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	<title>GlobalNews &#8211; NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</title>
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	<description>NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</description>
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		<title>Trump– Putin Summit: 3 घंटे Meeting, 12 Minute Press Conference और बिना किसी Deal के खत्म हुई मुलाकात</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Aug 2025 04:45:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अलास्का में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई हाई-प्रोफाइल मुलाकात दुनिया भर की सुर्खियों में है। यह मुलाकात करीब 3 घंटे चली और इसके बाद दोनों नेताओं ने केवल 12 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस की। खास बात यह रही कि इस दौरान किसी पत्रकार के सवाल का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अलास्का में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई हाई-प्रोफाइल मुलाकात दुनिया भर की सुर्खियों में है। यह मुलाकात करीब <strong>3 </strong><strong>घंटे</strong> चली और इसके बाद दोनों नेताओं ने केवल <strong>12 </strong><strong>मिनट</strong> की प्रेस कॉन्फ्रेंस की। खास बात यह रही कि इस दौरान किसी पत्रकार के सवाल का जवाब नहीं दिया गया और दोनों नेता मंच से सीधे निकल गए।</p>
<p><strong>10 </strong><strong>साल बाद अमेरिका पहुंचे पुतिन</strong></p>
<p>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लगभग <strong>10 </strong><strong>साल बाद अमेरिका पहुंचे</strong>। अलास्का के एल्मेंडॉर्फ एयर बेस पर उनका रेड कार्पेट स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें रिसीव किया। दोनों नेता ट्रम्प की कार में बैठकर सीधे मीटिंग स्थल रवाना हो गए।<br />
यहां का नज़ारा बेहद खास था—रेड कार्पेट के पास <strong>चार </strong><strong>F-22 </strong><strong>रैप्टर फाइटर जेट्स</strong> तैनात थे। सुरक्षा के लिए अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और रूसी टीम ने मिलकर पुख्ता इंतजाम किए।</p>
<p><strong>थ्री-ऑन-थ्री फॉर्मेट में बातचीत</strong></p>
<p>मीटिंग “<strong>थ्री-ऑन-थ्री फॉर्मेट</strong>” में हुई।<br />
रूस की तरफ से पुतिन के साथ विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव और वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव मौजूद थे।<br />
अमेरिका की ओर से ट्रम्प के साथ विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और शांति वार्ता दूत स्टीव विटकॉफ मौजूद रहे।</p>
<p><strong>प्रेस कॉन्फ्रेंस </strong><strong>– </strong><strong>सिर्फ </strong><strong>12 </strong><strong>मिनट</strong></p>
<p>बैठक के बाद दोनों नेताओं ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह तय समय से आधा घंटा पहले शुरू हुई और केवल <strong>12 </strong><strong>मिनट</strong> तक चली। शुरुआत पुतिन ने की, जबकि परंपरा के अनुसार पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बोलते हैं।<br />
पुतिन ने कहा कि –</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone  wp-image-7390" src="https://newknowledgenews.com/wp-content/uploads/2025/08/WhatsApp-Image-2025-08-16-at-9.43.04-AM-300x169.webp" alt="" width="744" height="419" srcset="https://newknowledgenews.com/wp-content/uploads/2025/08/WhatsApp-Image-2025-08-16-at-9.43.04-AM-300x169.webp 300w, https://newknowledgenews.com/wp-content/uploads/2025/08/WhatsApp-Image-2025-08-16-at-9.43.04-AM-1024x576.webp 1024w, https://newknowledgenews.com/wp-content/uploads/2025/08/WhatsApp-Image-2025-08-16-at-9.43.04-AM-768x432.webp 768w, https://newknowledgenews.com/wp-content/uploads/2025/08/WhatsApp-Image-2025-08-16-at-9.43.04-AM-150x84.webp 150w, https://newknowledgenews.com/wp-content/uploads/2025/08/WhatsApp-Image-2025-08-16-at-9.43.04-AM-120x68.webp 120w, https://newknowledgenews.com/wp-content/uploads/2025/08/WhatsApp-Image-2025-08-16-at-9.43.04-AM-130x73.webp 130w, https://newknowledgenews.com/wp-content/uploads/2025/08/WhatsApp-Image-2025-08-16-at-9.43.04-AM-356x200.webp 356w, https://newknowledgenews.com/wp-content/uploads/2025/08/WhatsApp-Image-2025-08-16-at-9.43.04-AM.webp 1200w" sizes="(max-width: 744px) 100vw, 744px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<ul>
<li>यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए उसकी असली वजह खत्म करनी होगी।</li>
<li>अगर 2022 में ट्रम्प राष्ट्रपति होते तो यह जंग शुरू ही नहीं होती।</li>
<li>यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।</li>
<li>यूरोपीय नेताओं को शांति वार्ता में बाधा नहीं डालनी चाहिए।</li>
<li>अमेरिका और रूस पड़ोसी हैं, टकराव छोड़कर बातचीत आगे बढ़ानी चाहिए।</li>
</ul>
<p>ट्रम्प ने कहा कि –</p>
<ul>
<li>मीटिंग पॉजिटिव रही लेकिन अभी कोई फाइनल डील नहीं हुई।</li>
<li>सभी की सहमति के बिना समझौता संभव नहीं।</li>
<li>वे जेलेंस्की और नाटो सहयोगियों से बात करेंगे।</li>
<li>यूक्रेन में शांति जरूरी है, लेकिन यह अब जेलेंस्की पर निर्भर है।</li>
<li>पुतिन के साथ उनका रिश्ता हमेशा अच्छा रहा है।</li>
</ul>
<p><strong>पुतिन का सुझाव </strong><strong>– </strong><strong>अगली मीटिंग मॉस्को में</strong></p>
<p>पुतिन ने अगली मुलाकात मॉस्को में करने का सुझाव दिया। ट्रम्प ने कहा कि यह फैसला विवादित हो सकता है लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह नकारा भी नहीं।</p>
<p><strong>पुतिन ने सैनिकों को दी श्रद्धांजलि</strong></p>
<p>अलास्का से रवाना होने से पहले पुतिन ने फोर्ट रिचर्डसन मेमोरियल कब्रिस्तान जाकर <strong>द्वितीय विश्व युद्ध</strong> में मारे गए सोवियत सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।</p>
<p><strong>मीटिंग के बाद दोनों का रवाना होना</strong></p>
<p>मीटिंग और प्रेस कॉन्फ्रेंस के एक घंटे बाद पुतिन का विमान मॉस्को के लिए उड़ गया। थोड़ी देर बाद ट्रम्प भी एयरफोर्स वन से वॉशिंगटन डीसी लौट गए।</p>
<p><strong>इंटरव्यू और रिएक्शन</strong></p>
<p>अलास्का से लौटते समय ट्रम्प ने <strong>Fox News</strong> को इंटरव्यू दिया और कहा –</p>
<ul>
<li>वे लोगों को मरते नहीं देखना चाहते।</li>
<li>यूक्रेन जंग खत्म कराना सोचा था आसान होगा, लेकिन यह सबसे मुश्किल है।</li>
<li>पुतिन और जेलेंस्की दोनों चाहते हैं कि वे शांति वार्ता का हिस्सा बनें।</li>
<li>मीटिंग को उन्होंने 10 में से 10 अंक दिए।</li>
</ul>
<p>रूस की तरफ से क्रेमलिन ने कहा कि बातचीत बहुत अच्छी रही और सीजफायर की दिशा में प्रगति हुई।</p>
<p><strong>मेलानिया का लेटर</strong></p>
<p>इस मुलाकात के दौरान एक और खास पल तब आया जब ट्रम्प ने पुतिन को <strong>अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रम्प</strong> का लिखा हुआ लेटर सौंपा। इसमें उन्होंने यूक्रेन और रूस में बच्चों की खराब हालत का जिक्र किया था।</p>
<p><strong>मीडिया और एक्सपर्ट्स की राय</strong></p>
<ul>
<li><strong>वॉशिंगटन पोस्ट:</strong> ट्रम्प–पुतिन अलास्का समिट, युद्धविराम तक नहीं पहुंचे।</li>
<li><strong>न्यूयॉर्क टाइम्स:</strong> कोई ठोस समझौता नहीं।</li>
<li><strong>CNN:</strong> मीटिंग बिना रिजल्ट के खत्म।</li>
<li>अमेरिका के पूर्व NSA जॉन बोल्टन और पूर्व राजदूत डगलस ल्यूट ने कहा कि इस मीटिंग में पुतिन ने ज्यादा फायदा उठाया और ट्रम्प को कुछ खास हासिल नहीं हुआ।</li>
</ul>
<p>लगभग <strong>3 </strong><strong>घंटे की बातचीत और </strong><strong>12 </strong><strong>मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस</strong> के बाद भी ट्रम्प–पुतिन समिट से कोई ठोस डील सामने नहीं आई। हांलाकि दोनों नेताओं ने इसे “पॉजिटिव शुरुआत” बताया और कहा कि आगे की मीटिंग्स में शांति समझौते की दिशा में कदम बढ़ेंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8220;अगर रतन टाटा जिंदा होते तो&#8230;&#8221; – Ahmedabad Plane Crash के 2 महीने बाद भी Compensation न मिलने पर पीड़ित परिवारों का दर्द</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/if-ratan-tata-were-alive-victims-families-still-await-compensation-two-months-after-ahmedabad-plane-crash/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Aug 2025 04:26:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
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					<description><![CDATA[12 जून 2025 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ एअर इंडिया फ्लाइट AI-171 का भीषण हादसा आज भी लोगों की आंखों में ताज़ा है। इस हादसे में 12 क्रू मेंबर समेत 241 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि ज़मीन पर भी कई लोग इसकी चपेट में आ गए। कुल मिलाकर मृतकों का आंकड़ा 260 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>12 जून 2025 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ एअर इंडिया फ्लाइट AI-171 का भीषण हादसा आज भी लोगों की आंखों में ताज़ा है। इस हादसे में 12 क्रू मेंबर समेत 241 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि ज़मीन पर भी कई लोग इसकी चपेट में आ गए। कुल मिलाकर मृतकों का आंकड़ा 260 तक पहुंच गया। हादसे के वक्त विमान ने अहमदाबाद से लंदन गेटविक के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन उड़ान के कुछ ही देर बाद दोनों इंजन बंद हो गए और प्लेन बी.जे. मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराकर आग के गोले में बदल गया। पूरे शहर में चीख-पुकार मच गई। उस दिन का मंजर कोई नहीं भूल सकता।</p>
<p><strong>एकमात्र ज़िंदा बचने वाला यात्री</strong></p>
<p>इस भीषण हादसे में चमत्कारिक रूप से सिर्फ एक यात्री – ब्रिटेन के नागरिक विश्वाश कुमार रमेश – जिंदा बचे, जो खुद मलबे से निकल आए। बाकी सबने अपनी जान गंवा दी।</p>
<p><strong>जांच में अब तक क्या सामने आया</strong><strong>?</strong></p>
<p>सरकार की ओर से जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया कि इंजन &#8220;कट-ऑफ&#8221; पोजीशन में चले गए थे, लेकिन इसके पीछे का कारण—तकनीकी खराबी, मानव त्रुटि या डिजाइन दोष—अभी साफ नहीं है। जांच में भारत के साथ यूके की AAIB और अमेरिका की NTSB जैसी एजेंसियां भी शामिल हैं। हादसे के सही कारणों का खुलासा अभी बाकी है।</p>
<p><strong>मुआवजे का वादा और हकीकत</strong></p>
<p>हादसे के बाद एयर इंडिया ने मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का एलान किया था। इसके साथ ही 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा भी घोषित किया गया, ताकि परिवारों को तुरंत आर्थिक मदद मिल सके।</p>
<ul>
<li>26 जुलाई तक 147 परिवारों को 25 लाख रुपये की राशि मिल चुकी है।</li>
<li>52 और परिवारों के दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया में हैं।</li>
<li>166 परिवारों को अब तक अंतरिम भुगतान हो चुका है, लेकिन वादा किए गए 1 करोड़ रुपये का मुआवजा अभी तक किसी को नहीं मिला।</li>
</ul>
<p>टाटा समूह ने इस हादसे के पीड़ितों के लिए <strong>500 </strong><strong>करोड़ रुपये का ‘AI-171 </strong><strong>मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट’</strong> भी बनाया है, जिसका उद्देश्य केवल मुआवजा देना ही नहीं बल्कि परिवारों की लंबे समय तक मदद करना, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और पुनर्वास कार्य करना है।</p>
<p><strong>&#8220;</strong><strong>अगर रतन टाटा होते तो</strong><strong>…&#8221;</strong></p>
<p>करीब 65 पीड़ित परिवारों का केस लड़ रहे अमेरिकी वकील माइक एंड्रयूज का कहना है कि अगर टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा आज ज़िंदा होते तो मुआवजे में इतनी देरी नहीं होती। उन्होंने कहा—&#8221;रतन टाटा पीड़ितों को कभी इंतजार नहीं कराते थे, वो तुरंत मदद करते थे।&#8221;<br />
एंड्रयूज ने एक पीड़ित मां का जिक्र करते हुए कहा—&#8221;एक बुजुर्ग मां अपने बेटे पर निर्भर थी, लेकिन इस हादसे में उसने अपना सहारा खो दिया। आज वो बिस्तर पर है और उसे कोई मुआवजा नहीं मिला। ऐसे में वो क्या करे?&#8221;</p>
<p><strong>कानूनी लड़ाई और आगे की राह</strong></p>
<p>माइक एंड्रयूज और उनकी टीम इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी विकल्प तलाश रही है, जिसमें विमान निर्माता बोइंग के खिलाफ अमेरिकी अदालत में केस करने की संभावना भी है। उन्होंने कहा कि हादसे से जुड़े सभी डेटा और सबूत सामने लाना ज़रूरी है, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।</p>
<p>हादसे को दो महीने से ज्यादा वक्त हो गया है, लेकिन कई परिवार अब भी न्याय और वादे के पूरे होने का इंतजार कर रहे हैं। मुआवजे की देरी और जांच की लंबी प्रक्रिया पीड़ितों के जख्मों को और गहरा कर रही है। सवाल साफ है—क्या ये इंतजार जल्द खत्म होगा, या फिर पीड़ितों को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी?</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>America में Prominent Anti-Khalistan Activist Sukhi Chahal की Mysterious Death, सवालों के घेरे में घटना</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/prominent-anti-khalistan-activist-sukhi-chahals-mysterious-death-in-the-us-raises-questions/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Aug 2025 03:46:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[AntiKhalistan]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका में बसे भारतीय मूल के बिज़नेसमैन और सोशल एक्टिविस्ट सुखी चहल की अचानक हुई मौत ने न सिर्फ़ भारतीय डायस्पोरा बल्कि एंटी-खालिस्तान कम्युनिटी को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। कैलिफ़ोर्निया में गुरुवार रात (31 जुलाई) उनकी मौत संदिग्ध हालातों में हुई, जिसके बाद से तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या हुआ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका में बसे भारतीय मूल के बिज़नेसमैन और सोशल एक्टिविस्ट <strong>सुखी चहल</strong> की अचानक हुई मौत ने न सिर्फ़ <strong>भारतीय डायस्पोरा</strong> बल्कि <strong>एंटी-खालिस्तान कम्युनिटी</strong> को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। कैलिफ़ोर्निया में गुरुवार रात (31 जुलाई) उनकी मौत संदिग्ध हालातों में हुई, जिसके बाद से तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>क्या हुआ उस रात</strong><strong>?</strong></p>
<p>सुखी चहल गुरुवार को <strong>San Jose, California</strong> में एक परिचित के घर डिनर पर गए थे। उनके क़रीबी दोस्त <strong>जस्पाल सिंह</strong> के मुताबिक़ – <em>“</em><em>डिनर के थोड़ी देर बाद ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वहीं उनकी मौत हो गई। इससे पहले वे पूरी तरह स्वस्थ थे।”</em></p>
<p><strong>क्यों उठ रहे हैं सवाल</strong><strong>?</strong></p>
<ul>
<li>चहल पिछले लंबे समय से <strong>खालिस्तानी संगठनों के खिलाफ़</strong> खुलकर बोलते रहे।</li>
<li>वे <strong>The Khalsa Today</strong> नामक प्लेटफ़ॉर्म के फ़ाउंडर और CEO थे, जो विदेशों में बैठे खालिस्तानी तत्वों की साज़िशों को एक्सपोज़ करता था।</li>
<li>उनके दोस्तों का कहना है कि चहल को कई बार <strong>प्रो-खालिस्तान ग्रुप्स से जान से मारने की धमकियां</strong> मिल चुकी थीं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।</li>
<li>उनकी मौत ऐसे वक़्त पर हुई है जब <strong>17 </strong><strong>अगस्त को वॉशिंगटन </strong><strong>DC </strong><strong>में खालिस्तान रेफ़रेंडम</strong> होने वाला है, जिसका वे लगातार विरोध कर रहे थे। इस वजह से कई लोग इसे सिर्फ़ “एक हादसा” मानने को तैयार नहीं हैं।</li>
</ul>
<p><strong>पुलिस जांच में जुटी</strong><strong>, </strong><strong>ऑटोप्सी रिपोर्ट का इंतज़ार</strong></p>
<p>कैलिफ़ोर्निया पुलिस ने इस केस की जांच शुरू कर दी है। उनके शव का <strong>ऑटोप्सी (पोस्टमार्टम)</strong> कराया जाएगा, ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके। शुरुआती जानकारी में <strong>हार्ट फेल्यर</strong> की बात कही जा रही है, लेकिन आधिकारिक रिपोर्ट आने तक कुछ भी तय नहीं है।</p>
<p><strong>कौन थे सुखी चहल</strong><strong>?</strong></p>
<ul>
<li><strong>लुधियाना के गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज</strong> से पढ़ाई के बाद उन्होंने <strong>स्टैनफोर्ड और </strong><strong>UC Berkeley</strong> से हाईर एजुकेशन ली।</li>
<li>कैलिफ़ोर्निया में बसने के बाद वे टेक्नोलॉजी और बिज़नेस में सफल हुए।</li>
<li>उन्होंने <strong>Punjab Foundation</strong> नाम की NGO बनाई, जो NRI बच्चों की एजुकेशन में मदद करती है।</li>
<li>चहल हमेशा इंडियन कम्युनिटी को सलाह देते थे – <em>“</em><em>अमेरिका के कानून का पालन करो</em><em>, </em><em>किसी भी तरह की क्रिमिनल एक्टिविटी में मत पड़ो</em><em>, </em><em>वरना वीज़ा कैंसल या डिपोर्ट होना तय है।”</em></li>
</ul>
<p><strong>दुनियाभर से शोक संदेश</strong></p>
<p>उनकी मौत पर दुनियाभर से शोक संदेश आ रहे हैं।</p>
<ul>
<li><strong>RSS </strong><strong>के दत्तात्रेय होसबले</strong>, <strong>राष्ट्र्रीय सिख संगत के गुरचरण सिंह गिल</strong>, और <strong>पूर्व सांसद तरलोचन सिंह</strong> ने उन्हें “<strong>धर्म योद्धा</strong>” और “<strong>सत्य की आवाज़</strong>” बताते हुए श्रद्धांजलि दी।</li>
<li>बहुत से इंडियन और सिख डायस्पोरा के लोग उन्हें एक <strong>बहादुर आवाज़</strong> मानते थे, जो खालिस्तान जैसी चरमपंथी सोच का खुलकर विरोध करते थे।</li>
</ul>
<p><strong>क्यों है ये मौत इतनी बड़ी खबर</strong><strong>?</strong></p>
<p>सुखी चहल की मौत सिर्फ़ एक शख्सियत के जाने की बात नहीं है। यह उस आवाज़ के खामोश हो जाने की कहानी है जो <strong>विदेशों में बैठे खालिस्तानी नेटवर्क</strong> के खिलाफ़ लगातार बोल रही थी। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या ये महज़ एक <strong>सांयोगिक मौत</strong> है या इसके पीछे कोई <strong>साज़िश</strong>?</p>
<p>फिलहाल, पुलिस की जांच और ऑटोप्सी रिपोर्ट का इंतजार है। लेकिन एक बात साफ है – सुखी चहल को भारतीय डायस्पोरा हमेशा <strong>कानून</strong><strong>, </strong><strong>शांति और सच</strong> की राह पर चलने वाले इंसान के रूप में याद करेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>British Report पर Bharat की सख्त प्रतिक्रिया – “Baseless और Politically Motivated Allegations”</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/indias-strong-response-to-british-report-baseless-and-politically-motivated-allegations/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Aug 2025 07:36:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
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		<category><![CDATA[BaselessAllegations]]></category>
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					<description><![CDATA[लंदन और नई दिल्ली के बीच इन दिनों एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन की संसद की Joint Committee on Human Rights ने 30 जुलाई को एक रिपोर्ट जारी की, जिसका नाम है “Transnational Repression in the UK”। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि करीब 12 देश, जिनमें भारत, चीन, रूस, ईरान, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लंदन और नई दिल्ली के बीच इन दिनों एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन की संसद की <strong>Joint Committee on Human Rights</strong> ने 30 जुलाई को एक रिपोर्ट जारी की, जिसका नाम है <em>“Transnational Repression in the UK”</em>। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि करीब <strong>12 </strong><strong>देश</strong>, जिनमें <strong>भारत, </strong><strong>चीन, </strong><strong>रूस, </strong><strong>ईरान, </strong><strong>पाकिस्तान और UAE</strong> भी शामिल हैं, ब्रिटेन में <strong>ट्रांसनेशनल रिप्रेशन (Transnational Repression)</strong> यानी विदेशी धरती पर अपने आलोचकों और विरोधियों को दबाने जैसी गतिविधियों में शामिल हैं।</p>
<p><strong>रिपोर्ट में क्या कहा गया</strong><strong>?</strong></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, इन देशों ने ब्रिटेन में रह रहे लोगों पर <strong>धमकियों, </strong><strong>निगरानी (surveillance)</strong> और यहां तक कि <strong>INTERPOL Red Notices</strong> जैसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी टूल का गलत इस्तेमाल किया, ताकि जो लोग इन सरकारों की आलोचना करते हैं, उनकी आवाज़ दबाई जा सके।<br />
रिपोर्ट कहती है कि यह काम सीधे तौर पर <strong>डायस्पोरा कम्युनिटी</strong> (विदेश में रह रहे लोगों) पर असर डालता है और उन्हें डराने का माहौल बनाता है।</p>
<p><strong>भारत का नाम क्यों आया</strong><strong>?</strong></p>
<p>इस रिपोर्ट में भारत का नाम <strong>UK </strong><strong>में मौजूद कुछ सिख संगठनों और “Sikhs for Justice (SFJ)”</strong> नाम की संस्था के दावों पर आधारित है। ये वही संगठन हैं जिन्हें भारत ने पहले ही <strong>UAPA </strong><strong>कानून के तहत बैन</strong> कर रखा है और जिन्हें भारत सरकार लंबे समय से <strong>खालिस्तानी एजेंडा</strong> फैलाने वाला मानती है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत ने <strong>Red Notices</strong> का राजनीतिक इस्तेमाल किया और कुछ एक्टिविस्ट्स को टारगेट किया।</p>
<p><strong>भारत की कड़ी प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>1 और 2 अगस्त को भारत के <strong>विदेश मंत्रालय (MEA)</strong> ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया।<br />
MEA के प्रवक्ता <strong>रंधीर जैसवाल</strong> ने कहा –</p>
<ul>
<li>“ये रिपोर्ट <strong>बेसलेस</strong> (बिनबुनियाद) है।”</li>
<li>“ये आरोप <strong>अनवेरिफाइड (unverified)</strong> और <strong>डूबियस सोर्सेज़ (dubious sources)</strong> पर आधारित हैं, जो ज्यादातर <strong>प्रतिबंधित संगठनों और संदिग्ध लोगों</strong> से जुड़े हैं।”</li>
</ul>
<p>भारत ने साफ कहा कि रिपोर्ट में जो भी आरोप लगाए गए हैं, वो <strong>राजनीतिक रूप से प्रेरित</strong> हैं और इन्हें ऐसे स्रोतों ने हवा दी है जिनका “<strong>एंटी-इंडिया होस्टिलिटी</strong>” यानी भारत विरोधी एजेंडा साफ दिखाई देता है।</p>
<p><strong>ट्रांसनेशनल रिप्रेशन क्या है</strong><strong>?</strong></p>
<p><strong>Transnational Repression</strong> एक ऐसा टर्म है, जब कोई देश अपनी सीमाओं से बाहर रह रहे एक्टिविस्ट्स, पत्रकारों या राजनीतिक विरोधियों को <strong>धमकियों, </strong><strong>निगरानी, </strong><strong>झूठे मुकदमों, </strong><strong>या इंटरपोल नोटिस</strong> जैसे तरीकों से दबाने की कोशिश करता है।</p>
<ul>
<li>रिपोर्ट के मुताबिक, <strong>चीन, </strong><strong>रूस और ईरान</strong> इस मामले में सबसे ज्यादा एक्टिव हैं, लेकिन भारत का नाम आने से अब यह मामला कूटनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है।</li>
</ul>
<p><strong>आगे क्या</strong><strong>?</strong></p>
<ul>
<li>ब्रिटेन चाहता है कि इन मामलों पर सख्ती से काम हो और डायस्पोरा कम्युनिटीज को सुरक्षा मिले।</li>
<li>वहीं भारत ने साफ कहा कि वो ऐसे <strong>बेसलेस आरोप</strong> नहीं मान सकता और रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।</li>
</ul>
<p>यह विवाद सिर्फ एक रिपोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह <strong>UK-India </strong><strong>रिश्तों</strong> को भी प्रभावित कर सकता है। जहां ब्रिटेन अपने यहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा की बात कर रहा है, वहीं भारत इसे अपने खिलाफ एक <strong>राजनीतिक एजेंडा</strong> मान रहा है।</p>
<p><strong>यानी आने वाले दिनों में यह मुद्दा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत का अहम हिस्सा बन सकता है।</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>G7 Summit में PM Modi और Canadian PM Mark Carney की अहम Meeting, रिश्तों में आई नई गर्मजोशी</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/at-the-g7-summit-pm-modi-and-canadian-pm-mark-carney-hold-key-meeting-relations-warm-up-again/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Jun 2025 05:31:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[AI]]></category>
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		<category><![CDATA[PMModi]]></category>
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					<description><![CDATA[कनाडा के कनानास्किस में चल रही G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह मीटिंग दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी के बाद रिश्तों को एक बार फिर से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कनाडा के कनानास्किस में चल रही G7 </strong><strong>समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह मीटिंग दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी के बाद रिश्तों को एक बार फिर से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।</strong></p>
<h3>पहली बार आमने-सामने मिले PM मोदी और कार्नी</h3>
<p>यह बैठक कई मायनों में खास थी। एक तो यह मोदी जी की करीब <strong>10 </strong><strong>साल बाद की पहली कनाडा यात्रा</strong> थी और दूसरी ओर कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद <strong>दोनों नेताओं की पहली मुलाकात</strong> भी थी। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कार्नी को उनकी चुनावी जीत के लिए बधाई दी और कहा कि भारत और कनाडा आने वाले समय में कई क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करेंगे।</p>
<h3>क्या-क्या बात हुई इस मीटिंग में?</h3>
<p><strong>डिप्लोमैटिक रिश्तों की बहाली:</strong></p>
<p>सबसे अहम फैसला ये हुआ कि <strong>भारत और कनाडा अब फिर से एक-दूसरे के यहां हाई कमिश्नर (उच्चायुक्त)</strong> भेजेंगे। पिछले साल के तनावपूर्ण हालात के बाद यह बड़ा सकारात्मक कदम है।</p>
<p><strong>व्यापार समझौते (</strong><strong>Trade Agreements):</strong></p>
<p>दोनों देशों ने तय किया कि वे <strong>EPTA (Early Progress Trade Agreement)</strong> पर बातचीत फिर से शुरू करेंगे, ताकि आगे चलकर <strong>CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement)</strong> जैसे बड़े व्यापारिक समझौतों की ओर बढ़ा जा सके।</p>
<p><strong>साझा हित वाले मुद्दों पर सहयोग:</strong></p>
<p>मोदी और कार्नी ने कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम करने की बात की। इनमें शामिल हैं:</p>
<ul>
<li><strong>Clean energy</strong></li>
<li><strong>Digital technology &amp; Artificial Intelligence (AI)</strong></li>
<li><strong>खाद्य सुरक्षा (Food security)</strong></li>
<li><strong>LNG (Liquified Natural Gas)</strong></li>
<li><strong>Supply chain </strong><strong>की मजबूती</strong></li>
<li><strong>Higher education </strong><strong>और student exchange</strong></li>
</ul>
<p><strong>इंडो-पैसिफिक पर चर्चा:</strong></p>
<p>दोनों नेताओं ने <strong>फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र</strong> को सपोर्ट करने की बात कही, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।</p>
<h3>Hardeep Singh Nijjar केस पर भी हुई बातचीत</h3>
<p>इस मामले में प्रधानमंत्री कार्नी ने माना कि उन्होंने <strong>ट्रांसनेशनल दमन और जांच से जुड़े मुद्दों</strong> पर पीएम मोदी के साथ बात की, लेकिन उन्होंने साफ किया कि यह मामला जांच के अधीन है, इसलिए वह ज्यादा कुछ नहीं कह सकते।</p>
<h3>आगे क्या होगा?</h3>
<p>PM मोदी और PM कार्नी ने यह भी तय किया कि दोनों देशों के अधिकारी अब <strong>नियमित संपर्क में रहेंगे</strong>, और जल्द ही एक बार फिर दोनों नेताओं की <strong>सीधी मुलाकात</strong> भी हो सकती है।</p>
<p>यह बैठक साफ दिखाती है कि भारत और कनाडा के बीच जो तनाव पहले था, अब उसे पीछे छोड़कर <strong>एक नया रिश्ता शुरू करने की कोशिश</strong> हो रही है। डिप्लोमैटिक बहाली, व्यापारिक समझौते और टेक्नोलॉजी से लेकर शिक्षा तक – दोनों देशों के लिए यह साझेदारी भविष्य में काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।</p>
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