Punjab की Land Pooling Policy पर बवाल: Ludhiana के AAP Leader ने दिया Resign, Farmers का गुस्सा उफान पर

पंजाब सरकार की ज़मीन पूलिंग पॉलिसी (Land Pooling Policy) को लेकर चल रहा विवाद अब और गहराता जा रहा है। सोमवार को लुधियाना के जोधन ब्लॉक अध्यक्ष तपिंदर सिंह ग्रेवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) से इस्तीफ़ा देकर इस पॉलिसी का खुलकर विरोध किया। उन्होंने इसे “एंटी-फार्मर” (किसान विरोधी) क़रार दिया।

AAP MP का पोस्ट, फिर डिलीट – पार्टी में हलचल

इससे एक दिन पहले, आनंदपुर साहिब से AAP सांसद मलविंदर सिंह कांग ने X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर सरकार को सलाह दी थी कि इस पॉलिसी को लागू करने से पहले किसानों का भरोसा जीतना ज़रूरी है। उन्होंने कहा था कि किसानों की आपत्तियों को “इम्पैथी और डायलॉग” के साथ सुलझाना चाहिए।
लेकिन कांग ने बाद में अपना पोस्ट डिलीट कर दिया। इस कदम से वही किसान नेता नाराज़ हो गए, जो उनके स्टैंड की तारीफ़ कर रहे थे। पार्टी के अंदर भी ये पोस्ट चर्चा का मुद्दा बन गया, हालांकि AAP नेताओं ने इसे “इमोशनल आउटबर्स्ट” बताया।

65,533 एकड़ ज़मीन पर सवाल – पुराने प्रोजेक्ट्स का क्या?

पंजाब सरकार ज़मीन पूलिंग पॉलिसी के तहत 65,533 एकड़ ज़मीन अधिग्रहित करना चाहती है। लेकिन किसानों ने सवाल उठाया कि जब पहले से ली गई हज़ारों एकड़ ज़मीन पर बने प्रोजेक्ट्स की प्रॉपर्टीज़ बिक ही नहीं रहीं, तो नई ज़मीन लेने की क्या ज़रूरत है?

  • 27,111 प्रॉपर्टीज़ (रिहायशी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल) अभी तक बिक नहीं पाई हैं।
  • सबसे ज़्यादा 10,620 प्रॉपर्टीज़ GMADA के अंतर्गत हैं।
  • पंजाब मंडी बोर्ड की लगभग 10,000 प्रॉपर्टीज़ भी अनबिकी पड़ी हैं।

किसान मज़दूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा – जब पहले के प्रोजेक्ट्स की ज़मीन इस्तेमाल ही नहीं हो रही, तो 65,000 एकड़ उपजाऊ ज़मीन लेने का क्या मतलब?”

AAP का जवाब – ‘पॉलिसी वॉलंटरी है, कोई ज़बरदस्ती नहीं’

AAP के जनरल सेक्रेटरी दीपक बाली ने कहा कि विरोधियों की तरफ़ से किसानों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा – ज़मीन पूलिंग पॉलिसी पूरी तरह वॉलंटरी (स्वेच्छा से) है। बिल्डर्स पिछले 10 सालों में 29,000 एकड़ ज़मीन पर कॉलोनियां बना चुके हैं, वो भी ज्यादातर अवैध। अब जब सरकार सही कीमत और अफोर्डेबल हाउसिंग देने की कोशिश कर रही है, बिल्डर्स को दिक्कत हो रही है।”

शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने भी यही बात दोहराई – किसी से ज़बरदस्ती ज़मीन नहीं ली जाएगी। विपक्ष किसान भाइयों को गुमराह कर रहा है।”

गाँवों में बोर्ड – ‘AAP नेताओं की एंट्री बंद’

जिन गाँवों में सरकार ज़मीन लेना चाहती है, वहाँ की पंचायतों ने प्रस्ताव पास कर दिए हैं। कुछ गाँवों में तो बोर्ड लग गए हैं – “AAP नेताओं और ज़मीन अधिग्रहण अधिकारियों का प्रवेश वर्जित है।”

किसान संगठनों का प्रदर्शन और ‘ट्रैक्टर रैली’ की तैयारी

  • सोमवार को किसान मज़दूर मोर्चा ने पूरे पंजाब में प्रदर्शन किए।
  • हर ज़िले (सिवाय बठिंडा और रोपड़) के डिप्टी कमिश्नरों को मेमोरेंडम सौंपे गए।
  • मोहाली में शिअरोमणि अकाली दल (SAD) ने GMADA ऑफिस के बाहर धरना दिया।

अब सबकी नज़रें संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की ट्रैक्टर रैली” पर टिकी हैं, जो मंगलवार को होगी। इसे सभी विपक्षी पार्टियों का समर्थन मिला है।

नतीजा क्या निकलेगा?

AAP नेता दावा कर रहे हैं कि ये पॉलिसी किसानों के हित में है और बिल्डर्स की मनमानी रोकने के लिए है। दूसरी ओर किसान संगठन कह रहे हैं कि सरकार किसानों की ज़मीन छीनने की कोशिश कर रही है।
अब सवाल ये है कि क्या सरकार किसानों का भरोसा जीत पाएगी या विरोध और तेज़ होगा – ये आने वाला समय बताएगा।