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	<title>USNews &#8211; NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</title>
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	<description>NKN: Punjabi News Online, Today Punjab News, Today Breaking News</description>
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		<title>H-1B Visa के लिए अब Social Media Accounts Public करना होगा, 15 December से New Rule लागू</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/h-1b-visa-applicants-must-now-make-their-social-media-accounts-public-new-rule-effective-from-december-15/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 09:10:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[H1BUpdates]]></category>
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		<category><![CDATA[IndiansInUSA]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका में H-1B वीजा लेने वालों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा नियमों में सख्ती करते हुए आदेश दिए हैं कि अब आवेदकों को अपना सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक करना होगा। इसका मतलब है कि अमेरिकी अधिकारी आपके सोशल मीडिया प्रोफाइल, पोस्ट और लाइक्स देख सकेंगे। अगर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका में H-1B वीजा लेने वालों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा नियमों में सख्ती करते हुए आदेश दिए हैं कि अब आवेदकों को अपना सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक करना होगा। इसका मतलब है कि अमेरिकी अधिकारी आपके सोशल मीडिया प्रोफाइल, पोस्ट और लाइक्स देख सकेंगे। अगर कोई भी गतिविधि अमेरिकी हितों के खिलाफ पाई गई, तो H-1B वीजा नहीं मिलेगा।</p>
<p>इस नियम का असर H-1B के आश्रितों यानी पत्नी, बच्चों और पेरेंट्स के लिए दिए जाने वाले H-4 वीजा पर भी पड़ेगा। यानी उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी पब्लिक करना जरूरी होगा। यह पहला मौका है जब H-1B वीजा के लिए सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच अनिवार्य की गई है। नए नियम 15 दिसंबर 2025 से लागू होंगे।</p>
<p>इससे पहले अगस्त 2025 से ही स्टडी वीजा (F-1, M-1, J-1) और विजिटर वीजा (B-1, B-2) के लिए भी सोशल मीडिया पब्लिक करना अनिवार्य कर दिया गया है।</p>
<h3><strong>H-1B </strong><strong>वीजा क्या है</strong><strong>?</strong></h3>
<p>H-1B वीजा हाई स्किल्ड प्रोफेशनल्स जैसे डॉक्टर, इंजीनियर और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स को अमेरिका में काम करने के लिए मिलता है। यह वीजा पहली बार 1990 में अमेरिकी कांग्रेस ने शुरू किया था।</p>
<ul>
<li><strong>भारतीयों पर असर:</strong> हर साल जारी किए जाने वाले H-1B वीजा में से लगभग 70% भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलता है, इसलिए नया नियम सबसे ज्यादा भारतीयों को प्रभावित करेगा।</li>
<li><strong>वीज़ा फीस:</strong> पहले इसकी फीस लगभग $9,000 थी। सितंबर 2025 में इसे बढ़ाकर लगभग ₹90 लाख कर दिया गया।</li>
<li><strong>अवधि:</strong> H-1B वीजा 3 साल के लिए जारी होता है और दो बार बढ़ाया जा सकता है, यानी कुल 6 साल। इसके बाद आवेदक ग्रीन कार्ड यानी अमेरिका की स्थायी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है।</li>
</ul>
<h3><strong>ट्रम्प का रवैया </strong><strong>H-1B </strong><strong>वीजा पर</strong></h3>
<p>ट्रम्प का H-1B वीजा पर रवैया कभी हां और कभी ना वाला रहा है।</p>
<ul>
<li>2016 में उन्होंने कहा था कि यह वीजा अमेरिकी हितों के खिलाफ है।</li>
<li>2019 में वीजा का एक्सटेंशन रोक दिया गया था।</li>
<li>लेकिन हाल ही में उन्होंने कहा कि अमेरिका को टैलेंट की जरूरत है।</li>
</ul>
<h3><strong>नए वीजा कार्ड्स</strong></h3>
<p>H-1B वीजा में बदलाव के अलावा ट्रम्प ने तीन नए वीजा कार्ड भी लॉन्च किए हैं:</p>
<ol>
<li><strong>Trump Gold Card</strong> – कीमत ₹8.8 करोड़, यह कार्ड धारक को अमेरिका में हमेशा रहने का अधिकार देगा।</li>
<li><strong>Trump Platinum Card</strong></li>
<li><strong>Corporate Gold Card</strong></li>
</ol>
<h3><strong>भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और </strong><strong>H-1B</strong></h3>
<p>भारत हर साल लाखों इंजीनियर और कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट तैयार करता है। ये प्रोफेशनल्स अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा H-1B स्पॉन्सर करती हैं।</p>
<p>अब बढ़ी हुई फीस और सोशल मीडिया नियम की वजह से भारतीय टैलेंट यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मिडिल ईस्ट के देशों की तरफ रुख कर सकता है।</p>
<p>15 दिसंबर से H-1B वीजा के लिए सोशल मीडिया जांच अनिवार्य हो जाएगा। भारतीय प्रोफेशनल्स पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। वीजा की बढ़ी हुई फीस और नई पॉलिसी को देखते हुए अब अमेरिका में काम करने के विकल्प और चुनौतियां बदलने वाली हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>America का सबसे लंबा &#8216;Shutdown&#8217; समाप्त: 1.4 Million Employees को 43 दिन बाद मिलेगा वेतन! लेकिन Situation अभी भी पूरी तरह Normal नहीं</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/americas-longest-shutdown-ends-1-4-million-employees-to-receive-pay-after-43-days-but-the-situation-still-isnt-fully-normal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Nov 2025 07:21:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[AmericaShutdown]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[DonaldTrump]]></category>
		<category><![CDATA[FederalEmployees]]></category>
		<category><![CDATA[GovernmentShutdown]]></category>
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		<category><![CDATA[USGovernment]]></category>
		<category><![CDATA[USNews]]></category>
		<category><![CDATA[USPolitics]]></category>
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					<description><![CDATA[अमरीका में चला 43 दिन लंबा सरकारी Shutdown आखिरकार खत्म हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फंडिंग बिल पर साइन कर दिए हैं, जिसके बाद फेडरल सरकार ने दोबारा काम शुरू कर दिया है। यह अमरीकी इतिहास का सबसे लंबा Shutdown था। इस Shutdown की वजह से न सिर्फ सरकारी दफ्तर बंद रहे बल्कि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमरीका में चला 43 दिन लंबा सरकारी Shutdown आखिरकार खत्म हो गया है। राष्ट्रपति <strong>डोनाल्ड ट्रम्प</strong> ने फंडिंग बिल पर साइन कर दिए हैं, जिसके बाद फेडरल सरकार ने दोबारा काम शुरू कर दिया है। यह अमरीकी इतिहास का <strong>सबसे लंबा Shutdown</strong> था।</p>
<p>इस Shutdown की वजह से न सिर्फ सरकारी दफ्तर बंद रहे बल्कि लाखों कर्मचारियों की ज़िंदगी भी प्रभावित हुई। अब सरकार चल तो पड़ी है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी भी समय लगेगा।</p>
<h2><strong>1. 14 </strong><strong>लाख सरकारी कर्मचारियों की सैलरी का रास्ता खुला</strong></h2>
<p>Shutdown के दौरान करीब <strong>1.4 </strong><strong>मिलियन (14 </strong><strong>लाख) फेडरल कर्मचारी</strong> बिना सैलरी के रहे।</p>
<ul>
<li>आधे कर्मचारी <strong>बिना तनख़्वाह के काम करते रहे</strong></li>
<li>बाकी आधों को “furlough” पर घर बैठना पड़ा</li>
</ul>
<p>अब सरकार खुलते ही इन सबको <strong>बकाया सैलरी (back pay)</strong> मिलेगी। ज़्यादातर कर्मचारियों को आने वाले कुछ दिनों में पैसा मिलने लगेगा। कुछ को उनकी agency के हिसाब से थोड़ी देरी भी हो सकती है।</p>
<h2><strong>2. </strong><strong>बिल में क्या-क्या है</strong><strong>?</strong></h2>
<ul>
<li>सरकार को <strong>31 </strong><strong>जनवरी</strong> तक फंडिंग मिलेगी।</li>
<li>इस दौरान <strong>कोई लेऑफ नहीं</strong> होगी, यानी कर्मचारियों की छंटनी पर रोक।</li>
<li>Shutdown खत्म करने वाला यह बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में <strong>222–209</strong> मतों से पास हुआ था।</li>
<li>लेकिन इसमें <strong>Obamacare (ACA Subsidy)</strong> के प्रीमियम टैक्स क्रेडिट को 2025 के बाद बढ़ाने का कोई वादा नहीं किया गया। इस पर Democrats अभी भी लड़ाई जारी रखेंगे।</li>
</ul>
<h2><strong>3. Shutdown </strong><strong>खत्म</strong><strong>, </strong><strong>लेकिन सब कुछ नॉर्मल नहीं होगा</strong></h2>
<p>सरकार तो खुल गई है, पर हर विभाग तुरंत पुराने ढर्रे पर वापस नहीं आ पाएगा।</p>
<h3><strong>Federal Offices</strong></h3>
<p>OMB (Office of Management and Budget) ने सभी एजेंसियों को आदेश दिया है कि कर्मचारी तुरंत काम पर लौटें और दफ्तर सुचारू तरीके से खोलें।</p>
<h2><strong>4. Food Assistance (SNAP) Program</strong></h2>
<p>अमरीका के करीब <strong>42 </strong><strong>मिलियन लोग SNAP (food stamp) program</strong> पर निर्भर हैं।<br />
Shutdown के दौरान कई राज्यों में लोगों को</p>
<ul>
<li>पूरा राशन</li>
<li>आधा राशन</li>
<li>या बिल्कुल भुगतान<br />
नहीं मिल पाया था।</li>
</ul>
<p>अब सरकार खुलने के बाद SNAP दोबारा शुरू होगा, लेकिन <strong>हर राज्य में payments </strong><strong>नॉर्मल होने में समय लगेगा</strong>। SNAP की फंडिंग इस बिल में <strong>सितंबर 2026</strong> तक के लिए पास हुई है।</p>
<h2><strong>5. Smithsonian Museums </strong><strong>और </strong><strong>National Zoo </strong><strong>खोलने की तैयारी</strong></h2>
<p>Shutdown के दौरान यह दुनिया के सबसे बड़े म्यूज़ियम नेटवर्क बंद थे। अब:</p>
<ul>
<li>American History Museum</li>
<li>Air and Space Museum</li>
<li>Udvar-Hazy Center<br />
<strong>शुक्रवार से खुलेंगे</strong><br />
बाकी सभी म्यूज़ियम और Zoo सोमवार तक <strong>rolling basis</strong> पर खुल जाएंगे।</li>
</ul>
<h2><strong>6. Air Travel </strong><strong>पर भारी असर </strong><strong>— Flights </strong><strong>अभी भी पूरी तरह नॉर्मल नहीं</strong></h2>
<p>Air traffic controllers बिना सैलरी काम कर रहे थे, जिससे एयरपोर्ट्स पर बड़ी दिक्कतें आईं।</p>
<ul>
<li>Flights 4–10% तक कम की गईं थीं</li>
<li>अभी 6% की कटौती लागू है<br />
FAA का कहना है कि वे हालात सुधारने में लगे हैं, लेकिन <strong>सबकुछ नॉर्मल होने में समय लगेगा</strong>।<br />
Thanksgiving जैसे busy travel time पर इसका असर दिख सकता है।<br />
Controller को 48 घंटों में उनकी backpay का 70% मिल जाएगा।</li>
</ul>
<h2><strong>7. National Parks </strong><strong>को भारी नुकसान</strong></h2>
<p>Shutdown के दौरान कई national parks खुले जरूर रहे, लेकिन:</p>
<ul>
<li>स्टाफ की भारी कमी थी</li>
<li>सफाई और मेंटेनेंस नहीं हो पा रहा था</li>
<li>Visitor fees नहीं मिल पाई<br />
इससे पार्कों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा और अब इन्हें पूरी तरह ठीक करने में <strong>कई महीने लग सकते हैं</strong>।</li>
</ul>
<h2><strong>8. IRS </strong><strong>पर भी बड़ा असर</strong><strong>, </strong><strong>अगले साल का </strong><strong>Tax Season </strong><strong>मुश्किल हो सकता है</strong></h2>
<p>IRS ने अपने <strong>74,000</strong> में से आधे कर्मचारियों को furlough किया था।<br />
इस दौरान:</p>
<ul>
<li>Tax refunds जारी नहीं हुए</li>
<li>Helplines बंद रहीं</li>
<li>Appointments कैंसल हो गईं</li>
</ul>
<p>इसका असर 2026 के tax season पर पड़ सकता है, क्योंकि बंद होने से पहले IRS पर पहले से ही लाखों cases pending थे।</p>
<h2><strong>9. </strong><strong>आर्थिक रिपोर्टें शायद कभी जारी न हों</strong></h2>
<p>Shutdown की वजह से:</p>
<ul>
<li>October और November की jobs report</li>
<li>inflation data</li>
</ul>
<p>जारी नहीं हो पाए।<br />
वाइट हाउस का कहना है कि <strong>ये रिपोर्टें शायद कभी जारी न हो सकें</strong> क्योंकि Shutdown ने data system को &#8220;permanently damage&#8221; कर दिया है।</p>
<h2><strong>10. Trump </strong><strong>का </strong><strong>Democrats </strong><strong>पर हमला</strong></h2>
<p>बिल पर साइन करते समय ट्रम्प ने आरोप लगाया:</p>
<ul>
<li>Democrats ने illegal immigrants के लिए पैसे निकालने के लिए सरकार बंद कराई</li>
<li>इसे उन्होंने “extortion” यानी जबरदस्ती पैसा वसूलने की कोशिश कहा</li>
<li>Shutdown से लाखों अमेरिकियों को नुकसान हुआ:
<ul>
<li>20,000 flights delayed/cancel</li>
<li>10 लाख कर्मचारी बिना सैलरी</li>
<li>Food stamps से जुड़े लाखों लोग प्रभावित</li>
</ul>
</li>
</ul>
<h2><strong>11. 232 </strong><strong>साल पुरानी </strong><strong>Penny Currency </strong><strong>हुई बंद</strong></h2>
<p>Shutdown से अलग एक और बड़ा फैसला —<br />
अमरीका ने अपनी <strong>सबसे छोटी करंसी—Penny (1 cent)</strong> को आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया है।</p>
<p>क्यों बंद किया?</p>
<ul>
<li>एक penny बनाने में <strong>69 cent</strong> खर्च</li>
<li>कीमत सिर्फ <strong>1 cent</strong></li>
<li>यानी हर penny पर सरकार को नुकसान<br />
2023 में ही pennies बनाने से <strong>179 </strong><strong>मिलियन डॉलर</strong> (1,500 करोड़ रु) का नुकसान हुआ।<br />
लगभग <strong>250 </strong><strong>अरब pennies</strong> अभी circulation में हैं, जिन्हें धीरे-धीरे बाहर किया जाएगा।</li>
</ul>
<p>पैनी का सिस्टम भारत के “पैसे” जैसा ही था —<br />
100 pennies = 1 dollar (जैसे 100 पैसे = 1 रुपये)।</p>
<h2><strong>12. Skilled Foreign Workers </strong><strong>को लेकर नई नीति</strong></h2>
<p>Treasury Secretary Scott Bessent ने कहा कि:</p>
<ul>
<li>Defence, shipbuilding और semiconductors जैसे सेक्टरों में skilled workers की जरूरत है</li>
<li>प्लान यह है कि <strong>विदेशी skilled workers </strong><strong>को 3–7 </strong><strong>साल बुलाया जाए</strong></li>
<li>वे अमेरिकी workers को ट्रेन करें</li>
<li>फिर वापस अपने देश लौट जाएं<br />
इससे American workers धीरे-धीरे पूरे सिस्टम को संभाल पाएंगे।</li>
</ul>
<p>Shutdown खत्म जरूर हो गया है, लेकिन उसकी चोटें अभी भी कई जगह दिखेंगी—<br />
सरकारी दफ्तर, एयर ट्रैवल, parks, IRS, और food programs सबको नॉर्मल होने में समय लगेगा।<br />
फंडिंग अभी सिर्फ <strong>31 </strong><strong>जनवरी</strong> तक है, इसलिए खतरा है कि अगर पार्टियों में दोबारा सहमति नहीं बनी, तो सरकार फिर से बंद हो सकती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>America में Government Shutdown 22वें दिन भी जारी: लाखों Employees बिना सैलरी के, Trump और Democrats में कड़ा टकराव</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/us-government-shutdown-enters-22nd-day-millions-of-employees-without-pay-as-trump-and-democrats-lock-horns/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Oct 2025 09:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[AmericanPolitics]]></category>
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		<category><![CDATA[BudgetStalemate]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका में 1 अक्टूबर से शुरू हुआ सरकारी शटडाउन आज 22वें दिन में पहुँच गया है। यह अमेरिका के इतिहास का दूसरा सबसे लंबा शटडाउन है। इससे पहले 2018 में 35 दिन और 1995 में 21 दिन तक शटडाउन रहा था। इस शटडाउन की वजह है कांग्रेस में फंडिंग बिल पास न होना। सीनेट में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका में 1 अक्टूबर से शुरू हुआ सरकारी शटडाउन आज 22वें दिन में पहुँच गया है। यह अमेरिका के इतिहास का <strong>दूसरा सबसे लंबा शटडाउन</strong> है। इससे पहले 2018 में 35 दिन और 1995 में 21 दिन तक शटडाउन रहा था।</p>
<p>इस शटडाउन की वजह है कांग्रेस में फंडिंग बिल पास न होना। <strong>सीनेट में </strong><strong>20 </strong><strong>अक्टूबर को </strong><strong>11</strong><strong>वीं बार वोटिंग हुई</strong>, लेकिन जरूरी 60 वोट्स में से केवल 55 वोट ही मिले।</p>
<p><strong>शटडाउन की वजह: हेल्थकेयर सब्सिडी पर विवाद</strong></p>
<p>अमेरिका के दोनों बड़े दल, <strong>डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन</strong>, <strong>ओबामा हेल्थकेयर सब्सिडी प्रोग्राम</strong> को लेकर फंसे हुए हैं।</p>
<ul>
<li><strong>डेमोक्रेट्स:</strong> हेल्थकेयर सब्सिडी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।</li>
<li><strong>रिपब्लिकन:</strong> सब्सिडी बढ़ी तो सरकार को ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे, जिससे अन्य सरकारी काम प्रभावित होंगे।</li>
</ul>
<p>इस वजह से शटडाउन लंबा खिंच गया और <strong>दोनों दलों में अहम की लड़ाई</strong> शुरू हो गई है।</p>
<p><strong>इस शटडाउन की खास बातें</strong></p>
<ol>
<li><strong>डेमोक्रेट्स का ट्रम्प पर वार:</strong> डेमोक्रेट्स हेल्थ बीमा सब्सिडी बचाना चाहते हैं और ट्रम्प के फंड रोकने की पावर को चुनौती दे रहे हैं।</li>
<li><strong>रिपब्लिकन्स का मौका:</strong> ट्रम्प इसे सरकारी नौकरियों और डेमोक्रेट प्रोग्राम्स में कटौती का मौका मानते हैं।</li>
<li><strong>विश्वास की कमी:</strong> पहले देर रात बातचीत से हल निकल जाता था, अब दोनों दल एक-दूसरे पर इल्जाम लगा रहे हैं।</li>
<li><strong>अर्थव्यवस्था पर असर:</strong> करीब 7.5 लाख कर्मचारी बिना तनख्वाह के हैं। इससे खर्च घटेगा और बिजनेस प्रभावित होंगे। हर हफ्ते 0.2% GDP का नुकसान हो रहा है।</li>
</ol>
<p><strong>शटडाउन का असर</strong></p>
<ul>
<li><strong>कर्मचारी:</strong> करीब 7.5 लाख सरकारी कर्मचारी बिना सैलरी के छुट्टी पर हैं।</li>
<li><strong>जरूरी कर्मचारी:</strong> सेना, पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर जैसे जरूरी कर्मचारी बिना सैलरी काम कर रहे हैं।</li>
<li><strong>हवाई यात्रा और फूड प्रोग्राम:</strong> उड़ानें देरी से चल रही हैं और कम आय वाले परिवारों को फूड सहायता मिलने में दिक्कत।</li>
<li><strong>टूरिज्म:</strong> स्मिथसोनियन म्यूजियम बंद।</li>
<li><strong>एटमी हथियार सुरक्षा:</strong> नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एजेंसी के 1,400 कर्मचारी छुट्टी पर हैं। इससे परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।</li>
</ul>
<p><strong>ट्रम्प को शटडाउन से फायदा या नुकसान</strong></p>
<p>शटडाउन के दौरान ट्रम्प प्रशासन <strong>OMB (Office of Management &amp; Budget)</strong> के जरिए जरूरी और गैर-जरूरी सेवाओं का फैसला कर सकता है।</p>
<ul>
<li>डेमोक्रेट समर्थित प्रोग्राम्स (जैसे शिक्षा, पर्यावरण, हेल्थ सब्सिडी) को गैर-जरूरी कर सकता है।</li>
<li>डिफेंस और इमिग्रेशन जैसे कामों को जरूरी घोषित किया जा सकता है।</li>
<li>छोटे शटडाउन से ट्रम्प को फायदा हो सकता है, लेकिन लंबा खिंचने पर आर्थिक नुकसान और उनकी छवि खराब हो सकती है।</li>
</ul>
<p><strong>अमेरिका का फिस्कल ईयर और शटडाउन</strong></p>
<ul>
<li>अमेरिका का <strong>फिस्कल ईयर (खर्च का साल)</strong> 1 अक्टूबर से शुरू होता है।</li>
<li>सरकार इस दौरान तय करती है कि पैसा कहां खर्च करना है।</li>
<li>अगर नया बजट पास नहीं होता, तो सरकारी कामकाज बंद हो जाता है। इसे शटडाउन कहते हैं।</li>
</ul>
<p><strong>पिछले शटडाउन के उदाहरण</strong></p>
<ul>
<li><strong>2013:</strong> कनाडा की सीमा की देखभाल सिर्फ 1 व्यक्ति कर रहा था।</li>
<li><strong>2013:</strong> 24 विदेशी कब्रिस्तान बंद।</li>
<li><strong>2018:</strong> एयरपोर्ट पर कर्मचारी काम नहीं गए → उड़ानें रद्द।</li>
<li><strong>2018:</strong> FBI के काम में पैसा खत्म → काम प्रभावित।</li>
</ul>
<p>अमेरिका में शटडाउन से न केवल लाखों कर्मचारियों की जिंदगी प्रभावित हो रही है, बल्कि अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर पड़ रहा है। ट्रम्प और डेमोक्रेट्स के बीच इस टकराव का हल अभी दूर दिख रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>America में Prominent Anti-Khalistan Activist Sukhi Chahal की Mysterious Death, सवालों के घेरे में घटना</title>
		<link>https://newknowledgenews.com/prominent-anti-khalistan-activist-sukhi-chahals-mysterious-death-in-the-us-raises-questions/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divak Savi]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Aug 2025 03:46:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[AntiKhalistan]]></category>
		<category><![CDATA[BreakingNews]]></category>
		<category><![CDATA[CaliforniaNews]]></category>
		<category><![CDATA[GlobalNews]]></category>
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		<category><![CDATA[SukhiChahal]]></category>
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		<category><![CDATA[VoiceOfTruth]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका में बसे भारतीय मूल के बिज़नेसमैन और सोशल एक्टिविस्ट सुखी चहल की अचानक हुई मौत ने न सिर्फ़ भारतीय डायस्पोरा बल्कि एंटी-खालिस्तान कम्युनिटी को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। कैलिफ़ोर्निया में गुरुवार रात (31 जुलाई) उनकी मौत संदिग्ध हालातों में हुई, जिसके बाद से तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या हुआ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका में बसे भारतीय मूल के बिज़नेसमैन और सोशल एक्टिविस्ट <strong>सुखी चहल</strong> की अचानक हुई मौत ने न सिर्फ़ <strong>भारतीय डायस्पोरा</strong> बल्कि <strong>एंटी-खालिस्तान कम्युनिटी</strong> को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। कैलिफ़ोर्निया में गुरुवार रात (31 जुलाई) उनकी मौत संदिग्ध हालातों में हुई, जिसके बाद से तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>क्या हुआ उस रात</strong><strong>?</strong></p>
<p>सुखी चहल गुरुवार को <strong>San Jose, California</strong> में एक परिचित के घर डिनर पर गए थे। उनके क़रीबी दोस्त <strong>जस्पाल सिंह</strong> के मुताबिक़ – <em>“</em><em>डिनर के थोड़ी देर बाद ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वहीं उनकी मौत हो गई। इससे पहले वे पूरी तरह स्वस्थ थे।”</em></p>
<p><strong>क्यों उठ रहे हैं सवाल</strong><strong>?</strong></p>
<ul>
<li>चहल पिछले लंबे समय से <strong>खालिस्तानी संगठनों के खिलाफ़</strong> खुलकर बोलते रहे।</li>
<li>वे <strong>The Khalsa Today</strong> नामक प्लेटफ़ॉर्म के फ़ाउंडर और CEO थे, जो विदेशों में बैठे खालिस्तानी तत्वों की साज़िशों को एक्सपोज़ करता था।</li>
<li>उनके दोस्तों का कहना है कि चहल को कई बार <strong>प्रो-खालिस्तान ग्रुप्स से जान से मारने की धमकियां</strong> मिल चुकी थीं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।</li>
<li>उनकी मौत ऐसे वक़्त पर हुई है जब <strong>17 </strong><strong>अगस्त को वॉशिंगटन </strong><strong>DC </strong><strong>में खालिस्तान रेफ़रेंडम</strong> होने वाला है, जिसका वे लगातार विरोध कर रहे थे। इस वजह से कई लोग इसे सिर्फ़ “एक हादसा” मानने को तैयार नहीं हैं।</li>
</ul>
<p><strong>पुलिस जांच में जुटी</strong><strong>, </strong><strong>ऑटोप्सी रिपोर्ट का इंतज़ार</strong></p>
<p>कैलिफ़ोर्निया पुलिस ने इस केस की जांच शुरू कर दी है। उनके शव का <strong>ऑटोप्सी (पोस्टमार्टम)</strong> कराया जाएगा, ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके। शुरुआती जानकारी में <strong>हार्ट फेल्यर</strong> की बात कही जा रही है, लेकिन आधिकारिक रिपोर्ट आने तक कुछ भी तय नहीं है।</p>
<p><strong>कौन थे सुखी चहल</strong><strong>?</strong></p>
<ul>
<li><strong>लुधियाना के गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज</strong> से पढ़ाई के बाद उन्होंने <strong>स्टैनफोर्ड और </strong><strong>UC Berkeley</strong> से हाईर एजुकेशन ली।</li>
<li>कैलिफ़ोर्निया में बसने के बाद वे टेक्नोलॉजी और बिज़नेस में सफल हुए।</li>
<li>उन्होंने <strong>Punjab Foundation</strong> नाम की NGO बनाई, जो NRI बच्चों की एजुकेशन में मदद करती है।</li>
<li>चहल हमेशा इंडियन कम्युनिटी को सलाह देते थे – <em>“</em><em>अमेरिका के कानून का पालन करो</em><em>, </em><em>किसी भी तरह की क्रिमिनल एक्टिविटी में मत पड़ो</em><em>, </em><em>वरना वीज़ा कैंसल या डिपोर्ट होना तय है।”</em></li>
</ul>
<p><strong>दुनियाभर से शोक संदेश</strong></p>
<p>उनकी मौत पर दुनियाभर से शोक संदेश आ रहे हैं।</p>
<ul>
<li><strong>RSS </strong><strong>के दत्तात्रेय होसबले</strong>, <strong>राष्ट्र्रीय सिख संगत के गुरचरण सिंह गिल</strong>, और <strong>पूर्व सांसद तरलोचन सिंह</strong> ने उन्हें “<strong>धर्म योद्धा</strong>” और “<strong>सत्य की आवाज़</strong>” बताते हुए श्रद्धांजलि दी।</li>
<li>बहुत से इंडियन और सिख डायस्पोरा के लोग उन्हें एक <strong>बहादुर आवाज़</strong> मानते थे, जो खालिस्तान जैसी चरमपंथी सोच का खुलकर विरोध करते थे।</li>
</ul>
<p><strong>क्यों है ये मौत इतनी बड़ी खबर</strong><strong>?</strong></p>
<p>सुखी चहल की मौत सिर्फ़ एक शख्सियत के जाने की बात नहीं है। यह उस आवाज़ के खामोश हो जाने की कहानी है जो <strong>विदेशों में बैठे खालिस्तानी नेटवर्क</strong> के खिलाफ़ लगातार बोल रही थी। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या ये महज़ एक <strong>सांयोगिक मौत</strong> है या इसके पीछे कोई <strong>साज़िश</strong>?</p>
<p>फिलहाल, पुलिस की जांच और ऑटोप्सी रिपोर्ट का इंतजार है। लेकिन एक बात साफ है – सुखी चहल को भारतीय डायस्पोरा हमेशा <strong>कानून</strong><strong>, </strong><strong>शांति और सच</strong> की राह पर चलने वाले इंसान के रूप में याद करेगा।</p>
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