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	<title>NepalNews &#8211; NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</title>
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	<description>NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</description>
	<lastBuildDate>Sun, 14 Sep 2025 06:33:19 +0000</lastBuildDate>
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		<title>Haryana से घर लौटने लगे Nepali परिवार: Hisar-Kurukshetra से Buses में रवाना, कहा – Nepal के हालात बिगड़े, परिवार की चिंता सता रही</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/nepali-families-returning-home-from-haryana-leaving-hisar-and-kurukshetra-in-buses-say-nepals-situation-is-worsening-worried-about-our-families/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Sep 2025 04:44:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[#Haryana]]></category>
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					<description><![CDATA[नेपाल में पिछले कुछ दिनों से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। Gen-Z आंदोलन के बाद वहां हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता फैल गई है। राजधानी काठमांडू और आसपास के इलाकों में माहौल तनावपूर्ण है। इसे देखते हुए हरियाणा में रह रहे नेपाली परिवारों की चिंता बढ़ गई है। हिसार और कुरुक्षेत्र जैसे इलाकों में काम करने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नेपाल में पिछले कुछ दिनों से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। <strong>Gen-Z </strong><strong>आंदोलन</strong> के बाद वहां हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता फैल गई है। राजधानी <strong>काठमांडू</strong> और आसपास के इलाकों में माहौल तनावपूर्ण है। इसे देखते हुए <strong>हरियाणा में रह रहे नेपाली परिवारों</strong> की चिंता बढ़ गई है। हिसार और कुरुक्षेत्र जैसे इलाकों में काम करने वाले कई नेपाली अब अपने परिवार की खैर-खबर लेने के लिए <strong>नेपाल लौटने लगे हैं</strong>।</p>
<p>शुक्रवार को हिसार से कई परिवार बसों में सवार होकर नेपाल के लिए रवाना हुए। हिसार में <strong>25 </strong><strong>से 30 </strong><strong>हजार तक नेपाली लोग</strong> रहते हैं। ये लोग ज्यादातर <strong>चौकीदार, </strong><strong>होटल और घरों में कुक, </strong><strong>घरेलू नौकर, </strong><strong>रेस्टोरेंट वर्कर, </strong><strong>फास्ट फूड वेंडर</strong> जैसे काम करते हैं।</p>
<p>नेपाल में हालात खराब होने के बाद अब ये लोग धीरे-धीरे वापस लौट रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अगर नेपाल में <strong>तख्तापलट (political change)</strong> सफल रहा तो देश में सुधार होगा और उन्हें <strong>यहीं रोजगार के मौके मिलेंगे।</strong> वहीं कुछ लोग फिलहाल केवल परिवार को सुरक्षित करने के लिए वापस जा रहे हैं और हालात सामान्य होने पर हरियाणा लौटने की बात कह रहे हैं।</p>
<h2><strong>हिसार से लौटते नेपाली परिवार</strong></h2>
<p>हिसार से नेपाल जाने के लिए <strong>हर हफ्ते बस</strong> चलती है।</p>
<ul>
<li>हिसार से <strong>नेपाल बॉर्डर तक का किराया 1800 </strong><strong>रुपये प्रति व्यक्ति</strong> है।</li>
<li>इसके बाद यात्रियों को खुद अपने गांव तक पहुंचने की व्यवस्था करनी पड़ती है।</li>
</ul>
<h3><strong>यात्रा के दौरान आने वाली मुश्किलें</strong></h3>
<p>नेपाल में इस समय कई इलाकों में <strong>गाड़ियां नहीं चल रहीं</strong>, जिससे लोगों को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है। हिसार से चलने वाली बसें यात्रियों को <strong>बुटवल</strong> तक छोड़ती हैं, उसके बाद उन्हें खुद आगे का सफर करना पड़ता है।</p>
<h3><strong>नेपाल जाने वालों की कहानी</strong></h3>
<ol>
<li><strong>रमेश थापा – “5 </strong><strong>दिन से हालात देखकर डर लग रहा है”</strong><br />
रमेश थापा तीन महीने पहले ही नेपाल से भारत आए थे।</li>
</ol>
<ul>
<li>पहले <strong>शिमला के सेब के बगीचों</strong> में काम किया।</li>
<li>तीन दिन पहले हिसार पहुंचे थे।</li>
<li>लेकिन पिछले पांच दिन से नेपाल के हालात की खबरें देखकर उन्होंने घर लौटने का फैसला किया।</li>
</ul>
<p>&#8220;मैं अपने बेटे के साथ वापस जा रहा हूं। घर वालों की चिंता हो रही है। यहां काम करने का कोई फायदा नहीं अगर परिवार सुरक्षित न हो।&#8221;</p>
<ol start="2">
<li><strong>लबवत राम – “</strong><strong>कमाने आए थे, </strong><strong>अब परिवार की चिंता में लौट रहे हैं”</strong><br />
लबवत राम हिसार के एक रेस्टोरेंट में काम करते थे।</li>
</ol>
<ul>
<li>वे यहीं कमाई करने और बाद में परिवार को बुलाने की सोच रहे थे।</li>
<li>लेकिन अब नेपाल में हिंसा और डर का माहौल देखकर सब कुछ छोड़कर वापस जा रहे हैं।</li>
</ul>
<p>&#8220;बस वाले ने हमें भरोसा दिया है कि वह हमें बॉर्डर तक पहुंचा देगा। उसके बाद जो होगा, देखा जाएगा।&#8221;</p>
<ol start="3">
<li><strong>रूप बहादुर – “</strong><strong>पुराने नेताओं को हटाना जरूरी था”</strong><br />
रूप बहादुर हिसार के एक मैरिज पैलेस में काम करते हैं।</li>
</ol>
<ul>
<li>वे छह महीने पहले नेपाल से आए थे।</li>
</ul>
<p>&#8220;हम उम्मीद कर रहे हैं कि देश में ये बदलाव अच्छे के लिए होगा। अगर हालात ठीक हो गए तो हम नेपाल में ही रहकर कमाएंगे और वहीं अपनी जिंदगी बसाएंगे।&#8221;</p>
<ol start="4">
<li><strong>राजन – “</strong><strong>बुटवल के बाद खुद करना होगा इंतजाम”</strong><br />
राजन एक साल से हिसार में होटल में काम कर रहे थे।</li>
</ol>
<p>&#8220;नेपाल में इस समय गाड़ियां नहीं चल रहीं। हिसार से जो बस जा रही है वह हमें सिर्फ बुटवल तक छोड़ेगी। वहां से हमें पैदल या जैसे भी हो, अपने गांव तक जाना होगा।&#8221;<br />
उनका गांव पहाड़ी इलाके में है, जो फिलहाल सुरक्षित है।</p>
<p><strong>कुरुक्षेत्र का मामला </strong><strong>– </strong><strong>निर्मल सिंह का परिवार</strong></p>
<p>हिसार के अलावा कुरुक्षेत्र के <strong>पेहवा</strong> में रहने वाले निर्मल सिंह का परिवार भी नेपाल में फंसा हुआ है।</p>
<p>निर्मल सिंह 2009 में भारत आए और <strong>पेहवा</strong> के मेन बाजार में <strong>चाइनीज फास्ट फूड स्टॉल</strong> लगाया।</p>
<ul>
<li>कुछ समय बाद उनका परिवार भी उनके साथ रहने लगा।</li>
<li>आज भी वह इसी स्टॉल से अपनी आजीविका चला रहे हैं।</li>
</ul>
<p>निर्मल का परिवार इस समय दो हिस्सों में बंटा हुआ है।</p>
<ul>
<li>पत्नी <strong>कमला</strong> और छोटा बेटा <strong>दिनेश</strong> दो हफ्ते पहले नेपाल गए थे और <strong>सुरक्षित घर पहुंच चुके हैं।</strong></li>
<li>लेकिन बड़ा बेटा <strong>राज सिंह</strong> और छोटी बेटी का परिवार अभी <strong>काठमांडू में फंसा हुआ है।</strong></li>
</ul>
<p>निर्मल के बेटे <strong>राज सिंह</strong> की दो साल पहले शादी हुई थी।</p>
<ul>
<li>बहू <strong>आशिका गर्भवती</strong> है और कभी भी डिलीवरी हो सकती है।</li>
<li>इसी कारण कमला नेपाल बहू के पास चली गईं।</li>
<li>राज सिंह काठमांडू में अपनी बहन ज्योति के ससुराल में रहकर <strong>जापानी भाषा सीख रहा था।</strong></li>
<li>हिंसा के बीच घर लौटते समय भगदड़ में गिर गया, जिससे <strong>उसके हाथ में चोट</strong> लग गई।</li>
</ul>
<p>निर्मल सिंह का कहना है कि वे भी परिवार के पास जाना चाहते हैं लेकिन <strong>बॉर्डर बंद होने</strong> की वजह से नहीं जा पा रहे।</p>
<p>&#8220;अभी मैं वीडियो कॉल पर परिवार से बात कर रहा हूं। बॉर्डर खुलते ही मैं नेपाल जाऊंगा।<br />
सबसे ज्यादा चिंता मुझे काठमांडू में फंसे अपने बेटे और बेटी के परिवार की है।&#8221;</p>
<p><strong>नेपाल में स्थिति और उम्मीद</strong></p>
<p>नेपाल में इस समय राजनीतिक हलचल तेज है।</p>
<ul>
<li><strong>Gen-Z </strong><strong>आंदोलन</strong> ने देशभर में माहौल गरमा दिया है।</li>
<li>कई जगह हिंसा और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।</li>
<li>लोगों का मानना है कि यह <strong>तख्तापलट नेपाल को एक नई दिशा</strong> दे सकता है।</li>
</ul>
<p>कुछ लोगों को उम्मीद है कि हालात सुधरेंगे और देश में रोजगार बढ़ेगा।<br />
वहीं, फिलहाल प्राथमिकता सिर्फ <strong>परिवार की सुरक्षा</strong> है।</p>
<ul>
<li>हरियाणा में रह रहे नेपाली परिवार अब <strong>घर लौटने लगे हैं।</strong></li>
<li>हिसार से बसों में भरकर लोग बुटवल तक जा रहे हैं और वहां से आगे का सफर खुद तय कर रहे हैं।</li>
<li>कुरुक्षेत्र के निर्मल सिंह जैसे लोग बॉर्डर खुलने का इंतजार कर रहे हैं।</li>
<li>नेपाल की सड़कों पर फिलहाल <strong>तनाव, </strong><strong>हिंसा और अनिश्चितता</strong> का माहौल है।</li>
<li>हर कोई अपने तरीके से इस संकट से निपटने की कोशिश कर रहा है।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Nepal में सियासी भूचाल: Sushila Karki बनीं पहली Female Prime Minister, GenZ Protests के बाद KP Oli का Resigns, March में होंगे Elections</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/political-upheaval-in-nepal-sushila-karki-becomes-first-female-prime-minister-after-gen-z-protests-kp-oli-resigns-elections-scheduled-for-march/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 07:16:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[FemalePrimeMinister]]></category>
		<category><![CDATA[GenZProtests]]></category>
		<category><![CDATA[InterimGovernment]]></category>
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					<description><![CDATA[नेपाल इन दिनों बड़े राजनीतिक बदलावों से गुजर रहा है। पिछले हफ्ते सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुए Gen Z प्रोटेस्ट्स ने पूरे देश की राजनीति को हिला कर रख दिया। इन प्रदर्शनों में हिंसा के चलते 51 लोगों की मौत हो गई और 1,300 से ज्यादा लोग घायल हुए। हालात बेकाबू होने पर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नेपाल इन दिनों बड़े राजनीतिक बदलावों से गुजर रहा है। पिछले हफ्ते सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुए <strong>Gen Z </strong><strong>प्रोटेस्ट्स</strong> ने पूरे देश की राजनीति को हिला कर रख दिया। इन प्रदर्शनों में हिंसा के चलते <strong>51 </strong><strong>लोगों की मौत</strong> हो गई और <strong>1,300 </strong><strong>से ज्यादा लोग घायल</strong> हुए। हालात बेकाबू होने पर आखिरकार <strong>प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली</strong> को <strong>9 </strong><strong>सितंबर</strong> को इस्तीफा देना पड़ा।</p>
<p>शुक्रवार (<strong>12 </strong><strong>सितंबर</strong>) को नेपाल की सियासत में ऐतिहासिक कदम उठाया गया जब <strong>पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की (</strong><strong>73)</strong> ने <strong>नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री</strong> के रूप में शपथ ली। वे एक <strong>इंटरिम गवर्नमेंट (अंतरिम सरकार)</strong> की कमान संभालेंगी, जिसका मुख्य काम <strong>6 </strong><strong>महीने के भीतर चुनाव कराना</strong> होगा।</p>
<p><strong>कैसे बनीं सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री</strong></p>
<p>सुशीला कार्की का नाम युवाओं और जनता की तरफ से सुझाया गया, क्योंकि उन्हें <strong>ईमानदार और गैर-राजनीतिक चेहरा</strong> माना जाता है।<br />
राष्ट्रपति <strong>राम चंद्र पौडेल</strong>, <strong>नेपाल आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल</strong> और <strong>Gen Z </strong><strong>आंदोलन के नेताओं</strong> के बीच कई दौर की बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया।</p>
<ul>
<li>राष्ट्रपति पौडेल ने संसद को भंग कर <strong>5 </strong><strong>मार्च </strong><strong>2026</strong> को <strong>नए चुनाव कराने</strong> का ऐलान किया।</li>
<li>शपथ ग्रहण कार्यक्रम <strong>राष्ट्रपति भवन</strong><strong>, </strong><strong>शीतल निवास</strong> में हुआ, जिसे लाइव टेलीविजन पर दिखाया गया।</li>
</ul>
<p><strong>सुशीला कार्की का सफर </strong><strong>– </strong><strong>गांव की बेटी से देश की प्रधानमंत्री तक</strong></p>
<ul>
<li><strong>जन्म और पढ़ाई:</strong>
<ul>
<li>1952 में नेपाल के पूर्वी हिस्से के एक किसान परिवार में जन्म।</li>
<li><strong>BA (1972)</strong> – महेंद्र मोरंग कैंपस, नेपाल</li>
<li><strong>MA (Political Science) (1975)</strong> – बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU), वाराणसी, भारत</li>
<li><strong>LLB (1978)</strong> – त्रिभुवन यूनिवर्सिटी, काठमांडू</li>
</ul>
</li>
<li><strong>करियर की शुरुआत:</strong>
<ul>
<li>1979 से बिराटनगर में वकालत शुरू की।</li>
<li>1985 में महेंद्र मल्टिपल कैंपस, धरान में असिस्टेंट टीचर रहीं।</li>
</ul>
</li>
<li><strong>न्यायपालिका में योगदान:</strong>
<ul>
<li>2009 में सुप्रीम कोर्ट में अस्थायी जज बनीं।</li>
<li>2010 में स्थायी जज बनीं।</li>
<li><strong>2016 </strong><strong>में पहली महिला चीफ जस्टिस</strong> बनीं।</li>
<li>भ्रष्टाचार के खिलाफ कई सख्त फैसले सुनाए।</li>
<li>2017 में उन पर <strong>इम्पीचमेंट मोशन (महाभियोग)</strong> लाया गया, लेकिन जनता के जबरदस्त समर्थन और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह हट गया।</li>
</ul>
</li>
<li><strong>महत्वपूर्ण केस:</strong>
<ul>
<li>इंफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन मिनिस्टर <strong>जय प्रकाश प्रसाद गुप्ता</strong> को भ्रष्टाचार केस में दोषी करार दिया।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<p><strong>भारत से जुड़ाव: </strong><strong>BHU </strong><strong>में पढ़ाई और हाइजैकिंग कनेक्शन</strong></p>
<p>सुशीला कार्की का भारत से गहरा रिश्ता है।</p>
<ul>
<li>BHU में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात <strong>दुर्गा प्रसाद सुवेदी</strong> से हुई, जो बाद में उनके पति बने।</li>
<li>सुवेदी 1973 में <strong>नेपाल एयरलाइंस के हाइजैकिंग</strong> केस में शामिल थे।
<ul>
<li>इस विमान में करीब <strong>40 </strong><strong>लाख नेपाली रुपए</strong> (उस समय लगभग $400,000) थे, जो <strong>नेपाल स्टेट बैंक</strong> के थे।</li>
<li>यह प्लेन बिहार के <strong>फोर्ब्सगंज</strong> में उतारा गया।</li>
<li>यह पैसा नेपाल में <strong>राजशाही के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष</strong> के लिए हथियार खरीदने में इस्तेमाल हुआ।</li>
<li>सुवेदी और अन्य साथियों को भारत में गिरफ्तार कर 2 साल जेल में रखा गया, बाद में वे नेपाल लौट आए।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<p><strong>Gen Z </strong><strong>आंदोलन </strong><strong>– </strong><strong>क्यों भड़की हिंसा</strong></p>
<ul>
<li>ओली सरकार ने <strong>सोशल मीडिया पर बैन</strong> लगा दिया था।</li>
<li>यह फैसला <strong>आवाज दबाने की कोशिश</strong> माना गया और इसका सीधा असर युवाओं पर पड़ा।</li>
<li>इसके बाद <strong>Gen Z</strong> यानी युवा पीढ़ी ने पूरे देश में आंदोलन शुरू कर दिया।</li>
<li>आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच <strong>भयंकर हिंसा</strong> हुई।
<ul>
<li>51 लोगों की मौत हुई।</li>
<li>1,300 से ज्यादा घायल हुए।</li>
<li>मारे गए लोगों में <strong>21 </strong><strong>प्रदर्शनकारी</strong><strong>, 9 </strong><strong>कैदी</strong><strong>, 3 </strong><strong>पुलिसकर्मी और </strong><strong>18 </strong><strong>अन्य लोग</strong> शामिल थे।</li>
</ul>
</li>
</ul>
<p><strong>काठमांडू मेयर बालन शाह</strong> ने प्रदर्शनकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि &#8220;Gen Z ने देश में बदलाव लाने के लिए जो कुर्बानी दी है, वह हमेशा याद रखी जाएगी।&#8221;</p>
<p><strong>हालात अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं</strong></p>
<ul>
<li>शनिवार (<strong>13 </strong><strong>सितंबर</strong>) को सरकार ने <strong>कर्फ्यू और सभी प्रतिबंध हटाने</strong> का फैसला किया।</li>
<li>दुकानें, बाजार और मॉल फिर से खुल गए हैं।</li>
<li>सड़कों पर ट्रैफिक धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।</li>
<li>अब पुलिस <strong>राइफल्स की जगह सिर्फ डंडे</strong> लेकर तैनात है, ताकि हिंसा न बढ़े।</li>
</ul>
<p><strong>भारत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया</strong></p>
<ul>
<li><strong>PM </strong><strong>नरेंद्र मोदी</strong> ने सुशीला कार्की को बधाई देते हुए कहा कि <em>&#8220;</em><em>भारत नेपाल की शांति और तरक्की के लिए हमेशा साथ रहेगा।&#8221;</em></li>
<li><strong>भारत के विदेश मंत्रालय (</strong><strong>MEA)</strong> ने भी बयान जारी कर कहा कि भारत <strong>नेपाल के साथ मिलकर स्थिरता और विकास के लिए काम करता रहेगा।</strong></li>
</ul>
<p><strong>आगे क्या होगा</strong></p>
<ul>
<li>नेपाल में <strong>अगले </strong><strong>6 </strong><strong>महीने में चुनाव कराए जाएंगे</strong>।</li>
<li>अंतरिम सरकार का फोकस <strong>शांति</strong><strong>, </strong><strong>स्थिरता और पारदर्शी चुनाव</strong> पर होगा।</li>
<li>सुशीला कार्की की ईमानदार छवि और न्यायिक अनुभव से जनता को नई उम्मीद मिली है।</li>
</ul>
<p>नेपाल में यह बदलाव <strong>युवा शक्ति और जनता की ताकत</strong> का नतीजा है।<br />
सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री बनना न सिर्फ <strong>महिला सशक्तिकरण</strong> की मिसाल है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि <strong>लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे ऊपर है</strong>।<br />
आने वाले 6 महीने नेपाल के लिए बेहद अहम होंगे, जो तय करेंगे कि देश <strong>शांति और विकास की राह</strong> पर आगे बढ़ेगा या फिर सियासी अस्थिरता जारी रहेगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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