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	<title>PriyankaGandhi &#8211; NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</title>
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	<description>NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</description>
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		<title>पंजाब की राजनीति में नई हलचल, Priyanka Gandhi से मुलाकात करेंगे नवजोत सिद्धू!</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/a-new-stir-in-punjab-politics-navjot-sidhu-will-meet-priyanka-gandhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Dec 2025 09:43:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[#Punjab]]></category>
		<category><![CDATA[CongressControversy]]></category>
		<category><![CDATA[NavjotKaurSidhu]]></category>
		<category><![CDATA[NavjotSinghSidhu]]></category>
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					<description><![CDATA[पंजाब की राजनीति इस समय गरमाई हुई है। डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के बयानों की वजह से कांग्रेस में छिड़े घमासान में अब नवजोत सिंह सिद्धू की भी एंट्री हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवजोत सिंह सिद्धू ने पार्टी हाईकमान से संपर्क किया है। वह अपनी पत्नी के बयानों पर कोई भी एक्शन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पंजाब की राजनीति इस समय गरमाई हुई है। डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के बयानों की वजह से कांग्रेस में छिड़े घमासान में अब नवजोत सिंह सिद्धू की भी एंट्री हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवजोत सिंह सिद्धू ने पार्टी हाईकमान से संपर्क किया है। वह अपनी पत्नी के बयानों पर कोई भी एक्शन लेने से पहले अपनी बात रखना चाहते हैं।</p>
<p>इसके लिए उन्होंने प्रियंका गांधी से मिलने के लिए समय भी मांगा है। बताया जा रहा है कि नवजोत सिद्धू को 19 दिसंबर को प्रियंका गांधी से मिलेने का समय मिला है। आपको ये भी बता दें कि, सिद्धू कल, बुधवार को भी दिल्ली पहुंचे थे लेकिन संसद सत्र के चलते हाईकमान के नेताओं से मुलाकात नहीं हो पाई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आपको बता दें कि नवजोत कौर सिद्धू के &#8216;मुख्यमंत्री बनने के लिए 500 करोड़ के अटैची&#8217; वाले बयान के बाद राजनीति काफी गरमा गई है। पहले तो खुद नवजोत कौर सिद्धू ने कहा था कि बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है, लेकिन बाद में कांग्रेस नेताओं के उनके खिलाफ दिए गए बयानों के जवाब में उन्होंने कांग्रेस के सीनियर नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद मामला हाईकमान तक पहुंचा और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया। वहीं, कांग्रेस हाईकमान ने मामले की जांच के लिए एक हाई-लेवल कमेटी भी बनाई है, जिसे पार्टी के पंजाब मामलों के इंचार्ज भूपेश बघेल हेड करेंगे।</p>
<p>वहीं, हाल ही में नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मीडिया को कोई बयान नहीं दिया और न ही सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट किया। हालांकि, उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू लगातार पंजाब कांग्रेस के कुछ नेताओं पर निशाना साध रही हैं। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के अंदर इस तरह की खींचतान से हाईकमान काफी नाराज है और इसीलिए मामले की डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी गई है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>PMs-CMs को हटाने वाला Bill: Congress में बंटवारा, Tharoor ने बताया &#8220;Reasonable&#8221;, बाकी नेताओं ने कहा “Draconian Law”</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/bill-to-remove-pms-and-cms-congress-divided-tharoor-calls-it-reasonable-others-slam-it-as-draconian-law/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 Aug 2025 03:44:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[#News]]></category>
		<category><![CDATA[AbhishekSinghvi]]></category>
		<category><![CDATA[Bill]]></category>
		<category><![CDATA[CM]]></category>
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		<category><![CDATA[Politics]]></category>
		<category><![CDATA[PriyankaGandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[मोदी सरकार ने संसद में एक अहम बिल पेश किया है, जिसने राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बिल में प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री 30 दिन लगातार जेल में रहता है या हिरासत में रहता है और उस केस में कम से कम 5 साल की सज़ा का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मोदी सरकार ने संसद में एक अहम बिल पेश किया है, जिसने राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बिल में प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई भी मंत्री <strong>30 </strong><strong>दिन लगातार जेल में रहता है या हिरासत में रहता है</strong> और उस केस में <strong>कम से कम </strong><strong>5 </strong><strong>साल की सज़ा का प्रावधान</strong> है, तो उन्हें तुरंत अपने पद से हटना होगा।</p>
<p>सरकार इसे <strong>anti-corruption move</strong> बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे <strong>राजनीतिक हथियार</strong> मानकर विरोध कर रहा है।</p>
<p><strong>शशि थरूर ने तोड़ी पार्टी लाइन</strong></p>
<p>कांग्रेस सांसद <strong>शशि थरूर</strong> ने इस बिल का समर्थन कर सबको चौंका दिया।<br />
थरूर ने कहा:</p>
<p>“On the face of it, ये बिल reasonable लगता है। जो गलत करेगा, उसे सज़ा मिलनी चाहिए और वो constitutional या political office पर नहीं रह सकता। ये बात मुझे logical लगती है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि बिल को <strong>संसदीय समिति</strong> के पास भेजकर उस पर विस्तार से चर्चा करना अच्छा कदम होगा।</p>
<p><strong>कांग्रेस नेताओं का विरोध</strong></p>
<p>लेकिन कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने इस बिल को खतरनाक बताया है।</p>
<ul>
<li><strong>प्रियंका गांधी (कांग्रेस सांसद</strong><strong>, </strong><strong>वायनाड):</strong><br />
उन्होंने इसे पूरी तरह <strong>तानाशाही (</strong><strong>draconian law)</strong> कहा।<br />
प्रियंका का तर्क है कि –</li>
</ul>
<p>“कल को किसी भी मुख्यमंत्री को fabricated charges (झूठे केस) में फंसा कर 30 दिन जेल में रख दिया जाए और वो CM की कुर्सी से हट जाएगा, बिना किसी conviction (दोष साबित हुए)। ये बिल्कुल unconstitutional और undemocratic है।”</p>
<ul>
<li><strong>के.सी. वेणुगोपाल (सीनियर कांग्रेस नेता):</strong><br />
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ एक <strong>diversionary tactic</strong> है।</li>
</ul>
<p>“ये बिल पास नहीं होगा। इसका मकसद सिर्फ़ electoral fraud और विपक्ष की गतिविधियों से लोगों का ध्यान हटाना है। सरकार vendetta politics को constitutional रूप देना चाहती है।”</p>
<ul>
<li><strong>अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस प्रवक्ता):</strong><br />
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनावी मैदान में विपक्षी मुख्यमंत्रियों को नहीं हरा पा रही, इसलिए इस तरह का क़ानून लाकर उन्हें हटाना चाहती है।</li>
</ul>
<p><strong>बिल में क्या है खास</strong><strong>?</strong></p>
<ul>
<li>अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री <strong>30 </strong><strong>दिन तक जेल में रहते हैं</strong>, और जिस अपराध में उन पर केस है उसमें <strong>कम से कम </strong><strong>5 </strong><strong>साल की सज़ा</strong> हो सकती है, तो उन्हें पद से हटना होगा।</li>
<li>हालांकि, जेल से छूटने के बाद वही नेता <strong>दोबारा उसी पद पर नियुक्त हो सकते हैं</strong>।</li>
<li>अभी के कानून (Representation of the People’s Act, 1951) में नियम है कि अगर किसी सांसद या विधायक को <strong>2 </strong><strong>साल या उससे ज्यादा की सज़ा</strong> हो जाती है, तभी वो अयोग्य ठहराए जाते हैं।</li>
<li>यानी यह नया प्रस्ताव उससे कहीं ज्यादा सख़्त है।</li>
</ul>
<p><strong>राजनीतिक हलचल</strong></p>
<p>यह बिल <strong>मानसून सत्र के आख़िरी दो दिन पहले</strong> पेश किया गया, जिससे संसद और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।<br />
विपक्ष का आरोप है कि सरकार इसका इस्तेमाल <strong>opposition leaders </strong><strong>को टारगेट करने</strong> के लिए करेगी।<br />
वहीं, समर्थक नेताओं का कहना है कि यह कानून राजनीति को <strong>clean </strong><strong>और </strong><strong>corruption-free</strong> बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।</p>
<p>कुल मिलाकर, यह बिल अगर पास होता है तो भारतीय राजनीति का चेहरा बदल सकता है। लेकिन इसके लागू होने से पहले ही यह <strong>पक्ष-विपक्ष की जंग का नया मुद्दा</strong> बन गया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>Delhi- NCR में Stray Dogs हटाने के Supreme Court Order पर Gandhi परिवार का एक सुर – चारों नेताओं ने जताया विरोध, Social Media पर छिड़ी बहस</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/one-voice-from-the-gandhi-family-on-supreme-court-order-to-remove-stray-dogs-in-delhi-ncr-all-four-leaders-oppose-debate-erupts-on-social-media/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Aug 2025 05:11:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[AnimalRights]]></category>
		<category><![CDATA[AnimalWelfare]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[DelhiNCR]]></category>
		<category><![CDATA[DogLovers]]></category>
		<category><![CDATA[GandhiFamily]]></category>
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		<category><![CDATA[SupremeCourt]]></category>
		<category><![CDATA[VarunGandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से स्ट्रे डॉग्स (आवारा कुत्तों) को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात ये है कि इस मामले में गांधी परिवार के चार सदस्य – राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, वरुण गांधी और मेनका गांधी – अलग-अलग राजनीतिक दलों में होने के बावजूद [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से स्ट्रे डॉग्स (आवारा कुत्तों) को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात ये है कि इस मामले में गांधी परिवार के चार सदस्य – राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, वरुण गांधी और मेनका गांधी – अलग-अलग राजनीतिक दलों में होने के बावजूद एक ही सुर में बोलते नज़र आए। सभी ने इस आदेश को <strong>क्रूर</strong><strong>, अव्यावहारिक और अमानवीय</strong> बताया है।</p>
<p><strong>क्या है मामला</strong><strong>?</strong><br />
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने आदेश दिया कि दिल्ली-एनसीआर की सड़कों से स्ट्रे डॉग्स को हटाया जाए। कोर्ट ने कहा कि हालात “बेहद गंभीर” हैं, खासकर बच्चों में <strong>डॉग बाइट और रेबीज़</strong> के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे मौतें भी हो रही हैं।<br />
ये केस <em>सुओ मोटो</em> था, यानी किसी ने शिकायत नहीं की थी, बल्कि कोर्ट ने खुद मामले को उठाया।</p>
<p><strong>राहुल गांधी का बयान</strong><br />
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने X (ट्विटर) पर लिखा –<br />
<em>&#8220;ये आदेश दशकों से अपनाई जा रही मानवीय और साइंस-आधारित नीति से पीछे हटना है। ब्लैंकेट रिमूवल क्रूर है, दूरदर्शिता की कमी है और हमारी करुणा छीन लेता है।&#8221;</em><br />
उन्होंने कहा कि <strong>शेल्टर</strong><strong>, स्टेरिलाइज़ेशन, वैक्सीनेशन और कम्युनिटी केयर</strong> से बिना क्रूरता के सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सकता है।</p>
<p><strong>प्रियंका गांधी वाड्रा की प्रतिक्रिया</strong><br />
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा –<br />
<em>&#8220;कुछ हफ्तों में सभी डॉग्स को शेल्टर में भेजना भयानक अमानवीयता होगी, क्योंकि इतने शेल्टर मौजूद ही नहीं हैं।&#8221;</em><br />
उन्होंने डॉग्स को “सबसे खूबसूरत जीव” बताया और कहा कि जानवर पहले से ही शहरी इलाकों में बहुत तकलीफ़ झेलते हैं। उन्होंने इस स्थिति से निपटने के लिए <strong>ज्यादा मानवीय तरीका</strong> खोजने की अपील की।</p>
<p><strong>वरुण गांधी की टिप्पणी</strong><br />
पूर्व BJP सांसद वरुण गांधी ने आदेश को “<strong>Institutionalisation of cruelty</strong>” बताया।<br />
उन्होंने कहा –<br />
<em>&#8220;ऐसा सोचना एक कानूनी ढांचा बना सकता है जो उन पर कार्रवाई करेगा जो खुद की रक्षा नहीं कर सकते। कल को ये सोच स्ट्रे गायों, गरीबों की बस्तियों तक पहुंच सकती है।&#8221;</em><br />
उनके मुताबिक, जब कोई देश सहानुभूति से दूर हो जाता है, तो वो <strong>नैतिक संकट</strong> का शिकार हो जाता है।</p>
<p><strong>मेनका गांधी का विरोध</strong><br />
पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट मेनका गांधी ने आदेश को “<strong>अव्यावहारिक, आर्थिक रूप से असंभव और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक</strong>” बताया।<br />
उन्होंने कहा –<br />
<em>&#8220;अगर इस आदेश का पालन करना पड़ा, तो 3 लाख डॉग्स को पकड़कर 1,000–2,000 शेल्टर बनाने होंगे और इस पर कम से कम ₹4–5 करोड़ का खर्च आएगा।&#8221;</em><br />
मेनका गांधी का दावा है कि आदेश एक ऐसी रिपोर्ट पर आधारित है जिसमें एक बच्चे की मौत को गलत तरीके से डॉग अटैक से जोड़ा गया।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया पर गरमा-गरम बहस</strong></p>
<ul>
<li><strong>समर्थकों का तर्क</strong> – डॉग बाइट और रेबीज़ की वजह से कई मौतें हो रही हैं, इसलिए कार्रवाई ज़रूरी है।</li>
<li><strong>विरोधियों का तर्क</strong> – आदेश अव्यावहारिक है, क्रूर है और जानवरों के साथ बर्बरता होगी।</li>
</ul>
<p>ये पहला मौका है जब गांधी परिवार के चार बड़े नेता एक ही मुद्दे पर एक साथ खड़े दिख रहे हैं। मामला सिर्फ स्ट्रे डॉग्स के हटाने का नहीं, बल्कि <strong>मानवीय संवेदनाओं बनाम पब्लिक सेफ्टी</strong> की बहस का बन गया है। आने वाले दिनों में ये विवाद और बड़ा हो सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर अब पॉलिटिक्स, सोशल मीडिया और पब्लिक ओपिनियन – तीनों में अलग-अलग राय साफ़ नज़र आ रही है।</p>
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