दिवाली पर बच्चों को पटाखों से रखें दूर, डॉक्टरों ने दी सावधानी बरतने की सलाह; जानें सुरक्षा के जरूरी उपाय

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में पटाखों की बिक्री तेज हो गई है। इस बीच डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों को पटाखों से दूर रखें और उनकी सुरक्षा का खास ध्यान दें।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, हर साल दिवाली के दौरान पटाखों के कारण बच्चों की आंखों में चोट लगने, हाथ जलने और सुनने की क्षमता प्रभावित होने के मामले सामने आते हैं। इसके अलावा पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों और अस्थमा के मरीजों पर पड़ सकता है।

माता-पिता इन बातों का रखें ध्यान

  • बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न चलाने दें। पटाखे जलाते समय किसी बड़े व्यक्ति का उनके साथ होना जरूरी है।
  • अनार, चकरी या बम जलाते समय कम से कम 5 से 7 फीट की दूरी बनाए रखें।
  • बच्चों को सिंथेटिक कपड़ों की जगह सूती कपड़े पहनाएं, ताकि आग लगने का खतरा कम रहे।
  • पटाखे जलाने वाली जगह पर पानी की बाल्टी और प्राथमिक उपचार का सामान जरूर रखें, ताकि आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।

पटाखों से चोट लगने पर क्या करें?

अगर किसी बच्चे का हाथ या शरीर का कोई हिस्सा हल्का जल जाता है, तो प्रभावित जगह को तुरंत 20 मिनट तक साफ, ठंडे या सामान्य तापमान वाले बहते पानी के नीचे रखें। जली हुई जगह पर टूथपेस्ट या बर्फ न लगाएं।

अगर आंख में चिंगारी चली जाए तो आंख को बिल्कुल न रगड़ें और तुरंत अस्पताल जाएं। गंभीर रूप से जलने या सांस लेने में परेशानी होने पर बिना देरी किए चिकित्सा सहायता लें।

बच्चों के साथ इस तरह मनाएं दिवाली

माता-पिता बच्चों के साथ मिलकर दिवाली पर कोई स्वादिष्ट पकवान बना सकते हैं। इससे बच्चे घर के कामों में हिस्सा लेंगे और परिवार के साथ उनका समय भी अच्छा बीतेगा।

इसके अलावा, शाम को जब मेहमान घर आएं तो बच्चों को उनसे दिवाली की शुभकामनाएं लिखवाने और उपहार देने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस तरह पटाखों से दूर रहकर भी बच्चों के साथ दिवाली को यादगार बनाया जा सकता है।