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	<title>IndianHistory &#8211; NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</title>
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	<description>NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</description>
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		<title>राजनेताओं ने अपने नेताओं के नाम पर भव्य स्मारक बनाए, लेकिन शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को नजरअंदाज किया: CM भगवंत मान</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/politicians-built-grand-memorials-in-the-name-of-their-leaders-but-ignored-shaheed-e-azam-bhagat-singh-cm-bhagwant-mann/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 07:36:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
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					<description><![CDATA[शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह दिन देश के लिए दी गई उनकी महान कुर्बानी को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि शहीदों के आदर्शों पर चलकर ही एक मजबूत और खुशहाल पंजाब का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="132" data-end="433">शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह दिन देश के लिए दी गई उनकी महान कुर्बानी को याद करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि शहीदों के आदर्शों पर चलकर ही एक मजबूत और खुशहाल पंजाब का निर्माण किया जा सकता है।</p>
<p data-start="435" data-end="759">मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं, बल्कि उनके विचारों और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने शहीदों को भारत रत्न न दिए जाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि अगर देश की बागडोर आजादी के शुरुआती वर्षों में ऐसे नौजवानों के हाथ में होती, तो भारत की तस्वीर अलग होती।</p>
<p data-start="761" data-end="941">उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत हमें अन्याय और अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े होने की प्रेरणा देती है। समाज से बुराइयों को खत्म करना हर नागरिक का कर्तव्य है।</p>
<p data-start="943" data-end="1162">शिक्षा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबी और सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का सबसे बड़ा हथियार शिक्षा है। पंजाब सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p data-start="1164" data-end="1388">मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों ने सत्ता या लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश की आजादी के लिए अपनी जान न्यौछावर की। उनकी कुर्बानी के कारण ही आज हमें वोट देने का अधिकार मिला है, इसलिए हर नागरिक को अपने मताधिकार का सही उपयोग करना चाहिए।</p>
<p data-start="1390" data-end="1557">उन्होंने कहा कि पंजाब ने देश की आजादी और एकता के लिए सबसे अधिक कुर्बानियां दी हैं। देश की कुल आबादी का केवल 2% होने के बावजूद, आजादी की लड़ाई में 80% शहीद पंजाब से थे।</p>
<p data-start="1559" data-end="1848">मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शहीदों की विरासत को संभालने और उनके सपनों का पंजाब बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि हुसैनीवाला में 24.99 करोड़ रुपये की लागत से ‘विरासत प्रोजेक्ट’ शुरू किया जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियां शहीदों के इतिहास और बलिदान से प्रेरणा ले सकेंगी।</p>
<p data-start="1850" data-end="2059">उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के रास्ते पर चलें और देश की सेवा में अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वोट की ताकत सबसे बड़ी ताकत है और सही नेतृत्व चुनकर ही देश में असली बदलाव लाया जा सकता है।</p>
<p data-start="2061" data-end="2222">अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार शहीद भगत सिंह के सपनों को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी और राज्य को तरक्की और खुशहाली की राह पर आगे बढ़ाती रहेगी।</p>
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		<item>
		<title>Baliewal ने Delhi Chief Minister को लिखा पत्र: Chandni Chowk का नाम बदलकर ‘Sis Ganj’ करने की अपील</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/baliewal-writes-to-delhi-chief-minister-appeals-to-rename-chandni-chowk-as-sis-ganj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Nov 2025 11:05:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[ChandniChowk]]></category>
		<category><![CDATA[DelhiNews]]></category>
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					<description><![CDATA[भाजपा पंजाब के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता प्रितपाल सिंह बलियावाल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता को एक भावनात्मक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने ऐतिहासिक चांदनी चौक का नाम बदलकर “सीस गंज” रखने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि गुरु तेग बहादुर जी के साथ शहीद हुए तीन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भाजपा पंजाब के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता <strong>प्रितपाल सिंह बलियावाल</strong> ने दिल्ली की मुख्यमंत्री <strong>श्रीमती रेखा गुप्ता</strong> को एक भावनात्मक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने ऐतिहासिक <strong>चांदनी चौक</strong> का नाम बदलकर <strong>“</strong><strong>सीस गंज</strong><strong>”</strong> रखने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि गुरु तेग बहादुर जी के साथ शहीद हुए तीन महान सिख शहीदों — <strong>भाई मती दास जी</strong><strong>, </strong><strong>भाई सती दास जी और भाई दयाला जी</strong> — के नाम पर आसपास के मेट्रो स्टेशनों का नामकरण किया जाए।</p>
<p>पत्र में बलियावाल ने लिखा कि यह पहल <strong>गुरु तेग बहादुर जी की </strong><strong>350</strong><strong>वीं शहादत वर्षगांठ</strong> और <strong>गुरु नानक देव जी की </strong><strong>556</strong><strong>वीं जयंती</strong> के अवसर पर की जा रही है। उनका मानना है कि इस तरह के कदम से आने वाली पीढ़ियों को गुरु साहिब की महान शहादत और उनके बलिदान की कहानी पता चलेगी।</p>
<p>बलियावाल ने पत्र में यह भी लिखा कि मुगल शासक <strong>औरंगज़ेब</strong> के समय धार्मिक उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन की नीति चली। उस समय करीब <strong>500 </strong><strong>से अधिक कश्मीरी पंडित</strong> पंडित कृपा राम के नेतृत्व में आनंदपुर साहिब आए और गुरु साहिब से अपनी रक्षा और मदद की गुहार लगाई। इसके जवाब में <strong>गुरु तेग बहादुर जी ने </strong><strong>“</strong><strong>सरबत दा भला</strong><strong>” (</strong><strong>सबके कल्याण)</strong> की भावना से ज़ुल्म और अत्याचार के खिलाफ अपने जीवन का बलिदान देने का निर्णय लिया।</p>
<p>गुरु साहिब और उनके साथियों पर दिल्ली में भयानक अत्याचार किए गए।</p>
<ul>
<li><strong>भाई मती दास जी</strong> को आरी से काट दिया गया।</li>
<li><strong>भाई सती दास जी</strong> को रुई में लपेटकर जलाया गया।</li>
<li><strong>भाई दयाला जी</strong> को उबलते पानी में डालकर शहीद किया गया।<br />
अंत में <strong>गुरु तेग बहादुर जी का सिर उसी स्थान पर धड़ से अलग किया गया</strong>, जहाँ आज <strong>गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब</strong> स्थित है।</li>
</ul>
<p>बलियावाल ने पत्र में कहा, “अगर चांदनी चौक का नाम ‘सीस गंज’ किया जाता है, तो यह सिर्फ नाम बदलना नहीं होगा, बल्कि यह <strong>भारत की आत्मा</strong><strong>, </strong><strong>सहिष्णुता</strong><strong>, </strong><strong>त्याग और धार्मिक स्वतंत्रता</strong> का सम्मान होगा। यह फैसला न केवल राष्ट्रीय गौरव का विषय बनेगा, बल्कि दुनिया भर में बसे करोड़ों सिखों और भारतीयों के हृदय में <strong>आध्यात्मिक गर्व और श्रद्धा</strong> का भाव भी जगाएगा।”</p>
<p>उन्होंने आगे लिखा, “चांदनी चौक का नाम बदलकर ‘सीस गंज’ करना गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को अमर कर देगा और आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगा कि <strong>सत्य के लिए सिर कटाया जा सकता है</strong><strong>, </strong><strong>पर झुकाया नहीं जा सकता</strong>।”</p>
<p>यह कदम न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को <strong>सत्य और धर्म के लिए बलिदान देने की सीख</strong> भी देगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Class 8 की New NCERT Book में Mughals की &#8216;Brutality&#8217; का जिक्र, साथ में दी गई जिम्मेदारी से बचने का Disclaimer</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/new-class-8-ncert-book-mentions-brutality-of-mughals-along-with-disclaimer-to-avoid-blame/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Jul 2025 04:12:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Class8History]]></category>
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					<description><![CDATA[NCERT ने कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई किताब जारी की है, जिसमें दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य के इतिहास को एक नए नजरिए से पेश किया गया है। किताब में बाबर को “बर्बर और निर्दयी विजेता” बताया गया है, जिसने “पूरा शहर उजाड़ दिया और लोगों का कत्लेआम किया।” वहीं अकबर के शासन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>NCERT ने कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई किताब जारी की है, जिसमें दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य के इतिहास को एक नए नजरिए से पेश किया गया है। किताब में बाबर को “बर्बर और निर्दयी विजेता” बताया गया है, जिसने “पूरा शहर उजाड़ दिया और लोगों का कत्लेआम किया।” वहीं अकबर के शासन को “बर्बरता और सहनशीलता का मिश्रण” कहा गया है, और औरंगज़ेब पर मंदिरों और गुरुद्वारों को तोड़ने का आरोप लगाया गया है।</p>
<p>हालांकि किताब में साफ तौर पर यह भी लिखा गया है कि <em>“</em><em>बीते वक्त की घटनाओं के लिए आज किसी को दोष नहीं दिया जाना चाहिए।”</em> यह बात एक खास नोट — <strong>‘Note on Some Darker Periods in History’</strong> में समझाई गई है।</p>
<p><strong>क्यों बदला गया सिलेबस</strong><strong>?</strong></p>
<p>पहले दिल्ली सल्तनत और मुगलों का जिक्र कक्षा 7 की किताब में होता था, लेकिन अब NCERT ने इसे कक्षा 8 में शिफ्ट कर दिया है।<br />
नई किताब का नाम है – <strong>‘Exploring Society: India and Beyond’</strong>, जिसे इस हफ्ते छात्रों के लिए जारी किया गया है।</p>
<p><strong>क्या-क्या बताया गया है किताब में</strong><strong>?</strong></p>
<p>किताब के अध्याय <strong>‘Reshaping India’s Political Map’</strong> में 13वीं से 17वीं सदी तक के भारत की राजनीति को समझाया गया है। इसमें बताया गया है:</p>
<ul>
<li>दिल्ली सल्तनत की शुरुआत और अंत</li>
<li>सल्तनत के खिलाफ हुए विद्रोह</li>
<li>विजयनगर साम्राज्य का उभार</li>
<li>मुगलों की सत्ता और उनके खिलाफ विरोध</li>
<li>सिखों का उदय</li>
</ul>
<p>इस दौरान हुई बर्बर घटनाओं का भी जिक्र किया गया है। किताब में कहा गया है कि सल्तनत के समय “गांवों और शहरों को लूटा गया, मंदिर और शिक्षण संस्थान तोड़े गए।” मुगलों के समय भी ऐसी कई घटनाओं का जिक्र किया गया है।</p>
<p><strong>पहले और अब की किताबों में फर्क क्या है</strong><strong>?</strong></p>
<p>पुरानी NCERT की कक्षा 7 की किताबों में इन बातों का ज्यादा जिक्र नहीं किया गया था। लेकिन नई किताब में खासतौर पर बताया गया है कि इतिहास में कई <em>“religious intolerance”</em> यानी धार्मिक असहिष्णुता के मामले सामने आए थे।</p>
<p><strong>NCERT </strong><strong>का क्या कहना है</strong><strong>?</strong></p>
<p>NCERT ने कहा है कि इन तथ्यों को इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र इतिहास को पूरी सच्चाई के साथ समझ सकें। लेकिन साथ में यह भी बताया गया है कि आज के समय में किसी भी समुदाय या व्यक्ति को पुराने समय की घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।</p>
<p>नई किताब इतिहास के उन पहलुओं को सामने लाती है, जो पहले किताबों में कम नजर आते थे। लेकिन NCERT ने यह भी ध्यान रखा है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल नफरत फैलाने के लिए न किया जाए। यही कारण है कि किताब में साफ चेतावनी दी गई है कि इतिहास से सीख लेनी चाहिए, लेकिन किसी को दोष नहीं देना चाहिए।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Bharat को मिला एक और Proud Moment: &#8216;Maratha Military Landscapes&#8217; Declared UNESCO World Heritage Site</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/another-proud-moment-for-india-maratha-military-landscapes-declared-unesco-world-heritage-site/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Jul 2025 11:09:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स ऑफ इंडिया’ को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल किए जाने पर खुशी जताई है। ये भारत की 44वीं वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनी है, जो देश की सांस्कृतिक और वास्तुकला की समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने पेश करती है। इस फैसले की घोषणा यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स ऑफ इंडिया’ को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल किए जाने पर खुशी जताई है। ये भारत की <strong>44</strong><strong>वीं वर्ल्ड हेरिटेज साइट</strong> बनी है, जो देश की सांस्कृतिक और वास्तुकला की समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने पेश करती है।</p>
<p>इस फैसले की घोषणा यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी के <strong>47</strong><strong>वें सत्र</strong> में पेरिस (फ्रांस) में की गई। यह नॉमिनेशन भारत ने <strong>2024–25</strong> सत्र के लिए भेजा था।</p>
<p><strong>क्या हैं </strong><strong>&#8216;</strong><strong>मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स</strong><strong>&#8216;?</strong></p>
<p>यह नॉमिनेशन 12 ऐतिहासिक किलों के समूह को लेकर था, जो <strong>17</strong><strong>वीं से 19</strong><strong>वीं सदी</strong> के बीच मराठा साम्राज्य की सैन्य ताकत और इंजीनियरिंग प्रतिभा को दर्शाते हैं। ये किले ना सिर्फ मजबूत किलेबंदी का उदाहरण हैं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम जगहों पर स्थित हैं।</p>
<p>इन 12 किलों में शामिल हैं:</p>
<ul>
<li><strong>महाराष्ट्र के 11 </strong><strong>किले:</strong> साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खांदेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग</li>
<li><strong>तमिलनाडु का 1 </strong><strong>किला:</strong> जिन्जी किला (Gingee Fort)</li>
</ul>
<p>इनमें से कुछ किले पहाड़ी इलाकों में हैं (जैसे शिवनेरी, लोहगढ़, रायगढ़), कुछ जंगलों में (जैसे प्रतापगढ़), कुछ तटों पर (जैसे विजयदुर्ग), और कुछ समुंदर के बीच टापू पर बने हैं (जैसे खांदेरी, सुवर्णदुर्ग, सिंधुदुर्ग)।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने इस ऐतिहासिक फैसले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म <strong>X (</strong><strong>पूर्व में ट्विटर)</strong> पर लिखा:</p>
<p>&#8220;हर भारतीय इस गौरवशाली पल से गर्वित है। ये 12 भव्य किले मराठा साम्राज्य की शासन क्षमता, सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक गरिमा और सामाजिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। मैं सभी से अपील करता हूँ कि इन किलों की यात्रा करें और मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास को जानें।&#8221;</p>
<p>उन्होंने रायगढ़ किले की अपनी 2014 की यात्रा की तस्वीरें भी साझा कीं, जहां उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि दी थी।</p>
<p><strong>कौन रखता है इन किलों की देखरेख</strong><strong>?</strong></p>
<ul>
<li><strong>8 </strong><strong>किले</strong> भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में हैं – जैसे कि शिवनेरी, लोहगढ़, रायगढ़, सुवर्णदुर्ग आदि।</li>
<li>बाकी <strong>4 </strong><strong>किले</strong> – साल्हेर, राजगढ़, खांदेरी और प्रतापगढ़ – महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा देखे जाते हैं।</li>
</ul>
<p><strong>भारत की ग्लोबल हैरिटेज में बड़ी छलांग</strong></p>
<p>इससे पहले, <strong>असम के चराइदेव के मोइडाम्स</strong> को भी 2023 में वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया था। अब भारत <strong>विश्व स्तर पर छठे स्थान</strong> पर है और <strong>एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में दूसरे नंबर</strong> पर है, जहां सबसे ज्यादा वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं।</p>
<p>भारत फिलहाल यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी का सदस्य (2021–2025) है और आगे भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने में जुटा हुआ है।</p>
<p><strong>भविष्य की योजनाएं</strong></p>
<p>भारत की अभी <strong>62 </strong><strong>साइट्स टेंटेटिव लिस्ट</strong> में हैं, जिन्हें भविष्य में वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स के लिए नामांकित किया जा सकता है।</p>
<p>&#8216;मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स&#8217; को यूनेस्को से मिली ये मान्यता न सिर्फ इतिहास और विरासत के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह पर्यटन, संस्कृति और देश की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करती है।</p>
<p>अब वक्त है कि हम इन किलों को सिर्फ किताबों में न पढ़ें, बल्कि खुद वहां जाकर इस इतिहास को महसूस करें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Dr. Syama Prasad Mookerjee के बलिदान दिवस पर Lucknow में Tribute Ceremony आयोजित</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/tribute-ceremony-held-in-lucknow-on-dr-syama-prasad-mookerjees-martyrdom-day/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Jun 2025 03:00:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[BharatiyaJansangh]]></category>
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					<description><![CDATA[देश के महान विचारक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के मौके पर लखनऊ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम का आयोजन शहर के प्रमुख स्थल पर किया गया, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>देश के महान विचारक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के मौके पर लखनऊ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।</p>
<p>कार्यक्रम का आयोजन शहर के प्रमुख स्थल पर किया गया, जहां डॉ. मुखर्जी की मूर्ति स्थित है। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को दोहराया।</p>
<p>डॉ. मुखर्जी को याद करते हुए नेताओं ने कहा कि उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 का विरोध किया और ‘एक देश, एक संविधान’ की बात कही। उसी आंदोलन के दौरान 1953 में उनकी गिरफ्तारी हुई और रहस्यमयी हालात में उनका निधन हो गया।</p>
<p>कार्यक्रम में शामिल भाजपा नेताओं ने कहा,<br />
<strong>&#8220;</strong><strong>डॉ</strong><strong>. </strong><strong>मुखर्जी</strong> <strong>का</strong> <strong>बलिदान</strong> <strong>हमें</strong> <strong>यह</strong> <strong>सिखाता</strong> <strong>है</strong> <strong>कि</strong> <strong>देश</strong> <strong>की</strong> <strong>एकता</strong> <strong>सबसे</strong> <strong>ऊपर</strong> <strong>है।</strong> <strong>उन्होंने</strong> <strong>बिना</strong> <strong>किसी</strong> <strong>स्वार्थ</strong> <strong>के</strong> <strong>राष्ट्र</strong> <strong>के</strong> <strong>लिए</strong> <strong>काम</strong> <strong>किया।</strong> <strong>आज</strong> <strong>जो</strong> <strong>जम्मू</strong><strong>&#8211;</strong><strong>कश्मीर</strong> <strong>पूरी</strong> <strong>तरह</strong> <strong>भारत</strong> <strong>में</strong> <strong>शामिल</strong> <strong>है, </strong><strong>वह</strong> <strong>उनके</strong> <strong>संघर्ष</strong> <strong>का</strong> <strong>ही</strong> <strong>नतीजा</strong> <strong>है।</strong><strong>&#8220;</strong></p>
<p>श्रद्धांजलि देने वालों में उत्तर प्रदेश के भाजपा पदाधिकारी, मंत्रीगण, सांसद, विधायक, युवा मोर्चा और महिला मोर्चा के सदस्य भी मौजूद रहे। उन्होंने डॉ. मुखर्जी के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही और देश के लिए ईमानदारी से काम करने का संकल्प लिया।</p>
<p>डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारत में एक नई राजनीतिक सोच की शुरुआत करने वाला माना जाता है। उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रूप में जानी जाती है।</p>
<p>इस मौके पर लोगों ने सोशल मीडिया पर भी श्रद्धांजलि दी और #ShyamaPrasadMukherjee, #EkBharatShreshthaBharat जैसे हैशटैग के साथ पोस्ट शेयर किए।</p>
<p>डॉ. मुखर्जी का जीवन और उनका बलिदान आज भी देश को एकता और निष्ठा की प्रेरणा देता है। उनका सपना था कि भारत एकजुट हो, शक्तिशाली हो और हर नागरिक गर्व से कह सके – <em>&#8220;</em><em>मैं</em> <em>भारतवासी</em> <em>हूँ</em> <em>और</em> <em>यह</em> <em>मेरा</em> <em>एकमात्र</em> <em>राष्ट्र</em> <em>है।</em><em>&#8220;</em> आज उनके दिखाए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।</p>
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