तिब्बत में फिर भूकंप से कांपी धरती, रिक्टर स्केल पर 5.4 रही तीव्रता; पहले आए शक्तिशाली भूकंप में 16 लोगों की मौत

तिब्बत में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.4 मापी गई है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप दोपहर 2 बजकर 9 मिनट पर आया। भूकंप के बाद इलाके में लोगों के बीच चिंता का माहौल है। इससे पहले 22 अक्टूबर को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसमें कम से कम 16 लोगों की मौत और 76 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 अक्टूबर को आए भूकंप के बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप प्रभावित इलाकों से 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, कुल 12,489 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है। भूकंप के कारण कई इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचा है।

अधिकारियों के अनुसार, 22 अक्टूबर की रात करीब 10 बजकर 33 मिनट पर तिब्बत के नागकू शहर की बाकेन काउंटी में शक्तिशाली भूकंप आया था। इसका केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर से भी कम गहराई पर था। भूकंप के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव दलों को तैनात किया गया और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की गई।

सैटेलाइट और ड्रोन की मदद से चलाया गया बचाव अभियान

चीन ने भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के लिए सैटेलाइट और ड्रोन की मदद ली। चीन एयरोस्पेस विज्ञान और प्रौद्योगिकी निगम के अनुसार, प्रभावित इलाकों की तस्वीरें लेने और आपातकालीन संचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सैटेलाइट तथा मानवरहित विमानों को तैनात किया गया। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम भी जारी है।

330 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त, राहत के लिए करोड़ों की राशि जारी

शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, शक्तिशाली भूकंप के कारण 330 से अधिक मकान ढह गए या क्षतिग्रस्त हो गए। प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है। चीन ने आपातकालीन राहत कार्यों के लिए करीब पांच करोड़ युआन की राशि आवंटित की है, जबकि पुनर्वास कार्यों के लिए तीन करोड़ युआन की अतिरिक्त राशि निर्धारित की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, तिब्बती पठार भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यहां भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने के कारण भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। लगातार भूकंप के झटकों के बीच प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और राहत व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।