><strong>20 </strong><strong>अक्टूबर को </strong><strong>11</strong><strong>वीं बार वोटिंग हुई</strong>, लेकिन जरूरी 60 वोट्स में से केवल 55 वोट ही मिले।</p>
<p><strong>शटडाउन की वजह: हेल्थकेयर सब्सिडी पर विवाद</strong></p>
<p>अमेरिका के दोनों बड़े दल, <strong>डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन</strong>, <strong>ओबामा हेल्थकेयर सब्सिडी प्रोग्राम</strong> को लेकर फंसे हुए हैं।</p>
<ul>
<li><strong>डेमोक्रेट्स:</strong> हेल्थकेयर सब्सिडी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।</li>
<li><strong>रिपब्लिकन:</strong> सब्सिडी बढ़ी तो सरकार को ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे, जिससे अन्य सरकारी काम प्रभावित होंगे।</li>
</ul>
<p>इस वजह से शटडाउन लंबा खिंच गया और <strong>दोनों दलों में अहम की लड़ाई</strong> शुरू हो गई है।</p>
<p><strong>इस शटडाउन की खास बातें</strong></p>
<ol>
<li><strong>डेमोक्रेट्स का ट्रम्प पर वार:</strong> डेमोक्रेट्स हेल्थ बीमा सब्सिडी बचाना चाहते हैं और ट्रम्प के फंड रोकने की पावर को चुनौती दे रहे हैं।</li>
<li><strong>रिपब्लिकन्स का मौका:</strong> ट्रम्प इसे सरकारी नौकरियों और डेमोक्रेट प्रोग्राम्स में कटौती का मौका मानते हैं।</li>
<li><strong>विश्वास की कमी:</strong> पहले देर रात बातचीत से हल निकल जाता था, अब दोनों दल एक-दूसरे पर इल्जाम लगा रहे हैं।</li>
<li><strong>अर्थव्यवस्था पर असर:</strong> करीब 7.5 लाख कर्मचारी बिना तनख्वाह के हैं। इससे खर्च घटेगा और बिजनेस प्रभावित होंगे। हर हफ्ते 0.2% GDP का नुकसान हो रहा है।</li>
</ol>
<p><strong>शटडाउन का असर</strong></p>
<ul>
<li><strong>कर्मचारी:</strong> करीब 7.5 लाख सरकारी कर्मचारी बिना सैलरी के छुट्टी पर हैं।</li>
<li><strong>जरूरी कर्मचारी:</strong> सेना, पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर जैसे जरूरी कर्मचारी बिना सैलरी काम कर रहे हैं।</li>
<li><strong>हवाई यात्रा और फूड प्रोग्राम:</strong> उड़ानें देरी से चल रही हैं और कम आय वाले परिवारों को फूड सहायता मिलने में दिक्कत।</li>
<li><strong>टूरिज्म:</strong> स्मिथसोनियन म्यूजियम बंद।</li>
<li><strong>एटमी हथियार सुरक्षा:</strong> नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एजेंसी के 1,400 कर्मचारी छुट्टी पर हैं। इससे परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।</li>
</ul>
<p><strong>ट्रम्प को शटडाउन से फायदा या नुकसान</strong></p>
<p>शटडाउन के दौरान ट्रम्प प्रशासन <strong>OMB (Office of Management &amp; Budget)</strong> के जरिए जरूरी और गैर-जरूरी सेवाओं का फैसला कर सकता है।</p>
<ul>
<li>डेमोक्रेट समर्थित प्रोग्राम्स (जैसे शिक्षा, पर्यावरण, हेल्थ सब्सिडी) को गैर-जरूरी कर सकता है।</li>
<li>डिफेंस और इमिग्रेशन जैसे कामों को जरूरी घोषित किया जा सकता है।</li>
<li>छोटे शटडाउन से ट्रम्प को फायदा हो सकता है, लेकिन लंबा खिंचने पर आर्थिक नुकसान और उनकी छवि खराब हो सकती है।</li>
</ul>
<p><strong>अमेरिका का फिस्कल ईयर और शटडाउन</strong></p>
<ul>
<li>अमेरिका का <strong>फिस्कल ईयर (खर्च का साल)</strong> 1 अक्टूबर से शुरू होता है।</li>
<li>सरकार इस दौरान तय करती है कि पैसा कहां खर्च करना है।</li>
<li>अगर नया बजट पास नहीं होता, तो सरकारी कामकाज बंद हो जाता है। इसे शटडाउन कहते हैं।</li>
</ul>
<p><strong>पिछले शटडाउन के उदाहरण</strong></p>
<ul>
<li><strong>2013:</strong> कनाडा की सीमा की देखभाल सिर्फ 1 व्यक्ति कर रहा था।</li>
<li><strong>2013:</strong> 24 विदेशी कब्रिस्तान बंद।</li>
<li><strong>2018:</strong> एयरपोर्ट पर कर्मचारी काम नहीं गए → उड़ानें रद्द।</li>
<li><strong>2018:</strong> FBI के काम में पैसा खत्म → काम प्रभावित।</li>
</ul>
<p>अमेरिका में शटडाउन से न केवल लाखों कर्मचारियों की जिंदगी प्रभावित हो रही है, बल्कि अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर पड़ रहा है। ट्रम्प और डेमोक्रेट्स के बीच इस टकराव का हल अभी दूर दिख रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>PM Modi अगले महीने जा सकते हैं America, UNGA सत्र में Trump भी देंगे भाषण Trade Tensions के बीच अहम दौरा</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/pm-modi-may-visit-us-next-month-trump-to-address-unga-a-key-trip-amid-trade-tensions/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Aug 2025 05:20:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने अमेरिका के न्यूयॉर्क जा सकते हैं, जहां वे संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें उच्चस्तरीय सत्र को संबोधित करेंगे। समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक प्रोविजनल (अस्थायी) लिस्ट में भारत के “हेड ऑफ गवर्नमेंट” का भाषण 26 सितंबर की सुबह तय किया गया है। इस सत्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने अमेरिका के न्यूयॉर्क जा सकते हैं, जहां वे <strong>संयुक्त राष्ट्र महासभा (</strong><strong>UNGA)</strong> के 80वें उच्चस्तरीय सत्र को संबोधित करेंगे। समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक प्रोविजनल (अस्थायी) लिस्ट में भारत के “हेड ऑफ गवर्नमेंट” का भाषण <strong>26 सितंबर की सुबह</strong> तय किया गया है।</p>
<p>इस सत्र की खास बात यह है कि <strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप</strong> भी भाषण देंगे। यह उनका <strong>दूसरे कार्यकाल</strong> में UNGA का पहला संबोधन होगा। 80वें सत्र की हाई-लेवल जनरल डिबेट 23 से 29 सितंबर के बीच होगी, जिसमें परंपरा के अनुसार सबसे पहले ब्राजील और फिर अमेरिका बोलता है। भारत के अलावा 26 सितंबर को इस्राइल, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के नेता भी मंच से अपने विचार रखेंगे।</p>
<h3>व्यापार तनाव की पृष्ठभूमि</h3>
<p>यह संभावित दौरा ऐसे समय हो सकता है, जब भारत और अमेरिका के बीच <strong>ट्रेड रिलेशंस</strong> में खिंचाव देखने को मिल रहा है।</p>
<ul>
<li><strong>फरवरी </strong><strong>2025</strong> में पीएम मोदी ने व्हाइट हाउस जाकर राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की थी।</li>
<li>दोनों नेताओं ने <strong>Bilateral Trade Agreement (BTA)</strong> के पहले हिस्से को तैयार करने पर सहमति जताई थी, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसे <strong>फॉल </strong><strong>2025</strong> तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया।</li>
<li>लेकिन इसी बीच, ट्रंप ने भारत द्वारा <strong>रूसी तेल खरीदने</strong> पर <strong>25% अतिरिक्त टैरिफ</strong> लगा दिया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया।</li>
<li>भारत के विदेश मंत्रालय ने इस कदम को &#8220;अनुचित और अव्यावहारिक&#8221; बताते हुए कहा, “भारत अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।”</li>
</ul>
<h3>बातचीत जारी है</h3>
<p>ट्रंप का यह टैरिफ लगाने का फैसला ऐसे समय आया, जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 25 अगस्त को भारत आने वाला है, ताकि <strong>BTA की छठी दौर की बातचीत</strong> हो सके। दोनों देशों की कोशिश है कि इस साल <strong>अक्टूबर-नवंबर</strong> तक पहले चरण पर हस्ताक्षर हो जाएं।</p>
<h3>सत्र की अहमियत</h3>
<p>हर साल सितंबर में होने वाला यह सत्र संयुक्त राष्ट्र का <strong>सबसे व्यस्त डिप्लोमैटिक सीजन</strong> कहलाता है। इस बार इसका महत्व और बढ़ गया है क्योंकि पृष्ठभूमि में <strong>इज़राइल-हमास संघर्ष</strong> और <strong>यूक्रेन-रूस युद्ध</strong> जैसे गंभीर मुद्दे हैं। ऐसे में, दुनियाभर की नज़रें इस मंच पर होने वाले भाषणों और बयानों पर होंगी।</p>
<p>हालांकि, यह लिस्ट अभी प्रोविजनल है और अगले कुछ हफ्तों में तारीख या कार्यक्रम में बदलाव संभव है। लेकिन अगर यह शेड्यूल कायम रहता है, तो यह पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच एक ही मंच पर आने का मौका होगा—वो भी ऐसे समय में, जब दोनों देशों के रिश्ते <strong>सहयोग और तनाव</strong> के बीच संतुलन साध रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>America का India पर बड़ा एक्शन – Russian Oil Purchases पर 25% Additional Tariff, दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की आहट</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/big-move-by-the-u-s-against-india-25-additional-tariff-imposed-over-russian-oil-purchases-signs-of-strain-in-bilateral-ties/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Aug 2025 04:03:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के फैसले पर अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए 25% का अतिरिक्त आयात शुल्क (Tariff) लगा दिया है। यह टैरिफ भारतीय सामानों पर लागू होगा जो अमेरिका को एक्सपोर्ट होते हैं। व्हाइट हाउस ने बुधवार को इसकी पुष्टि की, और इसे एक एक्जीक्यूटिव ऑर्डर (राष्ट्रपति आदेश) के ज़रिए लागू [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के फैसले पर अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए <strong>25% </strong><strong>का अतिरिक्त आयात शुल्क (</strong><strong>Tariff)</strong> लगा दिया है। यह टैरिफ भारतीय सामानों पर लागू होगा जो अमेरिका को एक्सपोर्ट होते हैं। व्हाइट हाउस ने बुधवार को इसकी पुष्टि की, और इसे एक <strong>एक्जीक्यूटिव ऑर्डर (राष्ट्रपति आदेश)</strong> के ज़रिए लागू किया गया है।</p>
<p>यह टैरिफ <strong>पहले से लागू </strong><strong>25% </strong><strong>टैरिफ</strong> के अतिरिक्त होगा, यानी कुल मिलाकर <strong>50% </strong><strong>शुल्क</strong> तक का भार भारतीय उत्पादों पर पड़ सकता है। यह नया नियम <strong>21 </strong><strong>दिनों के भीतर</strong> लागू हो जाएगा।</p>
<p><strong>व्हाइट हाउस का बयान:</strong></p>
<p>व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक <strong>फैक्ट शीट</strong> में कहा गया कि –</p>
<p>“भारत का रूस से तेल खरीदना अमेरिका के उस प्रयास को कमजोर करता है, जो रूस को यूक्रेन युद्ध से रोकने के लिए किया जा रहा है।”</p>
<p>“भारत इस तेल को सिर्फ खुद इस्तेमाल नहीं कर रहा, बल्कि उसे <strong>ओपन मार्केट में बेचना</strong> शुरू कर चुका है और इससे <strong>अच्छा-खासा मुनाफा</strong> भी कमा रहा है। इससे रूस की अर्थव्यवस्था को ताकत मिलती है और वह युद्ध जारी रखने में सक्षम होता है।”</p>
<p><strong>किन वस्तुओं पर लागू होगा टैरिफ</strong><strong>?</strong></p>
<ul>
<li>यह टैरिफ अधिकांश <strong>सामान्य उपभोक्ता उत्पादों (</strong><strong>Consumer Goods)</strong> पर लागू हो सकता है।</li>
<li>हालांकि, <strong>स्टील</strong><strong>, </strong><strong>एलुमिनियम और फार्मा सेक्टर (</strong><strong>Pharmaceuticals)</strong> से जुड़े कुछ आइटम्स को <strong>छूट</strong> दी गई है।</li>
<li>सेक्टर-स्पेसिफिक ड्यूटी वाले आइटम्स इस फैसले से <strong>प्रभावित नहीं होंगे</strong>।</li>
</ul>
<p><strong>भारत की स्थिति क्या है</strong><strong>?</strong></p>
<p>भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई <strong>आधिकारिक प्रतिक्रिया</strong> नहीं आई है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक भारत को यह फैसला <strong>&#8220;</strong><strong>अनुचित दबाव&#8221;</strong> लग सकता है क्योंकि:</p>
<ul>
<li>भारत वैश्विक तेल बाज़ार से <strong>सबसे सस्ते विकल्प</strong> चुन रहा है।</li>
<li>रूस से कच्चा तेल खरीदकर भारत उसे <strong>रीफाइन कर सस्ते दामों पर बे</strong> रहा है, जिससे जनता को फायदा हो रहा है।</li>
</ul>
<p><strong>कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल:</strong></p>
<p>यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब भारत के प्रधानमंत्री <strong>नरेंद्र मोदी जल्द ही चीन की यात्रा</strong> पर जाने वाले हैं। यह यात्रा सात साल बाद हो रही है और इसे <strong>जियोपॉलिटिकल बैलेंसिंग</strong> के तौर पर देखा जा रहा है।</p>
<ul>
<li>अमेरिका को इस दौरे से चिंता हो सकती है क्योंकि वह <strong>भारत को एक रणनीतिक सहयोगी</strong> के रूप में देखता है।</li>
<li>अब इस टैरिफ के चलते <strong>भारत-अमेरिका के रिश्तों में खटास</strong> आ सकती है।</li>
</ul>
<p><strong>भारत को नुकसान या मौका</strong><strong>?</strong></p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि:</p>
<ul>
<li>यह टैरिफ भारत के <strong>MSME </strong><strong>सेक्टर और छोटे एक्सपोर्टरों</strong> को बड़ा झटका दे सकता है।</li>
<li>वहीं, भारत इस मौके का इस्तेमाल <strong>नए व्यापारिक साझेदार (</strong><strong>Alternative Markets)</strong> खोजने और अपनी <strong>ऊर्जा नीति को और स्वतंत्र</strong> बनाने के लिए कर सकता है।</li>
</ul>
<p><strong>पृष्ठभूमि:</strong></p>
<ul>
<li>अमेरिका और रूस के बीच <strong>यूक्रेन युद्ध को लेकर तनाव</strong> बना हुआ है।</li>
<li>अमेरिका चाहता है कि दुनिया के देश <strong>रूस से दूरी बनाए रखें</strong> – खासकर तेल और गैस जैसे क्षेत्रों में।</li>
<li>भारत ने कई बार स्पष्ट किया है कि वह अपनी <strong>ऊर्जा ज़रूरतों</strong> को ध्यान में रखकर फैसले करता है और वह <strong>किसी एक ध्रुव की नीति</strong> में विश्वास नहीं रखता।</li>
</ul>
<p>अमेरिका का यह फैसला भारत के लिए एक <strong>चुनौतीपूर्ण कूटनीतिक मोड़</strong> साबित हो सकता है। अब सबकी निगाहें भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रधानमंत्री मोदी की <strong>आगामी विदेश यात्रा</strong> पर टिकी होंगी।</p>
<p>क्या यह टकराव और गहराएगा या बातचीत से हल निकलेगा? आने वाले हफ्ते इस पर तस्वीर साफ करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Trump का 25% Tariff, India का सख्त जवाब – “Economy पर असर मामूली, दबाव में नहीं झुकेंगे”</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/trumps-25-tariff-indias-firm-response-minimal-impact-on-economy-wont-bow-to-pressure/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Aug 2025 08:55:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[BeefImportBan]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय एक्सपोर्ट्स पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर असर ‘बहुत मामूली’ होगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस कदम से GDP को 0.2% से ज्यादा नुकसान नहीं होगा। ब्लूमबर्ग को एक इंडिया-बेस्ड [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> ने हाल ही में भारतीय एक्सपोर्ट्स पर <strong>25% </strong><strong>टैरिफ</strong> लगाने का ऐलान किया है। लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर असर <strong>‘</strong><strong>बहुत मामूली’</strong> होगा।</p>
<p>सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस कदम से <strong>GDP </strong><strong>को 0.2% </strong><strong>से ज्यादा नुकसान नहीं होगा।</strong> ब्लूमबर्ग को एक इंडिया-बेस्ड इकोनॉमिस्ट ने भी बताया कि <strong>GDP </strong><strong>में सिर्फ 0.3% </strong><strong>तक की सुस्ती आ सकती है।</strong> फिलहाल देश का <strong>नाममात्र GDP (Nominal GDP)</strong> 2024-25 में <strong>₹330.68 </strong><strong>लाख करोड़</strong> के आसपास है, ऐसे में 0.2% का असर सरकार के मुताबिक <em>‘manageable’</em> है।</p>
<p><strong>इंडिया का साफ संदेश </strong><strong>– </strong><strong>दबाव में नहीं आएंगे</strong></p>
<p>सरकारी सूत्रों ने साफ कहा है कि भारत किसी भी हाल में <strong>अमेरिका के प्रेशर में नहीं आएगा।</strong></p>
<ul>
<li><strong>एग्रीकल्चर और डेयरी मार्केट</strong> को फोर्सफुली खोलने की मांग नहीं मानी जाएगी।</li>
<li><strong>बीफ़ (गाय का मांस)</strong> या <strong>‘non-veg milk’</strong> (ऐसा दूध जो उन गायों से निकाला गया हो जिन्हें animal-based प्रोडक्ट्स, जैसे बोन मील खिलाया गया हो) के इम्पोर्ट की इजाजत नहीं दी जाएगी।</li>
</ul>
<p>सूत्रों ने कहा कि ये चीजें भारत के <strong>धार्मिक सेंटिमेंट्स</strong> को ठेस पहुंचा सकती हैं। साथ ही, सरकार ने ये भी कहा कि वो <strong>नेशनल इंटरेस्ट को सुरक्षित रखने</strong> और <strong>किसानों, </strong><strong>उद्यमियों और MSMEs (</strong><strong>माइक्रो, </strong><strong>स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज)</strong> की भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।</p>
<p><strong>दूसरी बड़ी खबर </strong><strong>– </strong><strong>रूस पर ट्रंप की </strong><strong>‘</strong><strong>न्यूक्लियर</strong><strong>’ </strong><strong>चाल</strong></p>
<p>इसी बीच, शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा ऐलान कर दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने <strong>अमेरिका की दो न्यूक्लियर सबमरीन्स</strong> को <strong>रूस के नज़दीक भेजने का आदेश दिया है।</strong></p>
<p>ट्रंप का ये कदम रूस के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा <strong>सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी हेड</strong> <strong>दिमित्री मेदवेदेव</strong> के <strong>‘</strong><strong>खतरनाक बयानों’</strong> के बाद आया।</p>
<p>ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म <strong>Truth Social</strong> पर लिखा –</p>
<p><em>“</em><em>रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के बेहद उकसाने वाले बयानों के बाद… </em><em>मैंने आदेश दिया है कि दो न्यूक्लियर सबमरीन्स को सही जगह पर पोज़िशन किया जाए। ये सिर्फ एहतियातन कदम है, </em><em>ताकि अगर उनके ये मूर्खतापूर्ण और भड़काऊ बयान महज़ शब्दों से ज्यादा साबित हों तो हम तैयार रहें। शब्द बहुत मायने रखते हैं और अक्सर अनचाहे नतीजे ला सकते हैं। उम्मीद है, </em><em>इस बार ऐसा नहीं होगा।”</em></p>
<p>एक तरफ ट्रंप के टैरिफ से इंडिया की इकॉनमी को सिर्फ हल्का झटका लगने की बात कही जा रही है, वहीं सरकार ने साफ कर दिया है कि वो <strong>अमेरिका के दबाव में आकर अपने एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टर से समझौता नहीं करेगी।</strong> दूसरी तरफ ट्रंप का रूस को लेकर न्यूक्लियर सबमरीन भेजने का फैसला दुनियाभर में नई बहस छेड़ रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Operation Sindoor पर Parliament में होगी 25 घंटे की बड़ी Debate: Government पूरी तैयारी में, Trump के &#8216;Ceasefire&#8217; दावे पर उठे सवाल</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/25-hour-mega-debate-on-operation-sindoor-in-parliament-government-fully-prepared-questions-raised-over-trumps-ceasefire-claim/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Jul 2025 05:36:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[CeasefireClaim]]></category>
		<category><![CDATA[DefencePolicy]]></category>
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					<description><![CDATA[संसद के मानसून सत्र में 29 जुलाई को &#8216;ऑपरेशन सिंदूर&#8216; पर बड़ी बहस होने जा रही है, जो राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों लिहाज़ से बेहद अहम मानी जा रही है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार ने लोकसभा में 16 घंटे और राज्यसभा में 9 घंटे की चर्चा के लिए समय [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>संसद के मानसून सत्र में 29 जुलाई को <strong>&#8216;</strong><strong>ऑपरेशन सिंदूर</strong><strong>&#8216;</strong> पर बड़ी बहस होने जा रही है, जो राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों लिहाज़ से बेहद अहम मानी जा रही है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार ने <strong>लोकसभा में </strong><strong>16 </strong><strong>घंटे और राज्यसभा में </strong><strong>9 </strong><strong>घंटे</strong> की चर्चा के लिए समय तय किया है, जिसे बाद में <strong>राज्यसभा में भी </strong><strong>16 </strong><strong>घंटे तक</strong> बढ़ा दिया गया।</p>
<p>इस चर्चा में <strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</strong>, <strong>गृह मंत्री अमित शाह</strong> और <strong>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह</strong> के बोलने की उम्मीद है, जबकि विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है।</p>
<p><strong>बहस क्यों ज़रूरी हो गई</strong><strong>?</strong></p>
<p>इस बहस की मांग तब से ज़ोर पकड़ रही है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रंप</strong> ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच <strong>&#8220;</strong><strong>सीजफायर करवाई थी&#8221;</strong>, यानी युद्ध रोकवाया था। ट्रंप ये बात अब तक <strong>25 </strong><strong>बार दोहरा चुके हैं</strong>, जिससे भारत की विदेश नीति और संप्रभुता पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p><strong>विपक्ष</strong> का कहना है कि अगर ट्रंप की बात सही है, तो क्या भारत ने किसी विदेशी नेता की मदद से युद्ध टालने की अनुमति दी?<br />
<strong>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे</strong> ने इसे भारत के लिए &#8220;शर्मनाक&#8221; बताया और कहा कि प्रधानमंत्री को खुद संसद में जवाब देना चाहिए।<br />
<strong>राहुल गांधी</strong> ने कहा – &#8220;दाल में कुछ काला है&#8221; और इस पर खुलकर बहस होनी चाहिए।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री का जवाब क्या होगा</strong><strong>?</strong></p>
<p>सरकार ने संकेत दिए हैं कि प्रधानमंत्री <strong>मोदी खुद संसद में जवाब देंगे</strong> और यह साफ करेंगे कि <strong>कोई भी मध्यस्थता नहीं हुई थी</strong>।<br />
विदेश मंत्रालय पहले ही साफ कर चुका है कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो भी सीजफायर हुआ, वह <strong>आपसी समझौते</strong> के तहत हुआ था, न कि ट्रंप की वजह से।</p>
<p><strong>ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमला</strong></p>
<p>इस बहस में <strong>22 </strong><strong>अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम</strong> में हुए <strong>आतंकी हमले</strong> का मुद्दा भी शामिल किया गया है, जिसमें <strong>26 </strong><strong>हिंदू श्रद्धालुओं की जान गई थी</strong>। विपक्ष पूछ रहा है कि अब तक हमले के जिम्मेदार आतंकियों को पकड़ा क्यों नहीं गया?<br />
सरकार की तरफ से कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर इसी के जवाब में चलाया गया, लेकिन अब तक इसके पूरे ब्योरे सामने नहीं आए हैं।</p>
<p><strong>बिहार में </strong><strong>SIR </strong><strong>यानी </strong><strong>Special Intensive Revision</strong></p>
<p>चर्चा के दौरान बिहार में चल रही <strong>वोटर लिस्ट की स्पेशल रिवीजन (</strong><strong>SIR)</strong> का मुद्दा भी उठेगा। विपक्ष का आरोप है कि इसमें गड़बड़ियां हो रही हैं, जबकि सरकार कह रही है कि यह नियमित प्रक्रिया है।</p>
<p><strong>अब आगे क्या</strong><strong>?</strong></p>
<ul>
<li>बहस <strong>28 </strong><strong>जुलाई को लोकसभा</strong> में शुरू होगी और <strong>29 </strong><strong>जुलाई को राज्यसभा</strong> में जारी रहेगी।</li>
<li>यह बहस संसद के इतिहास की <strong>सबसे लंबी चर्चाओं में से एक</strong> हो सकती है, जिसमें सुरक्षा, विदेश नीति और राजनीति—तीनों पहलुओं पर बात होगी।</li>
<li>इसमें इस बात पर भी चर्चा होगी कि क्या <strong>सरकार जनता और संसद को ऑपरेशन सिंदूर के सभी तथ्यों से अवगत करा रही है या नहीं।</strong></li>
</ul>
<p><strong>लोगों के लिए क्यों ज़रूरी है जानना</strong><strong>?</strong></p>
<ul>
<li>क्योंकि ये बहस सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि <strong>देश की सुरक्षा</strong>, <strong>हमारे पड़ोसी देशों से रिश्ते</strong>, और <strong>भारत की विदेश नीति</strong> की साख से जुड़ी है।</li>
<li>अगर किसी विदेशी नेता ने हमारे देश की ओर से बिना जानकारी के कुछ तय किया, तो यह <strong>संप्रभुता पर सीधा हमला</strong> माना जाएगा।</li>
</ul>
<p><strong>ऑपरेशन सिंदूर</strong> और <strong>ट्रंप के दावे</strong> ने संसद का तापमान बढ़ा दिया है। अब देखना ये है कि इस बहस में सरकार कितनी पारदर्शिता दिखाती है और विपक्ष इसे किस हद तक मुद्दा बनाता है। संसद में होने वाली ये 25 घंटे की बहस न सिर्फ सांसदों के लिए, बल्कि हर आम नागरिक के लिए भी अहम होगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Donald Trump ने उठाया बड़ा कदम – अब विदेशों में बनी फिल्मों पर लगेगा 100% टैक्स</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/donald-trump-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%89%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%a6%e0%a4%ae-%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 May 2025 07:06:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[DonaldTrump]]></category>
		<category><![CDATA[TrumpNews]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://newknowledgenews.com/?p=5037</guid>

					<description><![CDATA[अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक नया और चौंकाने वाला ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अब अमेरिका में दिखने वाली उन सभी फिल्मों पर 100% टैक्स (टैरिफ) लगेगा जो अमेरिका के बाहर बनी होंगी। Trump का कहना है – &#8216;हमारी फिल्म इंडस्ट्री मर रहा है&#8217; Trump का कहना है कि विदेशी देश [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक नया और चौंकाने वाला ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अब अमेरिका में दिखने वाली उन सभी फिल्मों पर 100% टैक्स (टैरिफ) लगेगा जो अमेरिका के बाहर बनी होंगी।

 

<strong>Trump का कहना है – &#8216;हमारी फिल्म इंडस्ट्री मर रहा है&#8217;</strong>

 

Trump का कहना है कि विदेशी देश अपने यहां फिल्म बनाने के लिए प्रोड्यूसर्स को कई तरह की सुविधाएं और छूट देते हैं, जिससे अमेरिका का film industry कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि “राष्ट्र की सुरक्षा” और “प्रचार” (propaganda) का भी सवाल है। उनके अनुसार, विदेशों में बन रही कई फिल्में अमेरिका के खिलाफ एजेंडा फैलाती हैं।

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<strong>टैरिफ कैसे लागू होगा, ये अभी साफ नहीं</strong>

 

फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह टैक्स कैसे और कब से लागू होगा, या फिर ये केवल थिएटर में रिलीज होने वाली फिल्मों पर होगा या ऑनलाइन स्ट्रीमिंग (streaming platforms) पर भी लागू होगा। लेकिन Trump ने यह जरूर कहा कि उन्होंने कॉमरसिल डिपार्टमेंट और यूएस ट्रेड ऑफिस को इस फैसले को तुरंत लागू करने के निर्देश दिए हैं।

 

<strong>फिल्म इंडस्ट्री में मिली-जुली प्रतिक्रिया</strong>

 

इस फैसले पर हॉलीवुड और फिल्म जगत से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग इसे अमेरिका की फिल्मों को बचाने का सही तरीका मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इससे अमेरिका और बाकी दुनिया के बीच फिल्म ट्रेड (film trade) पर बुरा असर पड़ सकता है।

 

एक फिल्म एक्सपर्ट का कहना है, “अगर अमेरिका विदेशी फिल्मों पर इतना भारी टैक्स लगाएगा, तो दूसरे देश भी अमेरिकी फिल्मों को अपने यहां दिखाने से बच सकते हैं।”

 

<strong>पहले भी लगाए जा चुके हैं ऐसे टैरिफ</strong>

 

यह पहली बार नहीं है जब Trump ने ऐसा कोई बड़ा आर्थिक फैसला लिया हो। अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने चीन, यूरोप और अन्य देशों से आने वाले प्रोडक्ट्स पर भारी टैरिफ लगाए थे, ताकि घरेलू उद्योग को फायदा मिल सके।

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