Packaged Foods की Labelling में हो सकता है बड़ा बदलाव, 10 सितंबर को Supreme Court में अहम सुनवाई

भारत में Packaged Foods की labelling को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। FSSAI ने ज्यादा Sugar, Salt और Saturated Fat वाले products के लिए packet के सामने Warning Label लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस मामले में 10 सितंबर को Supreme Court में अहम सुनवाई होने वाली है।

दरअसल, Food Safety and Standards Authority of India यानी FSSAI ने Packaged Foods के लिए Front-of-Pack Warning Label (FoPWL) का proposal दिया है। इसका मकसद consumers को किसी food product के बारे में जरूरी health information आसानी से देना है। यानी packet के पीछे दिए गए लंबे Nutrition Chart को पढ़े बिना ही ग्राहक को सामने से पता चल सके कि किसी product में Sugar, Salt या Saturated Fat की मात्रा ज्यादा है।

प्रस्ताव के तहत ऐसे products की packaging के सामने Red Hexagonal यानी छह कोने वाला Warning Symbol लगाने की बात कही गई है। इसका मकसद यह है कि product खरीदते समय consumer की नजर सबसे पहले इस warning पर पड़े और वह ज्यादा Sugar, Salt या Saturated Fat वाले food को लेकर informed decision ले सके।

हालांकि, इस proposal को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि किस product पर Warning Label लगाया जाएगा। FSSAI ने इसे phased manner यानी अलग-अलग चरणों में लागू करने का proposal रखा है।

शुरुआती यानी पहले phase में किसी product पर Warning Label तब लगाया जाएगा, जब उसमें तीन में से कम से कम दो nutrients तय limit से ज्यादा हों। इनमें Added Sugar, Salt/Sodium और Saturated Fat शामिल हैं।

इसे एक आसान example से समझें। अगर किसी food या drink में Sugar की मात्रा बहुत ज्यादा है, लेकिन उसमें Salt और Saturated Fat तय limit के अंदर हैं, तो शुरुआती phase में उस product पर Warning Label लगना जरूरी नहीं होगा।

Health Activists इसी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर किसी product में सिर्फ एक nutrient की मात्रा ही बहुत ज्यादा है, तो भी consumer को इसकी clear warning मिलनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर अगर किसी drink में Sugar काफी ज्यादा है, तो सिर्फ इसलिए उसे warning से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए क्योंकि उसमें Salt और Saturated Fat कम हैं।

Health Groups चाहते हैं कि एक भी nutrient तय limit से ज्यादा होने पर Warning Label लगाया जाए, ताकि consumers को product की सही जानकारी मिल सके और वे खरीदने से पहले बेहतर फैसला ले सकें।

FSSAI के proposal में बाद के phase में rules को और strict करने की बात कही गई है। दूसरे phase में अगर किसी product में एक भी nutrient तय limit से ज्यादा होता है, तो उस पर संबंधित Warning Label लगाने का proposal है। हालांकि, दूसरा phase कब शुरू होगा और इसकी exact timeline क्या होगी, इसे लेकर सवाल अभी बने हुए हैं।

इसके अलावा Warning Label के size और font को लेकर भी concerns सामने आए हैं। Health Activists का कहना है कि सिर्फ warning लगा देना काफी नहीं है। Warning इतनी बड़ी और clear होनी चाहिए कि दुकान या supermarket में product खरीदते समय consumer उसे आसानी से देख सके।

अगर Warning Label बहुत छोटा हुआ या packaging के design में दब गया, तो consumer का ध्यान उस पर नहीं जाएगा और इस पूरी व्यवस्था का मकसद कमजोर पड़ सकता है।

इस पूरे मामले में “Added Sugar” भी एक अहम मुद्दा है। Health Activists चाहते हैं कि consumers को आसानी से समझ आए कि किसी product में अलग से कितनी Sugar डाली गई है और उसकी मात्रा कितनी है। वहीं Food Industry के लिए अलग-अलग products और ingredients पर nutritional limits लागू करना एक बड़ी regulatory challenge हो सकती है।

इस proposal का असर भारत की बड़ी Packaged Food Industry पर भी पड़ सकता है। Health Groups इसे public health के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि Food Industry को चिंता है कि अगर products पर Warning Labels लगाए जाते हैं, तो इससे consumers की perception और कुछ products की sales पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, कई बड़ी Food Companies ने संकेत दिया है कि अगर सरकार final rules लागू करती है, तो वे इन rules को comply करने के लिए तैयार हैं।

प्रस्तावित Warning Label system का असर Chips, Namkeen, Biscuits, Cookies, Instant Noodles, Packaged Snacks, Sweetened Beverages और कुछ Breakfast Cereals जैसे products पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर Packaged Food के packet पर Red Warning Label लग जाएगा। यह product में मौजूद nutrients की मात्रा और सरकार द्वारा तय nutritional limits पर depend करेगा।

इस मामले में 10 सितंबर की Supreme Court hearing काफी अहम मानी जा रही है। इससे पहले 13 अगस्त 2026 को Supreme Court ने Centre और FSSAI की ओर से इस मामले में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी। अब अगली सुनवाई में proposed Warning Label system को लेकर आगे की स्थिति साफ हो सकती है।

यहां यह भी साफ करना जरूरी है कि Red Warning Labels अभी पूरे देश में लागू नहीं हुए हैं। फिलहाल FSSAI का यह एक proposed system है और इसे लेकर आगे की प्रक्रिया चल रही है।

अब 10 सितंबर को होने वाली सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि Supreme Court इस मामले में क्या निर्देश देता है और क्या सरकार के proposed rules में कोई बदलाव किया जाता है। अगर यह system final होकर लागू होता है, तो आने वाले समय में Packaged Food खरीदते वक्त consumers को Brand और Price के साथ-साथ packet पर लगी Health Warning पर भी ध्यान देना होगा।